हरियाणा के श्री राजेन्द्र अहीर ने बाबा रामदेव की कथा को बताया ‘सफ़ेद झूठ’ 

नई दिल्ली। रामदेव जी और हम एक ही जिले से हैं ।मेरा गांव बेवल से रामदेव का गांव सैदअलीपुर मात्र 30 किलोमीटर है ।कई बार गया हूं सैद अलीपुरपुरा गांव। यह गाँव अहीर बाहुल्य है । मन्दिर के नाम पर गांव मे एक शिवालय है बस ।ब्राह्मणों के केवल चार पांच घर हैं उस गांव में। फिर यह टी वी वाले गप्प कथाएँ क्यों दिखा रहे हैं ??? गप्प गाथाएं:

जियो टीवी एप पर एक नया सीरियल आया है- संघर्ष स्वामी रामदेव। उसका एक वीडियो देखा जिसमें एक बच्चा भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को छू देता है। उसके बाद पंडित/पुजारी उस बालक को पिछड़ी जाति का बताकर आग बबूला हो जाता है और गाँव वालों को इकठ्ठा करता है। बच्चे को रस्सी से बांध दिया जाता है। गाँव वाले उस पंडित के सामने हाथ जोड़कर खड़े रहते है।

बच्चे के माता-पिता ऐसे लाचार होकर खड़े रहते है जैसे सारे गाँव में उनका कोई नहीं है और आज बच्चे की बलि चढ़कर रहेगी। फिर पंडित अचानक बच्चे को रस्सी मुक्त करने का आदेश दे देता है तथा बच्चे के माता-पिता को बच्चे सहित गाँव छोड़ने का फरमान सुना देता है। इस वीडियो को देखने के बाद आसानी से समझ आएगा कि हमारे देश भारत में गप्प कथाओं को कितने बेहूदे ढंग से प्रचारित किया जाता रहा है।

रामदेव की उम्र कितनी होगी? मुश्किल से 70 साल। इससे ज्यादा उम्र के बुजुर्ग भारी संख्या में गाँवों में बैठे हुए है। किसी भी बुज़ुर्ग से पूछो “आपके टाइम क्या धार्मिक गिरोह के लोग इतने पावरफुल होते थे कि एक परिवार को गाँव से निकाल दें और सारा गाँव उनके आगे हाथ जोड़कर खड़ा रहे”। सारे बुजुर्ग इस बात पर हँसेंगे।

रामदेव अहीर जाति से है। अहीर एक किसान ट्राइब है। किसान ट्राइब्स की बसावट का एक पैटर्न होता है, जहाँ भी वे रहते हैं, समूह में होते हैं। एक गाँव में 60 फीसदी घर अहीरों के हैं , 2 फीसदी घर पंडित जी के। कुछ ही साल पहले पंडित जी मैं इतनी हिम्मत थी कि अहीर परिवार को गाँव से सिर्फ इसलिए निकाल दें कि एक बच्चे ने मूर्ती छू दी और बच्चे को बाँध दिया जाए? और गाँव वाले हाथ जोड़कर उसके सामने खड़े रहें?

सच तो यह है कि ये पंडित-पुजारी गाँव वालों से जैसे तैसे चून मांगकर दो टाइम की रोटी का जुगाड़ करते थे। पहले के अनपढ़ लोग धार्मिक और अंधविश्वासी नहीं बल्कि दयालु थे, इसलिए धर्म के नाम पर पेट भरने वालों को भी अपने गाँव में शरण देते थे। क्या का क्या दिखाया जा रहा है? आटा मांगकर पेट भरने वालों को शक्तिशाली और आटा देने वाले लोगों को लाचार और दीन-हीन? हे देशवासियों! समझ सकते हो इंडिया का इतिहास कैसे लिखा गया होगा?

भारत में लोगों की सहानुभूति बटोरने का यह बहुत पुराना आईडिया है, खुद को शोषित और ब्राह्मण, ठाकुर, बनिया को शोषक बताकर सहानुभूति बटोरी जा सकती है। यह बेहद शर्मनाक है।

-श्री पुष्पेन्द्र मिश्र, अध्यक्ष, सनातन हिन्दू युवा वाहिनी, दिल्ली प्रदेश।