वादों-नारों की राजनीति से राष्ट्र गौरावशाली नहीं होगा-योगेश्वर श्रीकृष्ण गोपाल दास

BEFORE 15 DAYS OF INDEPENDENCE DAY A MAJOR SECURITY BREACH NEAR PARLIAMENT AND PRESIDENT HOUSE IN DELHI. 10 to 12 protestors from Rohtak , Haryana with Sant Gopal das suddenly came beside Parliament main entry and they break one after another the barrier and reach Vijay Chowk just near the Raisna Hills .Delhi Police official seems very scared and shouted "force jali bulao" just before Raisna hills they managed to cordone off the protestors .BSF Jawans and Delhi Police atlast detain the protestors.--------PIC BY ANINDYA CHATTOPADHYAY

दिल्ली/ धनंजय राजपूत। विजय निश्चित है राष्ट्र की आवश्यकता मात्र आह्वान की थी जिसका शंखनाद योगेश्वर श्रीकृष्ण गोपाल जी ने कर दिया है। गाय के पीछे पीछे चलने वाले इस ग्वाल ने ज्ञान वह कर्म का वह आदर्श प्रस्तुत किया जो दुनिया के लिए अनुकरणीय बन गई। दोनों सेनाओं के मध्य गीता जैसे ज्ञान का प्रस्फुटन हुआ कि तुम्हें अन्याय और अधर्म के खिलाफ लड़ना ही होगा, चाहे तुम्हारा सगा क्यों न हो, तुम्हारा पितामह क्यों ना हो। चाहे तुम पांच हो चाहे तुम्हारे सामने लड़नेवाला सैकड़ों हो लेकिन तुम्हें अन्याय और अधर्म के खिलाफ लड़ना ही होगा।
गोचरण पर गाय चराने वाले यदि श्री कृष्ण हमारे प्रेरणा पुंज है तो व्यवस्था परिवर्तन व गौमाता व गोचरणभूमि के लिए इस निर्णायक लड़ाई में हम सब गौभक्तो को सम्मलित होना ही पड़ेगा अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ी हमसे ये प्रश्न जरूर पूछेगी जब एक एक गौभक्त, राष्ट्रभक्त अपने अपने प्राण दांव पर लगाकर राष्ट्र की व्यवस्था परिवर्तन वह गोचरण भूमि और गाय के लिए लड़ रहा था तो तुम्हारा योगदान क्या था ..?
वादों-नारों की राजनीति से राष्ट्र गौरावशाली नहीं होगा। ये राष्ट्र गौरवशाली तब होगा जब ये राष्ट्र अपने जीवन मूल्यों परम्पराओ मान्यताओ को भारतीयता के आधार पर स्थापित करेगा हम सफल तब होंगे जब भारत को गौहत्या से मुक्त कर प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण कर पाएंगे।
अतः व्यक्ति समाज व् राष्ट्र को एक सूत्र में बाँध पाएंगे और वह सूत्र राष्ट्रीयता ही हो सकती है। सम्भव है राष्ट्र को एक सूत्र में बाँधने के लिए सत्ता से लड़ना पड़ेगा सत्ता से राष्ट्र महत्वपूर्ण है। राजनैतिक सत्ता से राष्ट्रिय हित महत्वपूर्ण है अतः राष्ट्र की बेदी पर सत्ता की आहुति देना पड़े तो भी किसी भारतीय को संकोच न करना पड़े। इतिहास साक्षी है सत्ता और स्वार्थ की राजनीति ने इस राष्ट्र का अहित किया है हमे सिर्फ राष्ट्र हित में विचार करना है
हमे राजनैतिक सत्ता प्राप्त करने के लिए नहीं बल्कि मोक्ष प्राप्त करने के लिए कार्य करना है और जब तक भारत की धरती से गौहत्या का कलंक मिट नही जाता शहीदों के सपनो का भारत नहीं बन जाता स्वराज्य नहीं आ जाता तब तक किसी भारतीय को मोक्ष मिलने वाला भी नहीं है