किसी भी अदालत को धर्म के संबंध में निर्णय देने का अधिकार नहीं है – शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती

तिरुवनंतपुरम/ धर्मयात्रा डेक्स। केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। हिंदू संगठनों से लेकर साधू-संतों तक सबरीमाला में महिलाओं की प्रवेश के मुद्दे पर आक्रामक दिख रहे हैं। इस बीच सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं का प्रवेश कर पूजन करने के मामले में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का बयान सामने आया है।

द्वारिकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस देव स्थान में महिलाओं के प्रवेश पर शास्त्रों के अनुसार प्रतिबंधित है। वहां महिलाओं का प्रवेश अनुचित है और धर्म के मामले में अदालत को फैसला करने का कोई अधिकार नहीं है।

शंकराचार्य ने महिलाओं के सबरीमाला में प्रवेश को गलत बताते हुए तर्क दिया कि कई महिलाएं मासिकधर्म से होती है और उस समय वह सूतक से होती है ऐसे में मंदिर के अंदर प्रवेश करने से वहां की पवित्रता नष्ट होती है इस लिए सबरीमाला में महिलाओं पर प्रतिबंध धर्मसंगत हैं।