परमार्थ गंगा तट पर प्रवाहित हो रही है शिव महापुराण- अर्द्धनारीश्वर अष्टकम की ज्ञान धारा

ऋषिकेश। परमार्थ गंगा तट पर नौ दिवसीय शिव महापुराण-अर्द्धनारीश्वर अष्टकम् का आयोजन लक्ष्मी फाउण्डेशन द्वारा किया गया। इस दिव्य कथा में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, आस्ट्रेलिया से आये आर्गेनिक इन्डिया के प्रमुख भारत मित्रा जी, अमेरीका से आये स्वामी परम अद्वैती जी एवं अनेक विदेशी सैलानियों ने आत्मोत्कर्ष करने वाले शिव महापुराण की कथा में सहभाग किया। शिव महापुराण की ज्ञानधारा ऋषिवर श्री किरीट भाई के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही हैं।
यजमान अवस्थी परिवार एवं निशांत गुप्ता जी ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, साध्वी भगवती सरस्वती जी, स्वामी परमअद्वैती जी एवं भारत मित्रा जी का कथा मंच पर भव्य स्वागत किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने ऋषिवर श्री किरीट भाई से कथा के उपरान्त अध्यात्म और पर्यावरण संरक्षण हेतु ’कथाकार सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी’, हरित शवदाह गृह, वृक्षारोपण कथा के समापन अवसर पर ’पेड़े नहीं पेड़ बांटे’ जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा  ’हमारी परम्परायें, आस्था और विज्ञान दोंनो पर आधारित है तथा कथाओं के माध्यम से आस्था और मजबुत होती है। साथ ही कथाकारों का प्रभाव; उनकी वाणी का प्रभाव समाज पर अद्भुत है उस प्रभाव का उपयोग करके गंगा, यमुना एवं देश की अन्य नदियों व पर्यावरण संरक्षण के लिये समाज को जाग्रत करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है; सबसे बड़ी साधना और सबसे बड़ी पूजा भी है। कथाकार समाज को एक नई दिशा प्रदान कर सकते है। उन्होने कहा कि हम प्रकृति का ध्यान तो करते है परन्तु उसका ध्यान नहीं रखते अब समय आ गया है कि हम प्रकृति का ध्यान भी रखे।’
स्वामी जी ने कहा स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त वातावरण हमारे स्वास्थ्य एवं समृद्धि का आधार है और भगवान शिव तो त्याग, तपस्या, करूणा और वात्सल्य आदि अनेक गुणों की मूर्ति है उनका चरित्र, उनका जीवन ही लोकहित को समर्पित था अतः प्रभु के जीवन से प्रेरणा लेकर अपनी आने वाली पीढि़यों के सुखद भविष्य के लिये माँ गंगा के तट से संकल्प लेकर जायें कि हम कथा की याद में वृक्षारोपण अवश्य करेंगे।’
स्वामी जी ने कथा व्यास ऋषिवर श्री किरीट भाई जी को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। उन्होने उपस्थित श्रद्धालुआंे, कथा प्रेमियों एवं विश्व के अनेक देशों से आये साधकों का आहृवान करते हुये कहा कि अब समय आ गया है कि ’किसी एक को नहीं बल्कि हर एक को लगाना होगा गंगा के लिये; अपनी जीवन दायिनी नदियों के लिये, पर्वतों, पहाड़ों, ग्लेश्यिरों, पेड़ों एवं बढ़ते वायु, जल एवं पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिये अपनी, योग्यता, सामर्थ एवं समय देकर इन्हे संरक्षित करने में योगदान अवश्य प्रदान करें।
ऋषिवर श्री किरीट भाई जी ने कहा शिव पुराण के उल्लेख मिलता है कि शिव को स्वच्छ जल, बिल्व, कंटीले एवं न खाये जाने वाली वनस्पतियांे को भेंट किया जाता है अर्थात भगवान शिव के चरित्र से प्रकृति प्रेम एवं संरक्षण का संदेश प्राप्त होता है। शिव का स्वरूप कल्याणकारी है हम भी स्वकल्याण के लिये ही सही वृक्षारोपण का संकल्प धारण करें। इस अवसर पर यजमान अवस्थी परिवार, दिल्ली, श्री निशांत गुप्ता जी, राजेश दीक्षित, आचार्य दीपक, आचार्य संदीप, नरेन्द्र बिष्ट, वृदावन एवं दक्षिण अमेरीका से आया साधकों के दल तथा परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार उपस्थित थे।