धर्म के नाम पर नशे को बढ़ावा दे रहे हैं अखाड़े- त्रिकाल भवंता

इलाहाबाद। परी अखाड़े की प्रमुख साध्वी त्रिकाल भवंता ने अखाड़ा परिषद द्वारा पिछले दिनों जारी की गयी फर्जी संतों की लिस्ट पर सवाल उठाते हुए परिषद को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को किसी संत, महात्मा या बाबा को असली या फर्जी बताने का अधिकार नहीं है। परिषद सिर्फ तेरह अखाड़ों की संस्था है, उसे उन्हीं की व्यवस्था देखने तक ही सीमित रहना चाहिए। सनातन धर्म में कई संप्रदाय है, ऐसे में मनमाने तरीके से कोई सूची जारी करना इसके लिए घातक है। अखाड़ा परिषद को बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।

सवाल यह भी उठता है कि राधे मां और सच्चिदानंद गिरि जैसे लोगों को जिन अखाड़ों ने मान्यता दी और महामंडलेश्वर बनाया, उनकी संस्था को ऐसी कोई सूची बनाने से पहले अपने गिरेबां में भी झांकना चाहिए। इतना ही नहीं अखाड़ों की संपत्तियों की भी जांच जरूरी है। आरोप लगाते हुए कहा कि धर्म के नाम पर अखाड़े नशे को बढ़ावा देने का केंद्र बन गए हैं। यदि वह इसके लिए शिव का सहारा लेते हैं तो शिव जैसा एक भी संस्कार दिखाएं।

बतादें कि पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने साफ किया कि यह कहने का आशय किसी दुराचारी बाबा को समर्थन देना नहीं है लेकिन जब कानून और समाज आगे बढ़कर आया, तब परिषद ने ऐसी कोई सूची क्यों जारी की। यदि कोई ऐसे काम में लिप्त है, तो उसके बारे में पहले आगाह करना चाहिए था।