इस देश का संगम जिंदा रहेगा तो यह देश जिंदा रहेगा- स्वामी चिदानंद सरस्वती

प्रयागराज/ विकास बघेल।  शक्ति कुम्भ  “HSC ग्लोबल समिट” के समापन अवसर पर परमार्थ निकेतन शिविर, अरैल घाट प्रयागराज में दो हजार से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं, पूज्य संतों, फैथ विमेन लीडर्स, WSSCC, यूनिसेफ के उच्चाधिकारियों, महिलाओं, धर्मप्रेमियों ने सहभाग किया।
योगगुरू स्वामी रामदेव, स्वामी चिदानन्द सरस्वती,  अम्मा श्री करूणामयी, साध्वी भगवती सरस्वती, डाॅ बिन्नी सरीन, साध्वी प्राची कल्पना, महन्त दिव्या गिरि, महन्त लक्ष्मी नारायण, महामण्डलेश्वर साध्वी नैसर्गिका गिरि, सू कोट्स, यूनिसेफ के सिद्धार्थ श्रेष्ठा, स्वामिनी आदित्यनन्दा, सुश्री गंगा नन्दिनी, सलोनी गोयल, रितु सुहास और अन्य सभी विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। 
हजारों की तादाद मे उपस्थित छात्र-छात्राओं, महिला संगठन, दिव्यांगों और अन्य संस्थाओं के लोगों को परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और स्वामी रामदेव जी महाराज ने देश से बाल विवाह, महिला उत्पीड़न, बाल अपराध को समाप्त करने क संकल्प कराया। 
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष और ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने ओजस्वी सम्बोधन देते हुये कहा, “आज इस देश को किसी योग की आवश्यकता है तो वह है संगम का योग। इस देश का संगम जिंदा रहेगा तो यह देश जिंदा रहेगा। संगम, इस देश का समाधान है; संगम इस देश का संविधान है और वह संगम पैदा होता है एक सोच से और वह सो पैदा होती है मातृ शक्ति से। माँ है जो अपने बच्चों को सोच देती है और संस्कार देती है और उन संस्कारों से उड़ान देती है। देश की माताओं ने इस देश को स्वामी विवेकानन्द, स्वामी अरविन्द, स्वामी रामकृष्ण परमहंस, श्री रविन्द्रनाथ टैगोर और स्वामी रामदेव जी जैसे सुपुत्र दिये। स्वामी जी महाराज ने यूनिसेफ, यूनाइटेउ नेशन और WSSCC का धन्यवाद देते हुये कहा कि आज उन मुद्दों को उठ रहा है जिन मुद्दों की महत्ता हमारे ऋषियों ने हमें अपने संस्कारों में दी थी। ऋषियों द्वारा दिये संस्कारों को जिंदा रखने के लिये हमें मातृ शक्ति को जिंदा रखना होगा। मातृ शक्तियों को सामान दिजिये या न दिजिये परन्तु उनका सम्मान करिये। 
स्वामी जी महाराज ने पश्चिम बंगाल की उस बेटी को याद किया जिसने आईएएस की एक्जाम टाॅप किया था। कहा कि उस बेटी के पिता ने रिक्शा चलाया और माता ने लोगों के घरों में बर्तन धोये, उन्होने दो वक्त का भोजन नहीं किया और पैसों को बचाया और पक्का किया कि मैं अपनी बेटी को पढ़ाउँगा और आगे बढ़ाउँगा, बेटी ने यह देखा अपने पिता की इस मेहनत को और फिर उसने इतिहास रच दिया। मुझे गर्व है उस बेटी पर। जिस दिन उसका परिणाम निकला वह बेटी टापर बनी इस देश की। उसने सबसे पहला काम यह किया जिस रिक्शा से उसके पिता लोगों को ढ़ोते थे उस रिक्शा पर अपने पिता को बैठकर खुद रिक्शा चलाया उसने यह संदेश दिया कि बेटी बोझ नहीं बल्कि वरदान है। उसने संदेश दिया की आईएएस बनने के बाद मेडल तो मिला पर मैं एक माॅडल हूँ यह पूरे देश को दिखाया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि दुनिया में कोई छोटा नहीं है और कोई बड़ा नहीं है आज इन सब दीवारों को तोड़ दिजिये। आज इस संगम के तट से मातृ शक्ति के सम्मान का आह्वान। आप पढ़ेगे तो आगे बढ़ेगे, मैं उन माताओं को सलाम करता हूँ जो अपनी बेटियों को शिक्षित करती है। उन्होने कहा कि कुम्भ का मेला है भण्डारे होने चाहिये यह हमारी परम्परा है लेकिन आज समय आया है जब परम्पराओं को जन्म देने वाली शक्ति धक्के खा रही हो; शिक्षा खोज रही हो, भिक्षा मांग रही हो उस समय हमें भण्डारों को भी बंद करना पड़े तो कर दिजिये इस कुम्भ से यह संदेश जाना चाहिये। बहुत खा लिये भण्डारे उन्होने कहा संत भी तभी बचेगे जब माँ बचेगी। माँ अगर संस्कारी नहीं होगी तो संत भी योगी नहीं बनेगे, ढ़ोंगी बनेगे। माँ बचेगी, कन्या बचेगी तो भविष्य बचेगा। उन्होने बेटियों के माता-पिता से आह्वान किया कि दहेज में देने वाले धन को बेटियों की शिक्षा पर लगाये। बंद करिये इस दहेज के ढ़ोंग को; नाटक को यह दिखावा है। पहले शिक्षा की बात फिर हो शादी का पाठ। इस प्रकार समाज में आगे बढ़े। न्यू मिलेनियम मातृ शक्ति का मिलेनियम होना चाहिये इसके लिये हम सभी को आगेे बढ़ना होगा।
योगगुरू स्वामी रामदेव जी ने इस दिव्य आयोजन के लिये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का अभिनन्दन करते हुये कहा कि हम नारियों को हमेशा पूज्य मातृ शक्ति बोलकर सम्बोधित करते है। मैं भारत में वह दिन देखना चाहता हूँ जहां पर महिला सशिक्तकरण की बात न हो पुरूष सशिक्तकरण की बात हो। बेटियों का आह्वान करते हुये कहा कि आप ऐसी योग्य बने की बिना दहेज दिये लड़कों की शादी न हो सके, आपकी योग्यता पर इन्हे दहेज देना पड़े। बेटा और बेटी में भेद न करे, बेटियो को दिशा दे और उन्हे एमएले, एमपी नहीं बल्कि सीएम और पी एम बनाये इसके लिये माता पिता के भीतर जज्बा चाहिये। उन्होने कहा कि मेरे माता-पिता अशिक्षित है और मेरी पूरी शिक्षा पर मात्र 500 रूपये खर्च हुआ होगा परन्तु आज मैं 5 हजार बच्चों को पढ़ा रहा हूँ, 10 हजार को पढ़ा चुका हूँ और 1 करोड़ से अधिक बच्चों को पढ़ाने का संकल्प है। आप सभी अपने हौसले बुलंद रखे और उसे उड़ान देने के लिये कार्य भी करे; उसके लिये अपमान भी सहन करना होगा और तिल-तिल जलना होगा।
जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने महिलाओं को सम्बोधित करते हुये कहा कि ’’आज प्रयाग की धरती पर दो संगम है एक नदियों का दिव्य संगम और दूसरा शक्ति संगम। हमें आगे बढ़ने के लिये दो शक्तियों की जरूरत पडती है एक स्वयं की और दूसरी समाज से। कोई आपको बाहर से शक्ति नहीं देगा जो सबसे बड़ी शक्ति है वह अन्दर से प्राप्त होगी। उन्होने कहा कि आप जिन देवियों की पूजा करते है उनकी शक्ति आप में विद्यमान है उस शक्ति को आप पहचाने। सबसे बड़ी शक्ति हमें भारतीय संस्कारांे और संस्कृति से प्राप्त होती है।  साध्वी जी ने कहा मैं भारत आयी और भारत की ही होकर रह गयी क्यों? क्योंकि इस देश की संस्कृति और संस्कार पूरे विश्व में सबसे श्रेष्ठ और शक्ति सम्पन्न है वही शक्ति मुझे भी प्राप्त हुयी भारत आकर। आप सभी अपने संस्कारों और संस्कृति को याद रखे। आप स्वयं शक्ति है! आपको इस सच्चाई को पहचानना चाहिये कि आप कौन है। उन्होनेे महिलाओं से कहा कि आप किसी और की प्रतिक्षा ना करें आप अपने आप को सशक्त बनायें। आपकी व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के अलावा समुचित शिक्षा, मासिक धर्म प्रंबधन और समाधान, बाल विवाह को सामप्त करने तथा  समाज में व्याप्त असुरक्षा को सामप्त करना भी आपकी सामाजिक जिम्मेदारी भी है।’’
WSSCC की उपकार्यकारी निदेशक सू कोट्स ने कहा कि “कल धर्मगुरूओं द्वारा दिये उद्बोधनों और नेतृत्व के द्वारा तथा आज इस भव्य रैली और हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से हम लड़कियों को और सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे है। उन्होने एक छोटी बेटी की कहानी बताते हुये कहा कि आज के बाद कोई भी बेटी अकेली नहीं है हम सभी उनके साथ है। आज के बाद इस देश में कोई भी बेटी अकेली नहीं है हम सभी उनके साथ हमेश होंगे। उन्होने कहा कि बच्चों को स्वच्छता का, टीकाकरण का, शिक्षा का अधिकार चाहिये।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज ने हजारों की संख्या में उपस्थित जन समुदाय को संकल्प कराया कि हम अगले कुम्भ तक उत्तरप्रदेश को बाल विवाह से मुक्त करेंगे। उत्तरप्रदेश ही नही हम पूरे देश को बाल विवाह, जाति प्रथा, अन्धविश्वास, अज्ञान, अशिक्षा और गरीबी से मुक्त करेंगे तभी भारत परम वैभवशाली  भारत बनेंगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज और अन्य सभी विशिष्ट अतिथियों ने परमार्थ निकेतन की अनुपम परम्परा वाॅटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। वाॅटर ब्लेसिंग सेरेमनी विश्व में सभी को स्वच्छ जल की आपूर्ति एंव विश्व शान्ति के लिये की जाती है।