प्राणिक हीलिंग एक अनुपम विद्या- गुरु डॉ. अर्चिका दीदी

संस्थापक, विश्व जागृति मिशन, नई दिल्ली
सुधांशु जी महाराज

नई दिल्ली। दुनिया के सभी देशों में ईश्वर को किसी न किसी रूप मे किसी न किसी नाम से माना जाता है। चाहे मंदिर मे पूजा करनी हो, मस्जिद मे इबादत करनी हो, चर्च मे प्रैयर करनी हो, अथवा गुरुद्वारे मे अरदास करनी हो हम उस परम शक्ति की आराधना करते हैं। क्या किसी ने उसे देखा है। ‘नहीं’ तो फिर हम किस शक्ति की पूजा करते हैं, आराधना करते हैं। क्या वो मंदिर मे है क्या मूर्ति में है यह कोई नहीं जानता। बस एक विश्वास है जो हमे इन सबसे जोड़े रखता है। यह विश्वास भी बेकार नहीं है हाँ कोई शक्ति है जो सर्व व्याप्त है। जो पूरे ब्रहमाण्ड को चला रही है। जो हमारी सांसों को चला रही है जो हमारी दिल की धड़कन को चला रही है। जिसके द्वारा सूर्य उदय होता है, हवाए चलती है, समुद्र मे ज्वार भाटा आता है सुनामी आती है, भूकंप आते हैं जो पूरी प्रकर्ति को नियंत्रित करता है। जो विभिन्न प्रकार के फूल खिलते है, गन्ना मीठा और आम खट्टा होता है। एक छोटे से बीज मे बड़ा विशाल पेड़ छुपा देता है अथवा एक स्पर्म मे नए जीवन जो उत्पन्न करने की शक्ति देता है। इसी अद्रश्य शक्ति को ईश्वरीय शक्ति कहते हैं। इसी शक्ति को हम विभिन्न रूपो मे पूजते है प्रैयर करते हैं और अहसास करते हैं।

डॉक्टर तो ऑपरेशन करता है परंतु आपरेशन के बाद घाव को कौन भर्ता है। अगर आपकी चलती सांस रुक जाये तो कौन चला सकता है क्या कोई डॉक्टर अथवा वैज्ञानिक मरे हुये को जीवित कर सकता है। क्या विज्ञान हवा के रुख को बदल सकती है तो फिर प्रकर्ति पर किस शक्ति का कंट्रोल है। सोचा है कभी एक मरते हुये आदमी की चलती आखिरी सांसों को जब वो एक एक सांस के लिए तरसता है और फिर सांस निकलते ही वही शरीर बेकार हो जाता है जिसे हम जीवित रहते बहुत प्यार करते हैं उसी को दफनाना हमारी मजबूरी हो जाता है। अब बताओ क्या कुछ एहसास हुआ उस शक्ति का जो पूरे संसार को चला रही है। इसी ईश्वरीय शक्ति को प्राणिक शक्ति या कॉस्मिक एनर्जी कहते है।

अब सोचो यदि इस शक्ति को आकर्षित करना आ जाए तो हम क्या प्राप्त नहीं कर सकते है। आकर्षण एक ऐसी स्वाभाविक क्रिया है जिससे सभी ब्रह्मांड चलता है सभी नक्षत्र बंधे है और अपनी कक्षा मे परिकर्मा कर रहे हैं। जिससे पूरी प्रकृर्ति चलती है एक बंधन मे। पृथ्वी अपनी आकर्षण शक्ति से सभी चीजों को अपनी ओर खीच रही है जिसके कारण हम भार महसूस करते हैं। हम मानव भी किसी सुंदर और अच्छी चीज़ की ओर आकर्षित होते हैं। इसी को कहते है “लॉं ऑफ अट्रैक्शन” अर्थात आकर्षण का नियम। यदि हम कुछ क्रियाओ द्वारा अपने अंदर ऐसे शक्ति पैदा कर ले  की हम ईश्वरीय शक्ति को अपनी ओर आकर्षित कर सके तो उसके द्वारा हम वो सब कर सकते है जो हम चाहते हैं। इसी शक्ति को आकर्षित कर हम अपने को और दूसरे को व्याधि मुक्त कर सकते हैं। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया को “प्राणिक हीलिंग” कहते है।

गुरु डॉ. अर्चिका दीदी

हमारे शरीर मे व्याप्त प्राण शक्ति को संचालित करने के लिए दिव्य चक्षु धारकों ने शरीर मे स्थित चक्रों को अनुभव किया है। हमारे शरीर की प्राण ऊर्जा इन्ही चक्रों द्वारा पूरे शरीर मे संचारित होती है। माना जाता है की 7 मुख्य चक्र हमारे शरीर को स्वस्थ रखने मे सहायक होते है। जब यह चक्र निगेटिव एनर्जी से प्रभावित हो जाते है तो उनमें गड़बड़ियाँ शुरू हो जाती है और हम बीमार हो जाते है। शरीर करोड़ों कोशिकाओं से बना है और हर कोशिका एक जीवित सेल है जिसमें ऊर्जा उत्पन्न होती है जो हमारे शरीर की समस्त क्रियाओं का संचालन करती है। इसी ऊर्जा से हमारे शरीर के चारो ओर एक औरा बनता है जो एक एल्क्ट्रो मगनेटिक फील्ड होती है। इसके पहले की हमारी फ़िज़िकल बॉडी मे बीमारी हो हमारा औरा प्रभावित होता है और उसके बाद बीमारी हमारे शरीर मे प्रवेश करती है।

ब्राहमाण्ड से ईश्वरीय शक्ति को आकर्षित कर उसे इकट्टा करके व्याधि ग्रस्त व्यक्ति को देकर प्राण ऊर्जा बढ़ाई जाती है जिससे बीमारियाँ ठीक होती है। जिस प्रकार कोई संत या अन्य अपने हाथो से आशीर्वाद देता है उसी प्रकार प्राणिक हीलर ईश्वरीय शक्ति को किसी भी व्यक्ति को ऊर्जा देकर उसे ठीक कर सकता है। इस ऊर्जा द्वारा विभिन्न चक्रों को प्रभावित कर उन्हे हील किया जाता है। यदि आप ईश्वर मे विश्वास रखते है तो उसकी ऊर्जा मे भी विश्वास पाये।

 

लेखक डॉ बी एस राजपूत द व्हाइट लोटस एवं युग ऋषि आयुर्वेद स्वस्थ्य केंद्र के प्रशासक हैं।