परमार्थ गंगा घाट पर भारत के पश्चिम और दक्षिण तटों की संस्कृतियों का मिलन

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन आश्रम के पावन गंगा तट पर पांच दिवसीय सत्संग शिविर का शुभारम्भ हुआ। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने स्वामी सत्श्री महाराज एवं स्वामी निर्गुण दास जी महाराज को पौधा भेंट कर आध्यात्मिक सत्संग शिविर का उद्घाटन किया। स्वामी जी ने कहा कि अब दीप प्रज्जवलित कर नहीं पौधा भेंट कर; पौधा रोपण कर करें कथा का शुभारम्भ।
सत्संग शिविर का आयोजन स्वामी नारायन सेवा ट्रस्ट सूरत गुजरात के द्वारा किया गया। इसमें सहभाग हेतु गुजरात प्रांत से 100 से अधिक संत एवं हजारों की संख्या में हरिभक्त, साधक पधारे है।  पूज्य स्वामी सत्श्री महाराज के श्रीमुख से हरि सत्संग सम्पन्न हो रहा है।
परमार्थ गंगा तट अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार के अलावा अनेक ऐतिहासिक कार्यक्रमों एवं विश्व विख्यात कथाओं के लिये प्रसिद्ध है। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी जी महाराज ने प्रत्येक सेमिनार और कथा को वृक्षारोपण एवं स्वच्छता से जोड़ कर पर्यावरण संरक्षण का अनूठा एवं नवोदित समाधान खोजा है जिसके आशाजनक परिणाम भी प्राप्त हो रहे है।
परमार्थ गंगा तट भारत सहित विश्व की विभिन्न संस्कृतियों के मिलन का केन्द्र है। यहां पर भारत के दक्षिण तट की तमिल उपनिषद् कथा का समापन और पश्चिम तट गुजरात की गुजराती शिविर साधना का आरम्भ हो रहा है यह दृश्य ’विविधता में एकता’ को मूर्त प्रदान कर रहा है।
इस पावन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’कथा एक पौराणिक आख्यान नहीं बल्कि जीवन का दर्शन है। कथा के माध्यम से प्रभु के गुणानुवाद के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के लिये भी कार्य किया जाये यही है जीवन की सार्थकता है। कथा के माध्यम से जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित किया जाता है उसे आत्मसात कर, उस पर अमल करने से स्वच्छ, स्वस्थ एवं सुखद भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।’
कथा व्यास स्वामी सत्श्री महाराज ने कहा कि ’सत्संग के द्वारा अन्तःकरण की शद्धि एवं वृक्षारोपण से वातावरण की शुद्धि होती है। जब अन्दर और बाहर दोनों शुद्ध हो तब होता है चिरस्थायी शान्ति का उद्भव अतः पौधारोपण आवश्यक ही नहीं जरूरत भी है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कथा व्यास स्वामी सत्श्री महाराज को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। साथ ही उन्होने हजारों की संख्या में उपस्थित साधकों को ’पेड़ लगायें, प्राण बचायें’ संकल्प कराया सभी साधकों ने हाथों को उठाकर पौधा रोपण का संकल्प किया।