महिला को बराबरी का हक देता है इस्लाम-अशरफ अशरफी जिलानी

डूंगरपुर। ऑलइंडिया उलेमा महाइख बोर्ड के कौमी सदर मुहम्मद अशरफ अशरफी जिलानी किछौछवी शरीफ ने कहा कि कोर्ट तक तीन तलाक पहुंचने का मामला महिलाओं से हमदर्दी कम और राजनीतिक ज्यादा हो गया था। उन्होंने कहा कि इस्लाम महिला को बराबरी का हक देता है।
उन्होंने कहा कि हमारा देशी सूफी संतों की विचारधारा का है। हर 100 किलोमीटर में हमारी भाषा, संस्कृति बदल जाती है। इसके बाद भी सभी धर्म और विचारधारा के लोग हम सदियों से साथ रहते आए हैं। यही हमारे देश की ताकत भी है। इसी कारण देश आज विश्व शक्ति बनने की दौड़ में तेजी से बढ़ रहे हैं। यह अन्य ताकतवर देशों के लिए परेशानी का कारण है। इस कारण वे देश में किसी किसी तरह फूट डालना चाहते हैं। जो अब संभव नहीं है और विश्व गुरु फिर से बनकर सूफी संतों की संस्कृति को श्रेष्ठ साबित करेंगे।

उन्होंने कहा सवा अरब आबादी के इतने बड़े देश में छोटी-मोटी बातें होती रहती है तो यह कोई आश्चर्य नहीं है। इससे सोच को नकारात्मक रखकर पीछे हटने की जरूरत नहीं है। तीन तलाक के मुद्दे को लेकर इस्लाम में जो व्यवस्था है, वह महिला को बराबरी का हक देती है। उन्होंने माना कि तीन तलाक एक साथ कह देने से शादी तोड़ना संभव है, लेकिन तरीका गलत है। तीनों बार तलाक कहने के लिए दिया गया बीच का समय पूरा होना जरूरी है। जिस तरह सभी धर्मों में व्यवस्थाएं होती है, इसी तरह यह भी एक व्यवस्था ही है।कई सेलिब्रिटिज ऐसी है जो साथ रहना नहीं चाहती है, लेकिन कोर्ट में 5-6 से साल तक तलाक के फैसले नहीं आने से मामले लंबित रह जाते है। इस कारण वे फिर से घर भी नहीं बसा सकते। धर्म में इसका यह तीन तलाक का रास्ता दिया गया है।