आखिर क्या है बाबा रामदेव पर बने सीरियल का सच

जयपुर। चाणक्य द्वारा बाबा रामदेव पर डिस्कवरी चैनल (जीत) के सीरियल ‘एक संघर्ष’ में ब्राह्मण का अपमान दिखाने पर चाणक्य के तत्वाधान में एक टीम रामदेव के पैत्रृक गाँव दिनांक 5 मार्च 2018 को भेजी गई थी, जिसपर मिली रिपोर्ट आपके सामने प्रस्तुत है। टीम मेम्बर जिन्होंने रामदेव के गाँव ‘सेदअलीपुर’ जिला महेंदार्गढ़ जाकर सच्ची की खोजबीन की उनमें
1. डॉ विजय मिश्रा, जयपुर, समाज के बहुत से पटल से जुड़े है।
2. श्री पुष्पेन्द्र मिश्रा, दिल्ली, सनातन हिन्दू युवा वाहिनी, प्रदेश अध्यक्ष
3. श्री रजनीश शुक्ला, दिल्ली, अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद्, राष्ट्रीय अध्यक्ष शामिल थे।

रामदेव (राम किशन यादव, असली नाम) की जीवन की गाथा पर बना एक सीरियल ‘एक संघर्ष’ का प्रसारण डिस्कवरी के नये चैनल ‘जीत’ पर किया गया। इस सीरियल में ब्राह्मण को एक अहंकारी, दुराचारी, निर्दयी, क्रूर और षड्यंत्रकारी के रूप में देश को बाँटने बाला और अत्याचारी दिखाया गया है। जब की सत्य इससे कोसों दूर है। आज कल सनातन का अपमान लोगों को राजनीती में आने और सस्ती लोकप्रियता पाने का सरल रास्ता बन गया है। जयपुर में मनु महाराज की मूर्ति तोड़ने और मनुस्मृति को जलाते जलाते एक अदना सा व्यक्ति जिग्नेश मेवाणी आज देश की मूल राजनीति का हिस्सा और गुजरात विधानसभा में बैठा दिखाई दे रहा है। रामदेव, अभी हाल ही में शनि, राहू, केतु सभी का अपमान करते करते सनातन का अपमान भी करते देखा जा सकता है।

इस सीरियल में दिखाया है की रामदेव एक गरीव कृषक परिवार में जन्मे थे और गाँव के पेड़ से लटक कर पढाई किया करते थे। गॉव में एक कृष्ण का मंदिर था जिसमे रखी कृष्णा की प्रतिमा के छू जाने पर रामदेव को प्रताणित किया जाता है। गॉव में एक पंडित गोवेर्धन नाम का है। जब रामदेव भगवान् कृष्ण के कपडे पहन लेते है तो पंडित कहते है “यह मंच यादवों की औकात से बहुत ऊपर है। भगवान कृष्णा की प्रतिमा को छूने की कोशिश कैसे की?” यादवों को पिछड़ी जाति का और ब्राह्मणों को उच्च जाति दिखाने के प्रयास में रामदेव ने इस सीरियल में अति कर दी। link नीचे है देख ले। रामदेव के उच्चश्र्ख्ल स्वभाव और उद्दंड व्यवहार के कारण पक्षाघात पड़ने पर पास के गुरुकुल में भेजा गया। जब की सीरियल में दिखाया है की बाबा ने अपमान के कारण गाँव छोड़ा।
रामदेव को स्कूल की शिक्षा में ऊँची जाति बाले रामदेव को नीची जाति का कहकर बेइज्जत करते है। यादव कब से नीच जाति हो गई? link
https://www.youtube.com/watch?v=W5i-OjGLgOY]

रामदेव द्वारा यादवों को अछूत बताना यदुवंश का अपमान, बाबा की छुद्र सोच का परिणाम है। यदुवंश के कृष्ण, मुरलीधर, वासुदेव, सर्वपालक तथा यदवेंद्रा जो यादव वंश के मुखिया है को भी अपमानित किया है जो अक्षम्य है। कृष्ण सनातन में पूजक माने जाते है जिनको अव पूरा विश्व पूजता है को भी अछूत बताना, रामदेव ने गंभीर अपराध किया है। रामदेव योग के लिए समर्पित योग और स्वदेशी की भावना जगाने जैसा उच्च कार्य करने पर पूजक थे पर अपने ही कुल के घाती बन अपना हित के लाभ के लिए एसा निम्न कार्य करेगे किसी नें नही सोचा होगा।

सर्व प्रथम विप्र दल रामदेव के बचपन में गॉव से पंहुचे ‘आर्ष गुरुकुल, खानपुर, जिला नारनौल (हरियाणा) में गुरुकुल के आचार्य देवाचार्य में बताया की रामदेव 1982 से लेकर 1985 तक गुरुकुल में रहे। रामदेव का जन्म 1965 में हुआ इसका अर्थ रामदेव 17 या 18 साल तक गाँव में ही रहे। आश्रम के आचार्य ने बताया की उनका कार्यकाल बहुत पुराना नही है तो अधिक नही जानते पर बाहर निकलते हुए श्री वीरसिंह यादव ने खिल कर बताया की यह क्षेत्र यादव बाहुल्य क्षेत्र है यहां कभी किसी ब्राह्मण द्वारा अपमान की घटना सोचना भी अनर्थ है। यंहा गाँव में 200 यादवों के बीच एक या दो ब्राह्मणों के घर ही पाए जाते है। जिससे ब्राह्मणों द्वारा किसी अत्याचार की कल्पना करना भी असम्भव है।

रामदेव को 15 वर्ष की उम्र में पक्षाघात के कारण पास के ‘आर्ष गुरुकुल, खानपुर, में आचार्य प्रद्युम्न के पास ले जाया गया जो की आर्य समाजी और व्याकरण के अच्छे जानकर भी थे जंहा रहकर रामदेव ने योग और संस्कृत आदि की शिक्षा लेने लगे। गॉव के लोगों ने बताया की आर्य समाज के प्रभाव के कारण एक बार घर की सभी भगवान् की मूर्तियों को जमीन में खड्डा खोद कर गाड़ दी जिससे इनके बड़े भाई देवदत्त ने रामदेव (राम किशन) की बहुत पिटाई की पर इस बात पर रामदेव के बड़े भाई देवदत्त से पूछने पर मौन धारण कर लिया।

राम किशन यादव आज का प्रचलित नाम ‘बाबा रामदेव’ गाँव सेद अलीपुर यादव बाहुल्य क्षेत्र है, तथा गॉव पानी की कमी के बाद भी किसी भी भांति गरीव गाँव नही कह सकते है। रामदेव का गाँव में एक भव्य मकान देखा जा सकता है। रामदेव के दादा श्री पूसाराम यादव बोहरे (ब्याज पर पैसा देना) का कार्य करते थे। इसका सीधा अर्थ है की बाबा समर्थ थे और संपन्न थे।

गाँव में आज एक बड़ा मंदिर और दो अन्य छोटे छोटे मंदिर है। रामदेव के समय केवल एक ही मंदिर था जो ठाकुर जी का है। गाँव में श्री कृष्ण का कोई मंदिर ना था ना है। गाँव के यादवो ने 30 बीघा जमींन देकर एक मंगतू ब्राह्मण नाम के परिवार को गाँव में बसाया था जिससे पूजा अर्चना विधिवत होती रहे जिसके एक पुत्र मांगू ब्राह्मण के एकलौते दामाद निरंजनलाल का परिवार आज भी गाँव में पूजा पाठ करता है। आज भी यादवों के 300 से अधिक परिवार में ब्राह्मण के दो परिवार है। किस प्रकार संभव है की रामदेव पर ब्राह्मणों ने अत्याचार किये?

रामदेव का अति महत्वकांक्षी होना सभी जानते है। राजनीति के लिए बनाये “स्वाभिमान दल” की असफलता से क्षुब्द होकर अब घ्रणा की राजनीती में पैर अजमाने की सोच रहे है। संत समाज को जोड़ने का कार्य करता है ना की तोड़ने का। एक शुद्ध झूठी कहानी बना कर दिखाना यह सिद्ध करता है की कोई बड़ा षड्यंत्र चल रहा है जिसके आखेट पर फिर से ब्राह्मण ही है। रामदेव के गाँव बालो ने पतंजलि का सामान खरीदना बंद कर दिया है क्यों की एक यादव जाति को अछूत कह कर अपमानित किया गया है। हरियाणा में कई स्थानों पर यादवों ने ही रामदेव के विरुद्ध रामदेव का पुतला जला कर विरोध किया है।

जयपुर निवासी पूर्व आईएएस अफ़सर श्री जी.पी. शुक्ल का कहना है कि रामदेव का यह सीरियल 175 देशों में दिखाया जा रहा है, इतने बड़े पैमाने पर जाने बाला सीरियल किसी तरह की गलती नहीं हो सकती। यह एक सोची समझी योजना के अंर्तगत किसी बड़े सनातनी नरसंहार की और इशारा कर रहा है। कहीं बाबा रामदेव सनातनियों और ब्राह्मणों का यहूदियों की भांति नरसंहार की योजना में लिप्त तो नहीं है? मेरा अनुरोध है कि सभी रामदेव विरोधी रामदेव के षड्यंत्र का पर्दाफाश करें और उनके सफ़ेद झूठ के विरुद्ध अपना विचार दृढ़ता के साथ व्यक्त करें।

साभार- डॉ विजय मिश्रा, जयपुर,