पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की पेशवाई आज, शामिल होंगे कई ‘विदेशी बाबा’

प्रयागराज/ देवेश दुबे। पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की पेशवाई शाही अंदाज में निकाली जाएगी। इस पेशवाई में सौ से अधिक महामंडेश्वर रथों पर सवार होकर निकलेंगे। भस्म-भभूत में लिपटे साधु-संतों का कारवां निहारने के लिए सड़कों पर बड़ी तादाद में भीड़ उमड़ेगी। नागाओं, संन्यासियों, बैरागियों के जत्थे लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेंगे। 31 तारीख की देर रात अलोपीबाग में महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई की तैयारियां की गई।

पेशवाई शुरू करने का समय सुबह नौ बजे है। परंपरागत तरीके से शाही अंदाज में हजारों की तादाद में साधु-संत निकलेंगे। ध्वजा, पताका, घोड़ा, हाथी, ऊंट के अलावा प्राचीन अस्त्र-शस्त्र के साथ नागा साधु चलेंगे। उनके साथ अखाड़े के महामंडलेश्वर, संत-महंतों की सवारियां चलेंगी। इस पेशवाई में कई विदेशी बाबा भी रथों-बग्घियों की शोभा बनेंगे। इसके अलावा अखाड़े के संतों के कई विदेशी शिष्य पेशवाई में शामिल होने के लिए प्रयागराज पहुंच चुके हैं।

शाही पेशवाई का रुट

शाही पेशवाई जमात बाग से बक्ख्शी बांध पुलिस चौकी, बख्शी त्रिमुहानी, बड़ी कोठी से दारागंज स्थित धकाधक चौराहा, महानिर्वाणी अखाड़े से होते हुए भगवान बेनी माधव मंदिर के पास से निराला मार्ग, मोरी होते हुए त्रिवेणी रोड से मेला क्षेत्र में प्रवेश करेगी। अखाड़े के मीडिया प्रभारी तीर्थराज पांडेय ने बताया कि शाही पेशवाई जब दारागंज में पहुंचेगी, तब कपिल मुनि की पालकी शामिल होगी। कपिल मुनि महाराज की जयकारे के साथ शाही पेशवाई में शामिल संतों का कारवां आगे बढ़ेगा। छह वर्ष में एक बार निकलने वाली इस शाही पेशवाई को देखने के लिए सड़कों की दोनों पटरियों पर श्रद्धाु कतारबद्ध रहेंगे।

पेशवाई की स्वागत में शहर की धार्मिक, सांस्कृतिक संस्थाएं

जगह-जगह पुष्पवर्षा के साथ आध्यात्मिक समितियों के पदाधिकारी और भक्त स्वागत करेंगे। कुंभ की तरह संगम को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत प्रयागराज सेवा समिति के अलावा दारागंज रामलीला कमेटी, अखिल भारतीय ब्राह्मण चेतना समिति, नारायण सेवा संस्थान के पदाधिकारी पेशवाई के स्वागत के लिए पहुंचेंगे। इससे पहले संतों माला पहनाकर और भस्म तिलक लगाकर पेशवाई की शुरुआत महंत राम सेवक गिरी महाराज करेंगे। महंत यमुना पुरी महाराज, महंत वासुदेव गिरी महाराज, महंत रविंद्र पुरी, महंत कैलाश भारती, महंत रमेश गिरी, शिव नारायण पुरी, महंत रविंद्र गिरी, दिगंबर रघुराज गिरि, दिगंबर शिव आनंदपुरी, दिगंबर राधे श्याम गिरी, दिगंबर प्रमोद पुरी, दिगंबर विवेक भारती समेत बड़ी तादाद में नागाओं के इस पेशवाई में शामिल होने की उम्मीद है।