न राम, न रहीम सिर्फ गुरमीत सिंह, अब 20 साल के लिए सश्रम जेल में

रोहतक/ विकास सिंह बघेल। इसे मायाजाल का नायक कहें, या आतंक का महानायक। यह इंसान परलोक सुधारने के नाम पर इसलोक में अपने अनुयायियों का शारीरिक शोषण करता था। इस मायावी इंसान के लिए संत की परिभाषा, पहनावा सब कुछ अलग था, वो इस धरती पर अपने को खुदा से कम नहीं समझता था। अपने मायावी व्यक्तित्व की आड़ में मासूम भक्तों की आस्था और उनके शरीर से खिलवाड़ करता था। लेकिन इसे ये नहीं पता था कि भारतीय न्यायतंत्र की बुनियाद इतनी मजबूत है कि उसका बच पाना मुमकिन नहीं होगा। साल 2002 में साध्वी के साथ यौन शोषण करना डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के लिए भारी पड़ गया। 25 अगस्त को जब राम रहीम अपने लाव-लश्कर के साथ सीबीआइ की विशेष अदालत में पेश हुआ तो खुद को भगवान मानने वाले राम रहीम के चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई थीं। सीबीआइ की विशेष अदालत के सामने वो रहम की भीख मांग रहा था।

सीबीआइ की विशेष अदालत ने डेरा प्रमुख राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाई। धारा 376, 511 506 के तहत राम रहीम को सजा मुकर्रर की गई। सोमवार दोपहर 2.30 बजे से सुनारिया जेल में जज ने फैसला पढ़ना शुरू किया। सीबीआइ के वकीलों ने डेरा प्रमुख राम रहीम को ज्यादा से ज्यादा सजा देने की मांग की। डेरा प्रमुख राम रहीम के वकीलों ने उनके सामाजिक कार्यों का हवाला देते हुए कम से कम सजा देने की मांग की। सुनारिया जेल में जिस वक्त जज साहब फैसले को पढ़ रहे थे, उस वक्त राम रहीम की आंखों में आंसू थे और हाथ जोड़कर वह अदालत से रहम की मांग कर रहे थे

राम रहीम के वकील ने कहा कि राम रहीम समाजसेवी हैं इसलिए उनके साथ नरमी बरती जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राम रहीम ने लोगों की भलाई के लिए काम किया है। सफाई अभियान और रक्त दान जैसे सामाजिक कार्य किए हैं। उधर सीबीआई ने राम रहीम के लिए अधिकतम सजा यानी की आजीवन कारावास की मांग की थी। जांच एजेंसी की दलील थी कि यह सिर्फ रेप केस नहीं, बल्कि भरोसा तोड़ते हुए लगातार यौन शोषण किए जाने का मामला है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राम रहीम के लिए 20 साल कारावास की सजा का ऐलान किया। जाहिर है कि राम रहीम के वकीलों की कोई भी दलील अदालत में नहीं चल पाई।

इससे पहले 25 अगस्त को सिरसा की विशेष सीबीआई अदालत ने डेरा चीफ गुरमीत राम रहीम को साध्वी रेप केस में दोषी करार दिया था। इसके बाद डेरा समर्थकों ने हरियाणा, पंजाब और राजधानी दिल्ली तक में बवाल किया था। खास तौर पर पंचकूला और सिरसा में पत्थरबाजी, आगजनी और तोड़फोड़ की कई घटनाओं को अंजाम दिया गया था। इस हिंसा में 30 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। फैसला सुनाए जाने से पहले हिंसा की आशंका के मद्देनजर पूरे रोहतक को सील कर दिया गया था। पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की 23 कंपनियों ने रोहतक के अंदर और बाहर तैनात की गईं और सुनारिया जेल के ईदगिर्द बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया था। हरियाणा में आज सभी सरकारी दफ्तर बंद रहे। रोहतक, पंचकूला और कैथल में सभी स्कूल और कॉलेजों को बंद रखा गया। रोहतक में कम से कम 9 हजार पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं। इसके अलावा सेना को भी स्टैंड बाय में रखा गया है। रोहतक में 100 से ज्यादा डेरा अनुयायियों को रविवार को ही पुलिस हिरासत में लिया गया था। पंजाब सरकार ने भी एहतियातन 29 अगस्त तक के लिए मोबाइल इंटरनेट, एमएमएस और डोंगल सर्विस को निलंबित कर दिया है।

जाहिर है डेरा प्रमुख राम रहीम की काली करतूतें उसके आश्रम की चारदीवारी को लांघकर मुश्किल से बाहर आती थीं। लेकिन जब वो सीबीआइ की विशेष अदालत से गुनहगार साबित हुआ और उसके खिलाफ सनसनीखेज जानकारियां सामने आ रही हैं, जो साबित करती हैं कि संत के चोले में राम रहीम के मंसूबे कितने खतरनाक थे।