सावन की शिवरात्रि का क्या है महत्व, कुंवारी कन्याएं क्यों रखती हैं शिवरात्रि का व्रत

शिवरात्रि का त्यौहार भगवान शिव-पार्वती को समर्पित है। इस दिन भक्त, शिव-पार्वती की आराधना करते हैं, शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हैं। इशान संहिता के मुताबाक शिवरात्रि साल भर मनाई जाती हैं, हर माह के कृष्ण त्रियोदशी के बाद अगर चतुर्दशी लग जाती हैं तो शिवरात्री हो जाती है। सावन शिवरात्रि को काँवर यात्रा का समापन दिवस भी कहा जाता है, जो मानसून के श्रावण मतलब जुलाई-अगस्त के महीने मे आता है। हिंदू तीर्थ स्थानों हरिद्वार, गौमुख, गंगोत्री, सुल्तानगंज में गंगा नदी, काशी विश्वनाथ, बैद्यनाथ, नीलकंठ और देवघर के साथ दूसरे कई स्थानों से गंगाजल लगाकर शिव मंदिरों में पवित्र जल को चढ़ाया जाता है।
धर्माचार्या कृष्णा शर्मा बताती हैं कि शिव चौदस के दिन शिव ज्योतिष की उत्पत्ति हुई थी, हिंदु धर्म में शिव का अभिषेक करते हैं। उसमें हम पंचदेवों के अलावा दूध दही, से अभिषेक करते हैं इसके अलावा हम गिलोए से भी अभिषेक कर सकते हैं जो कि दीर्घआयु के लिए होता हैं। गन्ने के रस से भी अभिषेक करते हैं, घी से भी करते है
ं।

भगवान शिव का सबसे प्रवित्र दिन शिवरात्रि, सकारात्मक उर्जा का श्रोत है, इसलिए जल चढ़ाने के लिए पूरा दिन ही पवित्र और शुभ माना गया है। सावन में शिवरात्रि की पूजा-विधि, सावन शिवरात्रि का महत्व और शुभ मुहूर्त जानना बेहद जरुरी है। ज्योतिष के जानकार वैराग्य के मुताबिक शिवरात्रि के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजकर10 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक रहेगा। सावन की शिवरात्रि के साथ ही त्योहारों की शुरुआत हो जाती है। श्रावण मास में पड़ने वाले चार सोमवार और सावन शिवरात्रि दोनों ही शिवभक्तों के लिए महत्व रखते हैं। वैराग्य बताते हैं कि शिवरात्रि के मौके पर शिव बहुत जल्दी पसन्न होते हैं. मान्यता है कि शिवशंभू, जल चढ़ाने से अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं. प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. शिव को भोले के नाम से जाना जाता है. शिव की पूजा करने की विधि भी बेहद आसान माना जाती है. भोले की सच्चे मन से पूजा करना ही काफी है. सामान्य पूजा और सच्चे मन से पूजा कर ही आप शिव को प्रसन्न कर सकते हैं। शिवरात्रि के दिन भक्त व्रत रखें। और मान्यताओं के अनुसार, शिवरात्रि के दिन ये काम जरुर करें। भोले प्रसन्न होंगे

शिवरात्रि पर कैसे करें पूजा-
सुबह जल्दी उठें और स्नान करें। मंदिर में जाते समय जल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी, इत्र, चंदन, केसर, भांग सभी को मिलाकर चढ़ाएं। शिवरात्रि पर भगवान शिव का अभिषेक करें। भगवान शिव को भोग लगाएं। शिव को गेंहूं से बनी चीजें अर्पित करें। एश्वर्य पाने के लिए शिव को मूंग का भोग लगाएं। मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए शिव को चने की दाल का भोग लगाएं. शिव को तिल चढ़ाने की भी मान्यता है। माना जाता है कि शिव को तिल चढ़ाने से पापों का नाश होता है।