विश्व जागृति मिशन के निदेशक राम महेश मिश्र की कलम से पीएम मोदी की पीड़ा…

नई दिल्ली। देशवासियों का राष्ट्रप्रेम व संस्कृतिप्रेम बना कुछ लोगों की समस्या। जिसे वे छोड़ नहीं सकते। वे हमारे पूर्वजों को, देश को, हमारे मानबिंदुओं को अपमानित और ध्वस्त करें, लव-जेहाद की पृष्ठभूमि बनवायें, झूठा इतिहास इम्पोज करें, अपने स्क्रिप्ट से सीधे-सीधे फिल्म-जेहाद करें, समाज को दूषित करने वाली फिल्में बनायें, तो कोई हरज नहीं; लेकिन हम अपने पूर्वजों, पितरों, मातृभूमि और भारतीय संस्कृति के लिए कुछ कहें तो “अब यह देश ही खराब हो गया है।” इन वामियों, सामियों के नाते हम अपने देश को भी प्रेम नहीं कर सकते, यह कौन सा न्याय है? ये जहां जाते हैं वहां का इतिहास ही नष्ट कर देते हैं, अपने बाप-दादों का नाम ही मिटा देते हैं तो उनका राष्ट्र का कैसा स्वाभिमान होगा? कट्टरपंथी मुस्लिम शबाना आज़मी जो कि एक और कट्टरपंथी मुस्लिम जावेद अख्तर की बेगम है लेकिन मजहबी स्वभाव के अनुसार कभी-कभी वामी का चोला भी धारण करती हैं उनका लो-आईक्यू से भरा वाक्य देखिये ‘राष्ट्रवाद के कारण जीना मुश्किल’। वही जावेद अख्तर जिनने हिन्दुओं के खिलाफ जीवन भर फिल्मों के जरिये जिहाद किया। दोनों ही पद्मावती  फिल्म का नाम लेकर लगातार हिन्दुओं और भारत पर निशाना साधने में लगे हैं।

अभी हफ्ता भर पहले शबाना आज़मी ने कहा है कि भारत में राष्ट्रवाद के कारण जीना मुश्किल हो गया है।भारत अब राष्ट्रवाद के कारण रहने लायक देश नहीं रह गया है, भारत एक खतरनाक एक अशांत देश हो गया है, और राष्ट्रवाद भारत की बड़ी समस्या बन चुकी है।पद्मावती फिल्म के समर्थन में बात करते-करते शबाना आज़मी ने भारत को दुनिया के ख़राब देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया। इनकी केवल एक समस्या है, वह है बढ़ता देशप्रेम और राष्ट्रवाद। पिछले दिनों गुजरात में एक चर्च भी कह रहा था कि इस देश में राष्ट्रवाद को हरा दो। यहाँ हमारी बहिन शबाना आज़मी को भी समस्या है तो राष्ट्रवाद से।साफ़ है कि देश के कट्टरपंथी चाहे वो इस्लामिक कट्टरपंथी हो या ईसाई मिशनरियां इनको मुख्य समस्या राष्ट्रवाद से ही है। अपने देश और सत्य सनातन संस्कृति के ख़िलाफ़ सिर झुकाकर गालियाँ सुनते रहो तो यह देश इनके रहने लायक है। यह राष्ट्रवाद वर्ष 2014 के बाद आयी हिन्दू एकता के कारण ही समाज-देश में आ रहा है। देश के लोग विशेषकर युवा अब जागरूक हो रहे हैं। ईसाई मिशनरियों का धर्मांतरण का धंधा रुक रहा है, वहीँ इस्लामिक कट्टरपंथियों का फिल्म जिहाद रुक रहा है, और उसका कारण राष्ट्रवाद ही है।

पहले हिन्दू विरोधी फिल्में बनती थीं। ईसाई मिशनरियां धड़ल्ले से धर्मांतरण करवाती थीं। पर अब इनको रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि सनातनी हिन्दू एकजुट हो रहा है और उसके अंदर राष्ट्रवाद की भावना आ रही है। वह अब पन्थनिरपेक्षता के छलावे में नहीं आना चाहता। सारे सनातनी अब इस देश में केवल देशभक्त भारतीयों का ही सम्मान करने का दृढ़-मत बना चुके हैं। और, तभी ईसाई मिशनरियां हो या शबाना आज़मी जैसे कट्टरपंथी, इन सभी को राष्ट्रवाद से समस्या महसूस हो रही है। वहीं दूसरी ओर इस फिल्म का समर्थन करते हुए श्री जावेद अख्तर ने राजपूत समाज के खिलाफ टिप्पणी कर इस आग में घी डालने का काम किया।ये बॉलीवुड के जेहादी अपनी इस आदत से बाज नहीं आएंगे। कभी कोई बयान देता है तो कभी कोई और वो भी ऐसे नाजुक मुद्दों पर, जिसकी उन्हें पूरी जानकारी भी नहीं होती है और ऐसे बयान देकर वे देश की शांति को भंग करते है।

बता दें कि शबाना आज़मी के यह कहने के कुछ दिन पूर्व ही उनके पति कम्युनिस्ट लेखक व गीतकार जावेद अख्तर अपने ही बयान के कारण बुरी तरह आलोचनाओं से घिर गए। उन्होंने कहा था कि ,”राजपूत जाति के लोग कभी अग्रेजों से लड़े ही नहीं थे और अब वे सड़कों पर उतर रहे हैं। वे अपना राजपाट ताक पर रखकर अंग्रेज़ों की जड़ें हिला देने वाले अनेक राजाओं और झाँसी की वीरांगना रानी जैसों के बलिदानों को भूल गए। जावेद भाई ने कहा- राजपूत 200 वर्ष तक अग्रेजों के दरबार में पगडियां बांधकर खड़े रहे, तब उनकी राजपूती कहां थी। उन्होंने अग्रेजों की गुलामी की थी, यह लोग अपनी प्रतिष्ठा की बात ना करें। ऐसा बयान देकर उन्होंने राजपूत समाज की मान प्रतिष्ठा पर कड़ा वार किया।

भाई जावेद अख्तर के इस बयान से सारे राजपूत समाज में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस बयान के खिलाफ जयपुर के सिंधी कैंप थाना में जयपुर के कांतीचंद्र रोड़ बनीपार्क में रहने वाले अधिवक्ता प्रताप सिंह ने जावेद अख्तर के खिलाफ परिवाद कर दिया, जिसके बाद पुलिस इस मामले की कार्यवाही में लग गयी है। बता दें कि राजपूत समाज ने जावेद अख्तर की टिप्पणी से आहत होकर राजस्थान में जमकर विरोध प्रदर्शन करते हुए जावेद अख्तर का पुतला भी जलाया। प्रताप सिंह ने जावेद अख्तर के ख़िलाफ़ सिंधी कैंप थाना में अपने परिवाद में बताया कि,” राजपूत समाज हमेशा से ही त्याग और बलिदान का प्रतीक रहा है और जावेद अख्तर के इस बयान से समाज में अशांति पैदा हुई है।”

इसी तरह की एक घटना और पढ़िए और खुद आंकलन करिए। जिन मोदी जी ने ईसाई पादरी को छुड़वाया, उन्हीं के खिलाफ जहर उगलता घूम रहा है गुजरात का ईसाई पादरी। ये नमकहरामी नहीं है तो फिर और क्या है? जिस मोदी ने केरल के ईसाई पादरी को इस्लामिक स्टेट के आतंकियों से छुड़वाया, गुजरात का ईसाई पादरी उसी मोदी के खिलाफ जहर उगल रहा है। कह रहा है कि राष्ट्रवादियों को हरा दो और सत्ता बदल दो।आपकी याद होगा कि कुछ दिन पहले गांधीनगर के आर्चबिशप थॉमस मैकवान ने पत्र लिखकर ईसाई समुदाय के लोगों से देश को ‘राष्ट्रवादी ताकतों’ को वोट न देने का अनुरोध किया था।

प्रधानमंत्री जी ने जवाब में कहा कि यह राष्ट्रवाद ही था,जो विदेश में फंसे पादरी को सुरक्षित भारत वापस लाई।पीएम मोदी ने कहा, ‘जो लोग राष्ट्रवादियों के खिलाफ फतवे जारी कर रहे हैं, उन्हें उन प्रयासों पर भी गौर करना चाहिए, जो पादरी टॉम को वापस लाने के लिए किए गए। हम फादर प्रेम को भी स्वदेश लाने में कामयाब रहे, जिन्हें अफगानिस्तान में अगवा कर लिया गया था। पादरी टॉम उजुनालिल को यमन में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने बंधक बना लिया था, वह केरल के रहने वाले हैं।

पीएम ने कहा कि यह केवल राष्ट्रवाद ही है, जिसके बल पर पादरी टॉम और पादरी प्रेम को छुड़ाकर लाना संभव हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जब जूडिथ डिसूजा का अपहरण हुआ था, हमने वह सब कुछ किया, जो भारत की इस बेटी को वापस लाने के लिए हम कर सकते थे। हमारी नर्सें पश्चिम एशिया में फंसी थीं। जब मानवीय काम करने वाली नर्सें अशान्त विदेश में फंसी हों, तो भला कोई चैन से कैसे सो सकता है? उन्हें स्वदेश लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए।’

भारत! अब अविलंब सँभल जाओ-

आपने देखा कि राष्ट्रविरोधी कितने दोगले और नमक हराम होते हैं। जिन इस्लामिक ताकतों ने उन्हें बंधक बनाया, ये पादरी उन्हीं इस्लामिक ताकतों का साथ दे रहे हैं और जिन ‘राष्ट्रवादी ताकतों’ ने पादरी को बचाया, उन्हीं ‘राष्ट्रवादी ताकतों’ के खिलाफ ये पादरी फतवा जारी कर रहे हैं। आप देशवासी सहमत होंगे कि ये वामी-सामी-कामी सोच ही हमारे राष्ट्र की नींव को कमजोर कर रही है। यदि हाँ! तो ये जानकारियाँ बड़े पैमाने पर राष्ट्र की नयी पीढ़ी को दीजिए। यदि राष्ट्रवाद मर गया तो हमारा और आपका प्यारा भारत मर जाएगा, समाप्त हो जाएगा। यह अपने ही हाथों अपनी माँ भारती की हत्या होगी।