राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के सानिध्य में समरसता, स्वच्छता एवं सद्भाव का लिया गया संकल्प 

नई दिल्ली। महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी से हरिजन सेवक संघ एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस से जुड़े विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं और देश-विदेश से आये सदस्यों ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन  में भेंट की। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी द्वारा ’महात्मा गांधी लाइफ टाइम पीस एंड सर्विस पुरस्कार’ से नवाजा गया जो हरिजन सेवक संघ की ओर से प्रदान किया गया इस अवसर पर हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष श्री शंकर कुमार सान्याल जी, उपाध्यक्ष श्री नरेश यादव जी एवं जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी उपस्थित थे।
तत्पश्चात हरिजन सेवक संघ के लगभग 100 सदस्य जो की भारत के विभिन्न प्रांतों एवं विश्व के विभिन्न देशों से आये थे उनके साथ एक ग्रुप फोटो राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी के साथ हुआ। राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने परमार्थ की आरती को याद करते हुये कहा मैं आरती में गया हुँ वहा रहा हुँ, उस तट पर जाकर मन दिव्यता से ओतप्रोत हो जाते है वह आरती शान्ति प्रदान कराने वाली है। उन्होने सभी से कहा कि परमार्थ निकेतन की आरती में जब भी समय मिले जरूर सहभाग करें वह आत्मशांति प्रदान करने वाली है। राष्ट्रपति जी ने भारत के विभिन्न प्रांतों से आये हरिजन सेवक संघ के सभी सदस्यों से कहा कि अपने साथ अनेकों युवाओं को भी जोड़ा जायें जिससे गांधीवादी विचारधारा भारत से सभी युवाओं में भी घर कर सकें। उन्होने उपस्थित सभी कार्यकर्ताओ की सराहना की।
बिहार से विशेष रूप से लाया गया बोधि वृक्ष की एक शाखा से बना पौधा राष्ट्रपति भवन के उद्यान  में महामहिम राष्ट्रपति जी विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा रोपित किया गया। अखिल भारतीय गांधीवादी कार्यकर्ता सम्मेलन के सफलतापूर्वक सम्पन्न होने तथा युवाओं को आगे मार्गदर्शन देने हेतु जो कार्ययोजना तैयार की गई उस विषय पर चर्चा हुई।
परमार्थ  निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने चर्चा के दौरान कहा कि हमारी संस्कृति सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया के विचारों पर आधारित है साथ ही अब इसे चरितार्थ करने का समय है; हम समरसता, स्वच्छता, सद्भाव और बन्धुत्व की बात करते है परन्तु अब दिल से इस ओर कार्य करने की आवश्यकता है तथा अपने-अपने स्तर पर इसके लिये समाज को जागरूक करना होगा तभी हम सामाजिक न्याय की संकल्पना को चरितार्थ कर सकते है। उन्होने कहा कि भारत विश्व के सभी देशों के मध्य सामंजस्य, विश्व शान्ति और वैश्विक भाईचारा स्थापित करने के लिये प्राचीन काल से ही प्रयासरत है इसके साथ हमें राष्ट्रीय एकता अर्थात धर्म और जातिवाद से उपर उठकर यह सोचने की जरूरत ही कि चाहे हम जो भी हो परन्तु हमारा ध्वज तो एक है इससे राष्ट्र बन्धुत्व की भावना सुदृढ़ होगी स्वामी जी ने कहा कि आज के युवाओं को यह संदेश, यह संस्कार देने की नितांत आवश्यकता है।
स्वामी जी ने महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी से बढ़ते वायु प्रदूषण के विषय में चर्चा करते हुये कहा कि यह वायु में घुला प्रदूषण का जहर लोगों की आयु को कम कर रहा है यह चितंन का विषय है। उन्होने कहा कि हमारे पास हिमालय रूपी धरोहर है जो वर्तमान समय में अमेजन के बाद दूसरे नम्बर पर ऑक्सीजन उत्पाद है हम मिलकर इस ओर कार्य करे तोेे हमारा देश अव्वल दर्जे का प्राणवायु उत्पादक बन सकता है। हम भारत की ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर प्रदूषित होती प्राणवायु को स्वच्छ जीवनदायिनी बनाने में सक्षम हो  सकते है। हमारी तो ’अर्पण, तर्पण और समर्पण’ की संस्कृति है और वृक्ष तो हमारी संस्कृति में हमारे आराध्य भी है। पीपल और तुलसी के पौधे धार्मिक महत्व के साथ स्वास्थ्यवर्धक गुणों से ओतप्रोत है तथा ये 23 से 24 घण्टे प्राणवायु ऑक्सीजन छोड़ते है इनका रोपण, क्रांति की तरह किया जाये तो शीघ्र हम विश्व के लिये ऑक्सीजन उत्पादक देश बन सकते है।
हरिजन सेवक संघ एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस से जुड़े विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं और देश-विदेश से आये सदस्यों ने राष्ट्रपति भवन एवं उद्यान का अवलोकन किया साथ ही स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी को प्रथम भेंट में दिया रूद्राक्ष का पौधा जो राष्ट्रपति भवन के उद्यान में सुशोभित है के भी दर्शन किये।
राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद एवं स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में श्री शंकर कुमार सान्याल जी, अध्यक्ष, हरिजन सेवक संघ हरिजन सेवक संघ, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, आर्गेनिक इण्डिया के प्रमुख भारत मित्रा, सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी, शोभित विश्वविद्यालय के वाइस चासंलर, जागरण विश्व विद्यालय के वाइस चासंलर एवं  एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस से जुड़े विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं और देश-विदेश से आये सदस्यों ने समरसता, स्वच्छता एवं सद्भाव का लिया संकल्प लिया।