हिन्दू हितों की बात करने वाला पत्रकार रोहित सरदाना मुसीबत में…

नई दिल्ली। हिंदूवादी वक्ता वकील कमलेश तिवारी की तरह रोहित  सरदाना के विरोध में प्रदर्शनों व पुलिस रिपोर्ट की शुरूवात हो चुकी है। देश के हिन्दू शांत बैठे है। ऐसे मे क्या होगा अगर हिन्दू साथ नही देंगे तो रोहित सरदाना का मन टूट जायेगा।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र का रहने वाला ये छोटे कद का राष्ट्रवादी पत्रकार जिहादियों से घिरा पड़ा है। आप में से बहुत से लोग इन्हें देखते और सराहते आए हैं। रोहित के कट्टर राष्ट्रवादी रवैये की वजह से उन्हें तथाकथित वामपंथी एजेंडाबाज़ पत्रकार संघ और भाजपा का प्रवक्ता भी कह देते हैं। खैर वो तो चलन हो गया है आजकल कि भारत देश की बात करने वाला, मुस्लिम तुष्टिकरण का विरोध करने वाला, भारत स्वाभिमान का समर्थन करने वाला, विदेशी चीज़ों की जगह स्वदेशी की वकालत करने वाला, देश विरोधी ताकतों की चाटुकारिता ना करने वाला हर व्यक्ति संघ और भाजपा से जोड़ दिया जाता है…
चलो अच्छा है, चरण चाटुकार होने से भाजपाई/संघी होना लाख गुणा बेहतर है…
छोड़िए
मुद्दे की बात ये है कि गोवा में चल रहे फ़िल्म फैस्टिवल में दक्षिण भारत से आई एक फ़िल्म ” दुर्गा” को भारत सरकार ने बैन कर दिया…
इस फ़िल्म का पूरा नाम आप सभी जानते होंगे पर मैं अपनी आराध्य देवी शक्ति के लिए इस प्रकार का शब्द प्रयोग नहीं कर सकता…
तो बात ये है कि रोहित सरदाना ने सरकार के इस फैसले का समर्थन करते हुए कह दिया कि इस देश में सैक्सी दुर्गा जैसा ही नाम क्यों दिया जाता है? कोई सैक्सी आयशा या सैक्सी फातिमा नाम क्यो नही रखा जाता.? बस यहीं से आग लग गई…
आठ दस मुकद्दमे हो चुके हैं अगले के विरुद्ध, और इससे भी मन ना भरा तो रोहित और उनके परिवार को देश विदेश से फ़ोन करके धमकियाँ दी जा रही हैं गाली गलौज की जा रही है…
जिन नंबरों से कॉल आ रही हैं वो नंबर रोहित सरदाना सार्वजनिक भी कर चुके हैं फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से, आगे की कहानी मैंने सुनी है कि रोहित के विरुद्ध ईशनिंदा के तहत और प्रदर्शन होने वाले हैं…
अब ये हमें देखना है कि जाट, राजपूत, बनिया, यादव, गुर्जर, ब्राहमण बनकर एक दूसरे को सीना फुला कर दिखाने वाले हम जातिवादी एक सच्चे राष्ट्रवादी पत्रकार के साथ खड़े होते हैं या नहीं…