क्या सनातन के संवाहक सभी संत खराब है?

जयपुर। बाबा शब्द को हमारे यहां दो प्रकार से समझा जा सकता है। एक पिता के पिता और् एक सम्मानीय संत जिनका कर्तव्य है कि समाज में फैली बुराई आपने तप और् जप से दूर करे। वैदिक काल में अंग्रेजो के आने से पहले तक साधू, संत, महात्मा, बाबा सम्मान की दृष्टि से देखे जाते थे। गुरुकुल के समय यही साधू बाबा हमारे लिये वैज्ञानिक, शिक्षक और् पथप्रदर्शक के रूप में समाज को बहुत कुछ देकर गए।

आर्यभट्ट, वराहमिहिर, बोधायन, चरक, सुश्रुत, नागार्जुन, चाणक्य, कणाद जैसे सनातनी वैज्ञानिक संत साधू बाबा के रूप में ही रहते थे ना कि कंठ लगोट लगाते थे। इन्ही बाबाओं ने चिकित्सा, खगोल विज्ञान, धातुकर्म, भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणितीय पद्धति, अंतरिक्ष विज्ञान आदि में की गई खोज का आज एक विज्ञान दस प्रतिशत भी नही पा सका है।

आधुनिक विज्ञान अभी ध्वनि की तरंगों का क, ख, ग भी नही समझ पाया है जिसमे एक ग्रह से दूसरे ग्रह पर ध्वनि तरंगों से बात करते थे। ऐसे ही बाबाओं की खोज से वैदिक विज्ञान का ज्ञान मिला। आधुनिक विज्ञान में मेडिटेशन अभी आरंभिक काल में है, जिसमे सशरीर आप किसी काल में आ जा सकते थे। पर अंग्रेजो के आने के बाद से बाबा, संत डराने की बस्तु बना दिये गए… सो जाओ नही तो बाबा आ जायेगा! सनातन की सभी उपलब्धियां हास्य और् व्यंग्य की वस्तु बन गई, चोटी, तिलक, पूजा, मंदिर, भगवा आदि सभी घृणा करने जैसी स्थिति में गई। कैसे?? अचानक नही… धीरे धीरे सभी सनातिनियो के दिमाग में हमारी संस्कृति के निशानों को हेय बनाया गया। और् हम गोरी गोरी चमड़ी के जादू में खोते गए। पर किसी और् सप्रदाय ने यह षड्यंत्र उनकी मान्यताओं के नही होने दिया।

क्रिश्चियन और् इस्लाम ने खुल कर विरोध किया। टीवी पर सुना तो होगा कि एक मुस्लिम सारे आम कहता है कि ‘हमारे नवी’ के विरोध में बोलोगे तो यंही सर काट देंगे। पर हमने विरोध नही किया। हमारे यँहा सर काटने का नियम ही नही है पर बोले भी नही। सिर पर चोटी रखनी बंद कर दी…तिलक लगाना छोड़ दिया… की लोग क्या कंहेगे। हम जान बूझ कर षड्यंत्र का शिकार होते रहे। मौलवी का वीडियो देखा होगा जिसमें एक बच्ची के साथ अश्लील हरकत कर रहा है? एक ही क्यों रोज अखवार में, टीवी पर खबरे आती है कि इस मौलाना, मौलबी, फादर, नन, प्रीस्ट ने ये किया वो किया पर कोई समाचार, टीवी प्रमुखता से दिखता है?

नही!! क्यों? क्यों कि वह समाज सख्त विरोध करता है। और् हम संत आसाराम, रामपाल, राम रहीम की हर बात जानना चाहते है, सभी गुफा देखना चाहते है… जो देखना चाहते है वही टीवी आपको खूब चटकारे लेकर दिखाता भी है। हो सकता है यह बाबा, संत खराब हो, व्यसनी हो, व्यभचारी हो पर क्या आपको पता है आप के चटखारे सभी सनातन की हानि कर रहे है। आप पेड़ की वही डाली काट रहे है जिस पर बैठे है?

सभी समाचार में टीवी पर एक ही बात हो रही है सभी बाबा, संत, साधू ढोंगी है? अभी बिहार में एक बेटे ने अपने पिता को दस हज़ार के लिये गोली मार दी क्या इसका अर्थ हुआ कि सभी पिता अपने बेटे पर विश्वास करना छोड़ दे? उत्तर प्रदेश में एक माँ ने अपने 10 साल के बेटे की बलि दे दी क्या इसका अर्थ हुआ की सभी माँ चांडाल होती है? एक डॉक्टर ने गुर्दे निकाल कर बेच दिए तो सभी डॉक्टर फर्जी है?

बीस लाख संतो, बाबा में कुछ खराब है और् होते भी है, अभी और भी मिल सकते है तो क्या सनातन के संवाहक सभी संत खराब है?

बड़े बड़े जटाएं, भगवा वस्त्र, ऊंची बजनदार आवाज बच्चो को डराने के लिये है या आशीष दिलाने के लिये, चरण वंदन के लिये? विचारें अवश्य। हमारा अपना धर्म है कि जो संत बाबा लगता है गलत है उसको हम ही अपने समाज से बाहर करें ना कि विधर्मियों को हमारा मजाक बनाने का मौका दे। यदि ना समझे तो बहुत देर हो चुकी होगी, बहुत देर !!!

डॉ विजय मिश्र के फेसबुक वॉल से साभार