’धर्म संसद’ में राम मन्दिर निर्माण पर हुआ विचार मंथन, संघ प्रमुख बोले- अयोध्या में सिर्फ राम मंदिर बनेगा

ऋषिकेश। दक्षिण भारत कर्नाटक प्रांत का पवित्र स्थल उडुपी जो तपस्वीयों की धरती है वहां पर आयोजित हुई ’धर्म संसद’। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने धर्म संसद में शिरकत की।
आज की धर्म संसद में स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक  श्री मोहन भागवत जी, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री प्रविण तोगडि़या जी, पेजावर मठ के स्वामी विश्वेश्व तीर्थ जी,  श्री सुत्तुर स्वामी जी महाराज, श्री निर्मल नाथ जी महाराज, श्री राघवेन्द्र भारती जी महाराज, श्री विरेन्द्र हेगड़े जी, स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज एवं हजारों की संख्या में पूज्य संतों ने शिरकत की।
धर्म संसद में अपने विचार व्यक्त करते हुये मोहन भागवत ने कहा, ”राम जन्म भूमि पर राम मंदिर ही बनेगा और कुछ नहीं बनेगा, उन्हीं पत्थरों से बनेगा, उन्हीं की अगुवाई में बनेगा जो इसका झंडा लेकर पिछले 20-25 वर्षों से चल रहे हैं। भागवत ने कहा, ‘हम मंदिर का निर्माण करेंगे, यह लोकलुभावन घोषणा नहीं है, बल्कि हमारे विश्वास का विषय है। यह नहीं बदलेगा’। भागवत ने कहा कि वर्षों के प्रयास और त्याग की बदौलत अब राम मंदिर बनने की संभावना दिखी है। उन्होंने साथ में यह भी कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। आरएसएस चीफ ने कहा कि राम मंदिर बनने से पहले लोगों में जागरूकता होनी जरूरी थी। हम मंजिल के बेहद करीब हैं और इस वक्त हमें और ज्यादा सचेत रहना है।

वहीं परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा ’आज इस मंच पर ऐसी महापुरूष विद्यमान है जो लोगों के मनों को बदलते है, वे केवल मंच से उपदेश ही नहीं देते बल्कि मनों को; दिलों को बदलते है। अब शुरूआत हो चुकी है दिलों को बदलने की। ऐसे लोग जिन्होंने पत्ते खा कर भी जीवन का पता बताया; ऐसे लोग जो सूखी सी काया और सूर्य सा तेज ऐसे उडुपी के पेजावर मठ के श्री स्वामी विश्वेश्वर तीर्थ जी, तपस्वी और मनस्वी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक श्री मोहन भागवत एवं अन्य तपस्वी संतों की वजह से भारत जिंदा है, भारत की संस्कृति जिंदा है और धर्म जिंदा है। जब तक हमारी परम्परायें, हमारे संस्कार और हमारी संस्कृति जिंदा है भारत जिंदा रहेगा। लोग तो यज्ञ करते है पर इन्होने तो अपने जीवन को ही यज्ञ बना लिया, इन्होने तो अपने जीवन की आहुति दी है राष्ट्र मन्दिर के निर्माण में। उन्होने कहा कि राम मन्दिर तो बन रहा है पर इसे आवेश में नहीं बल्कि सबका समावेश करके बनाये। इसमें सब का समावेश हो सबको साथ लेकर चले जिससे राम मन्दिर तो बनेगा साथ ही राष्ट्र मन्दिर भी बनेगा।

स्वामी जी ने कहा कि इसी धर्म संसद ने जब उद्घोष किया था 1985 के अंत में और 1986 के शुरूआत में जब राम मन्दिर का ताला खोला गया था और आज का यह मंच लोगो के दिलों पर किसी वजह से जो भ्रम के ताले लगे है उसे तोड़ने के लिये एक प्रयास किया जा रहा है। उन्होने कहा कि मन्दिर का ताला तो  खुल गया परन्तु समाज में आज भी लोगो के दिलों में जो जातिवाद, आतंकवाद, भ्रांतिवाद, भाई-भतिजावाद, भेदभाव, छुआछुत के ताले है इन सब तालों को भी तोड़ना होगा और उसकी एक ही कुंजी है वह कि हम सब एक है एक परिवार है इस भाव से अगर आगे बढ़ेंगे तो निश्चित रूपेन ये सब ताले खुलेगे और लोगो का यह हृदय परिवर्तन पूरे देश के लिये, सम्पूर्ण विश्व के लिये मशाल का कार्य करेंगा और मिशाल बनेंगा। यह दिलों से दिलों को जोड़ते हुये सद्भावना की जो मशाल है वह एक मिशाल कायम करेंगी। भारत के ये पूज्य संत जिनकी वजह से भारत जिंदा है ये देश के चलते-फिरते राष्ट्र मन्दिर है, यही जीता जागता भारत है जब तक ये जिंदा रहेगे भारत जिंदा रहेगा।
आज की धर्म संसद में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने श्री मोहन भागवत जी एवं श्री स्वामी विश्वेश्व तीर्थ जी महाराज को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। स्वामी जी धर्म संसद में भारी संख्या में उपस्थित संतों के साथ पर्यावरण संरक्षण की भी चर्चा की।