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ईद-उल-अजहा पर मौलाना महली ने की अपील, बैन जानवरों की न करें कुर्बानी

लखनऊ/ बुशरा असलम। देशभर में 12 अगस्त को ईद-उल-अजहा यानी बकरीद मनाई जाएगी। ईद-उल-अजहा के मौके पर कुर्बानी दी जाती है। लेकिन कुर्बानी से पहले लखनऊ में मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने मुसलमानों से कुर्बानी में एहतियात बरतने की अपील की है।

मौलाना महली ने कहा, ‘मुसलमान कुर्बानी के वक्त साफ सफाई का विशेष ध्यान दें। नालियों में जानवरों का खून न बहाएं। कुर्बानी की जगह पर ही कु्रबानी करें। सड़कों पर जानवरों की कुरबानी न करें और जिन जानवरों को प्रतिबंधित किया गया हैं उन जानवरों को कतई कुर्बान न किया जाए.’ साथ ही उन्होंने कहा कि इस मौके की कोई भी फोटो न ही खींची जाएगी और न ही कोई फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की जाएगी। मौलाना खालिद ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह से भी मुलाकात की है। उन्होंने डीजीपी से किसानों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए निवेदन किया है। खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा अक्सर दूर दराज से अपने जानवर किसान शहरों में बेचने आते हैं लेकिन कई बार कुछ अराजक तत्व उनको परेशान करते हैं और उनके साथ मॉब लिंचिंग भी हो जाती है।

एक राष्ट्र, एक निशान एक विधान और एक प्रधान-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

6 अगस्त/ धनंजय राजपूत। धारा 370 को हटाने के फैसले का स्वागतकरते हुये परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि इदम् राष्ट्राय इदम् न मम। प्रभु शिव के श्रावण माह में आज भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ऐतिहासिक निर्णय लिया। हर पल हर क्षण देश का ही चिंतन करने वाले देश के इन दो शेरों ने आज कुछ ऐसा लिखा है जो आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक याद रखेगी। वास्तव में यह स्वर्ण अक्षरों में लिखी गयी इबारत है, जिसे स्वर्ण अक्षरों में पढ़ा जायेगा और स्वर्ण अक्षरों में गढ़ा जायेगा।
स्वामी जी ने कहा कि हमारे राष्ट्र में ऐसा ही तो चाहिये जिसमें सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास हो। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कश्मीरियों को लगेगा कि यह उनकी कितनी बड़ी भूल थी। यह कार्य पहले ही हो जाना चाहिये था। उन्हें भी लगेगा की अकेले-अकेले जीना किसी के भी हित में नहीं है। अब इस एतिहासिक और अभूतपूर्व निर्णय से प्यार बढ़ेगा, सहकार बढ़ेगा, व्यापार बढ़ेगा, रोजगार बढ़ेगा और सबसे बड़ी बात है देश का आधार बढ़ेगा। इससे पूरे विश्व में हमारे राष्ट्र को एक पहचान मिलेगी। यह पहचान लड़ाई के लिये नहीं बल्कि अच्छाई और सच्चाई की होगी।
स्वामी जी ने कहा कि यह कोई पद या कद पाने की बात नहीं है बल्कि बात है निष्ठा की है। हम सभी के भीतर अपने राष्ट्र के प्रति निष्ठा बढ़नी ही चाहिये। हमें यह सदैव याद रखना है कि हम सब एक है, एक परिवार है और साथ-साथ रहकर यहां सब मिलकर वतन के लिये देश के लिये कार्य करें ताकि देश ऊँचाईयों की बुलंदियों को सदैव छूता रहे। स्वामी जी ने कहा कि सरकार के द्वारा यह जो कदम उठायें जा रहे है वह किसी कंट्रोल के लिये नहीं है, न ही कोई अन्य रोल प्ले करने के लिये है, बल्कि यह तो इसलिये है कि हमारा राष्ट्र नयी ऊँचाईयों तक पहुंचे। हमारे देश में सबका विकास हो। इसलिये इस राष्ट्र के सभी बहन-भाईयों से एक ही प्रार्थना ही कि वे ऐसे निर्णयों को राष्ट्र हित में लेते हुये देश में अमन और शान्ति बनायें रखंे। उन्होने कहा कि काश भारत को यह दोनों शेर पहले ही मिल गये होते तो यह ऐतिहासिक कार्य पहले ही हो जाता। खैर देर आये दुरस्थ्त आये, एक दिन ऐसा होना ही था। इन दोनों शेरों ने आज जो कर के दिखाया वह केवल भारत के लिये ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को शान्ति का पैगाम देता रहेगा।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और गृहमंत्री श्री अमित शाह जी द्वारा धारा 370 को हटाना देशहित और जन हित में लिया गया ऐतिहासिक फैसला है क्योकि इस फैसले ने कश्मीर को नया जीवन प्रदान किया है। आजादी के 72 वर्षो बाद कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत को सम्पूर्ण भारत का दर्जा देना निर्णायक फैसला है। वास्तव में आज भारत को अखण्ड भारत का दर्जा प्राप्त हुआ है क्योकि सही मायने में 72 वर्षो बाद ही सही पूरे भारत में एक ही संविधान लागू होगा। अब एक राष्ट्र, एक जैसी नागरिकता और एक संविधान का ही अनुपालन होगा। आज से हर भारतवासी कहेेगा कश्मीर भारत का हृदय स्थल है और हमेशा रहेगा।
कश्मीर से धारा 370 के समाप्त होने से दोहरी नागरिकता खत्म हुई। अब न अलग निशान होगा और न अलग झण्डा होगा। पूरे भारत में तिरंगे का अपमान अब अपराध माना जायेगा तथा माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश अब पूरे भारत में लागू होगा, विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होगा, अल्पसंख्यकों को आरक्षण मिलेगा, कश्मीर में बाहरी निवेश बढ़ेगा, महिलाओं को समानता का अधिकार प्राप्त होगा, बच्चों को शिक्षा का अधिकार प्राप्त होगा जैसे अनेक फैसले जो 72 वर्षो से इंतजार कर रहे थे वे अब लागू होंगे और देश में समानता, समरसता और सद्भाव का वातावरण निर्मित होगा।

भारत के इन दोनों शेरों का अभिनन्दन करते हुये आज की परमार्थ गंगा तट पर होने वाली दिव्य आरती राष्ट्र को समर्पित की गयी। परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश गंगा के तट, हिमालय की वादियों, ऊँचाईयों, गंगा की पवित्रता और सागर की गहराईयों कि तरह इस देश की पहचान बनी रहे ऐसी प्रार्थना कर विशेष आहुतियां समर्पित की गयी और भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और गृहमंत्री श्री अमित शाह को कोटि-कोटि साधुवाद दिया, साथ ही उनकी सुरक्षा एवं स्वस्थ्य के लिये भी प्रार्थना की गई।

बनारस: मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही के लोगों की प्यास बुझाएगा राष्ट्रीय मुस्लिम मंच

वाराणसी/ आनंद के. पांडेय। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारार संचालित संगठन राष्ट्रीय मुस्लिम मंच मशहूर सहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के गांव वाराणसी स्थित लहमी के लोगों की प्यास बुझाने की रणनीति तैयार कर रहा है। इस कार्य को विशाल भारत संस्थान के बैनर तले संचालित किया जाना है। ये दोनों संस्थाएं पहले वाराणसी में राम बैंक, अनाज बैंक, रोटी बैंक के बाद अब वाटर बैंक भी संचालित कर रहे हैं।

भारत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीवास्तव के मुताबिक “पीएम नरेंद्र मोदी के जल संचयन के आह्वान से प्रेरित होकर और पानी की समस्या को देखते हुए हमने यह निर्णय लिया है कि मुंशी प्रेमचंद के जन्मस्थली लमही में पानी की समस्या दूर की जाए। उन्होंने बताया कि एक वाटर बैंक खोलने जा रहे हैं, जिससे आमजन को  मुफ्त में पानी मिल सके। साथ ही डॉ राजीव ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत वाराणसी के शक्कर तालाब में पहला वाटर बैंक खोला गया है।”

डॉ श्रीवास्तव के मुताबिक “जिन क्षेत्रों में स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, वहां मुहैया करा रहे हैं। मुंशी प्रेमचंद्र के जन्मस्थान लमही में पानी की समस्या को देखते हुए पहला पानी बैंक खोला जाएगा। वहां का कुंआ सूख गया है, जिससे पानी की समस्या बढ़ रही है। ऐसे में वहां पर वाटर बैंक खोलकर लोगों की प्यास बुझाई जाएगी। इसके लिए स्थान का भी चयन हो चुका है।” उन्होंने कहा, “जल्द ही बोरिंग कराकर लोगों को स्वच्छ पानी मुहैया कराया जाना है। इससे हजारों लोगों की पानी की समस्या दूर हो जाएगी। इसके बाद अगला पड़ाव बुंदेलखंड के उरई में है। जहां पानी की समस्या को दूर करने का प्रयास किया जाएगा जिससे लोगों को प्रेरित भी किया जाएगा। इस बोरिंग का खर्च करीब 90 हजार रुपये आता है।” उन्होंने बताया, “इस अनोखे पानी बैंक की कोशिश है की सभी लोगों को शुद्ध पेयजल मिले और कोई प्यासा न रहे। यह गैर सरकारी पैसे से चलाया जा रहा है। आगे चलकर हम इसका प्रोजेक्ट बनाकर सरकार को देंगे, ताकि प्रदेश में जहां भी पानी की समस्या है, उसे सलीके से निपटाया जा सके।”

मुसलमानों ने 1934 में बंद कर दी थी 5 वक्त की नमाज- निर्मोही अखाड़ा

नई दिल्ली/ शाहिद खान। अयोध्या में विवादित स्थल पर अपना दावा करते हुए निर्मोही अखाड़ा ने मगंलवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद में रोजाना पांच बार नमाज पढ़ना 1934 में ही बंद कर दिया था और दिसंबर 1949 में जुमे की नमाज भी बंद कर दी थी। निर्मोही अखाड़ा ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के सामने कहा कि विवादित भूमि पर उसका दावा 1934 से है, जब कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित भूमि पर अपना दावा 1961 में किया था।

अखाड़ा के वकील ने यह भी दावा किया कि भगवान राम की मूर्ति मस्जिद में 1949 में 22-23 दिसंबर की रात में रखी गई थी। उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष रोज पूजा करते हैं और उन्होंने मुस्लिम पक्षों के दावे को खारिज किया कि विवादित भूमि पर वे रोज नमाज पढ़ते हैं।

निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील जैन ने तर्क दिया कि अगर वहां नमाज नहीं होती है तो उस स्थान को मस्जिद नहीं बोला जा सकता। उन्होंने कहा, हमारा दावा 1934 से है। यहां कोई नमाज नहीं पढ़ी गई है। वकील ने अपने दावे को पुख्ता करने के लिए अदालत के समक्ष एक और सबूत पेश किया। वकील ने कहा कि उस स्थान पर वजू के लिए कोई जगह नहीं है। वजू वह स्थान होता है, जहां मुस्लिम समुदाय नमाज से पहले अपने हाथ धोते हैं। उन्होंने कहा, वहां 1985 से कोई नमाज नहीं पढ़ी गई तो हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि एक मस्जिद के तौर पर इसका अस्तित्व कई साल पहले समाप्त हो चुका है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता करने का आदेश दिया था। हालांकि, जो कमेटी बनाई गई थी वह सफल नहीं हो पाई थी जिसके वजह से सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि वह अब मामले की रोजाना सुनवाई करेंगे।

इसी के बाद से 6 अगस्त से इस मसले पर रोजाना सुनवाई शुरू हुई है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं।

जब रामायण के जरिए संस्कृत के महत्व को समझाया था सुषमा स्वराज ने….

नई दिल्ली। भारत की पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज की पहचान प्रखर वक्ता और कुशल राजनेता के तौर पर थी। उनकी भाषण शैली का मुरीद हर कोई था। एक बार उन्होंने अपने भाषण के दौरान अपने संस्कृत ज्ञान से विद्वानों का चकित कर दिया था। दरअसल, यह वाकया वर्ष 2012 का है, जब साउथ इंडिया एजुकेशन सोसाइटी की तरफ से उन्हें एक अवॉर्ड दिया गया था। मुंबई में आयोजित इस कार्यक्रम में देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर से संस्कृत के विद्वान शामिल हुए थे। सुषमा स्वराज के अलावा यह अवार्ड अभिनेता अमिताभ बच्च्चन और कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा को भी दिया गया था।

अवार्ड लेने के बाद सुषमा स्वराज ने संस्कृत पर भाषण दिया था। अपने भाषण के दौरान उन्होंने बताया था कि संस्कृत दुनिया की सबसे वैज्ञानिक भाषा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई सौ साल पहले भारत के कई हिस्सों में संस्कृत भाषा ही बोली जाती थी। उन्होंने कहा कि यह संस्कृत भाषा ही है जिसने पूरे विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम बताया।

सुषमा स्वराज ने इस दौरान वहां मौजूद संस्कृत के जानकारों से अपील किया था कि संस्कृत को समृद्ध करें और संस्कृत को आधुनिकता से जोड़ें। यहां तक कि सुषमा स्वराज को अवार्ड में जो राशि मिली थी, उन्होंने उसी संस्था को यह राशि देते हुए कहा कि इसे संस्कृत को समृद्ध करने में लगाएं। सुषमा स्वराज के इस भाषण और उनके संस्कृत ज्ञान की भी काफी चर्चा हुई थी। सुषमा स्वराज ने ऐसे ही कई मौकों पर अपनी जबरदस्त भाषण शैली से विरोधियों को भी मुरीद बना दिया था। कठिन से कठिन बात भी वह बड़े ही शालीन शब्दों में कह देती थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने किया अयोध्या विवादित स्थल मामले पर लाइव स्ट्रीमिंग की याचिका खारिज

नई दिल्ली / शाहिद खान। अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए आरएसएस विचारक केएन गोविंदाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। गोविंदाचार्य की ओर से कहा गया कि कम से कम सुनवाई को लिखा जाए और रिकार्ड किया जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट याचिका को खारिज कर दिया।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2018 के आदेश का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग अनिवार्य है. याचिका में कहा गया कि आदेश आने के एक साल होने के बाद भी यह अभी तक लागू नहीं हुआ है.

गोविंदाचार्य ने अपनी याचिका में कहा, “यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है. याचिकाकर्ता समेत लाखों देशवासी इसकी कार्यवाही देखना चाहते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान नियम के कारण वे ऐसा नहीं कर सकते.” उन्होंने कहा, “अगर लाइव स्ट्रीमिंग अभी संभव नहीं है, तो अदालत के अधिकारी कार्यवाही की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिग कर सकते हैं और इसे बाद में शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया जा सकता है.” उन्होंने कहा कि लोग राम मंदिर मामले में जल्द से जल्द न्याय के लिए लालायित हैं, जहां भगवान राम पिछले कई सालों से अस्थाई टेंट में रखे गए हैं।

200 करोड़ रुपये की लागत से त्रिपुरा सरकार करेगी ‘कल्चरल हब’ की स्थापना

अगरतला/ प्रतिमा चतुर्वेदी। पूर्वोत्तर के राज्यों का सफर करना बेहद सुंदर, रोमांचक और अद्भुत अनुभवों से भरा है। असम, सिक्किम, अरुणाचल, नगालैंड, मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा में घूमना बेहद खास है। भारत के ये पूर्वोत्तर राज्य अपने आप में प्राकृतिक सौन्दर्यता को  समेटे हुए हैं। यहां के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ देखने लायक हैं। पहाड़ों की सुंदरता को देखना है तो पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा जरूर करना चाहिए।

पूर्वोत्तर राज्यों के बीच सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने के लिए त्रिपुरा सरकार 200 करोड़ रुपये की लागत से महत्वाकांक्षी योजना ‘कल्चरल हब’ की स्थापना करेगी। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देब ने एक कार्यक्रम में कहा कि “राज्य सरकार ने त्रिपुरा में एक ‘कल्चरल हब’ स्थापित करने का फैसला किया है, जो पूर्वोत्तर राज्यों के बीच विविध और पारंपरिक सांस्कृतिक सद्भाव को एकीकृत कर इसे बढ़ावा देगा।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 19 जनजातियों के पारंपरिक जीवन और संस्कृति को प्रोत्साहित करने और आगे बढ़ाने के लिए प्राथमिकता दी है, जो त्रिपुरा की 40 लाख की आबादी में से एक तिहाई हैं। देब ने कहा, “चालू वित्तवर्ष (2019-20) में आदिवासी और गैर-आदिवासियों के 410 सांस्कृतिक कार्यक्रम राज्यभर में आयोजित किए जा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की समृद्ध संस्कृति को विकसित करने के लिए राज्य के बहुमुखी प्रयासों के तहत ललित कला (फाइन आर्ट्स) अकादमी और राष्ट्रीय ललित कला अकादमी का क्षेत्रीय केंद्र भी अगरतला में स्थापित किया गया है। राज्य के सूचना और सांस्कृतिक मामलों के विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि क्षेत्र में अपनी तरह के पहले प्रस्तावित ‘कल्चरल हब’ के लिए सरकार को एक विस्तृत प्रस्ताव दिया गया है।

वैश्विक स्तर पर शान्ति और सामंजस्य स्थापित करने के लिए स्वामी चिदानन्द सरस्वती ‘ब्रह्मऋषि अवार्ड’ से सम्मानित

नई दिल्ली/ बुशरा असलम। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को ‘ब्रह्मऋषि पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। योगमाता फाउण्डेशन और महायोग फाउण्डेशन द्वारा विज्ञान भवन में आयोजित अवार्ड समारोह में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को ’’ब्रह्मऋषि अवार्ड’’ से नवाजा गया। यह पुरस्कार वैश्विक स्तर पर शान्ति और सामंजस्य स्थापित करने हेतु किये जा रहे अथक प्रयासों के लिये दिया गया।
श्री पायलट बाबा जी ने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का जीवन और पूरा समय विश्व शान्ति और सामंजस्य के लिये समर्पित है। उन्होने पर्यावरण, जल और प्रकृति के संरक्षण के लिये अभुतपूर्व कार्य किया है, और निरंतर कर रहे है। वास्तव में वे आज के ब्रह्मऋषि हैं।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’जीवन को नये संकल्पों के साथ जियें। प्रकृति, पर्यावरण और मानवता की सेवा में अपने जीवन को समर्पित करना ही वास्तविक जीवन जीना है। उन्होने कहा कि अपने द्वारा कोई भी ऐसी गतिविधियां न करे जो समाज, राष्ट्र, विश्व और प्रकृति के लिये घातक हो। स्वामी जी ने कहा कि प्रकृति और मानवता के लिये मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। दुनिया में जितनी भी क्र्र्र्र्रान्तियां हुई वह किसी व्यक्ति द्वारा नहीं बल्कि समुदाय के प्रयासों से सम्भव हुयी है अतः आईये एकजूट होकर प्रयास करें और भारत को दुनिया का सबसे स्वच्छ, शान्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिये थोडा सा़ अपना भी परिश्रम लगाये।’’
इस अवसर पर स्वामी अर्जुन पुरी जी महाराज, महामण्डलेश्वर जुना अखाड़ा स्वामी उमाकांतानन्द जी महाराज, अभिनेता, गायक और राजनेता श्री मनोज तिवारी जी, प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता शक्ति कपुर जी, प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता श्री प्रेम चोपड़ा जी, प्रसिद्ध अभिनेत्री ज़ीनत अमान, प्रसिद्ध अभिनेत्री जयाप्रदा जी, कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भारत सरकार, श्री पुरूषोत्तम रूपाला, श्री सुशील सिंह जी, श्री छेदी पासवान जी और अन्य गणमान्य अतिथियों की पावन उपस्थिति में आध्यात्मिक गुरू पायलट बाबा जी ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को ‘ब्रह्मऋषि अवार्ड’ से सम्मानित किया।

जमीयत उलेमा ए हिंद ने किया अमन और एकता सम्मेलन का आयोजन, 50 हजार से ज्यादा लोगों का लगा जमावड़ा

नई दिल्ली/ बुशरा असलम। देश में जारी मॉब लिंचिंग की अमानवीय घटनाओं और सांप्रदायिकता के बढ़ते कदम को रोकने के लिए यहां जमीयत उलेमा ए हिंद के नेतृत्व में तालकटोरा इनडोर स्टेडियम नई दिल्ली में अमन और एकता सम्मेलन संपन्न हुआ। जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और बौद्ध सहित सभी धर्मों के प्रभावशाली मुख्य विद्वानों और प्रमुखों ने हिस्सा लिया। जबकि स्टेडियम के अंदर और बाहर पचास हजार का समूह था। इस अवसर पर एक संयुक्त घोषणा पत्र पढ़ा गया, जिस का समर्थन मुस्लिम नेताओं के अलावा स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, जैनाचार्य डॉ. लोकेश मुनी, बुद्धिस्ट नेता लामा लव बजांग और मसीही आर्कबिशप अनिल जोसेफ थॉमस कोटो, ज्ञानी रंजीत सिंह गुरुद्वारा बंगला साहिब ने हाथ उठाकर किया।

इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि “गर्व से कहो हम भारतीय हैं।” उन्होंने राष्ट्र भावना और राष्ट्रीयता की मशाल को अपने दिलों में जाग्रत रखने का संदेश दिया जिससे भारत की अस्मिता पर कभी आंच न आने पाये। स्वामी जी ने वहां मौजूद लोगों से अपने दिलों में मोहब्बत और भाईचारा की भावना को बनायें रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि अपने दिलों को नफरत का दरिया न बनायें बल्कि मोहब्बत, भाईचारे, शान्ति, एकता और अमन का समन्दर बनायें। स्वामी जी ने कहा कि हमें जिम्मेदारी लेनी होगी कि आईएसआई या कुछ ऐसे भटके हुये लोग जो कुछ भी ऐसा करते है तो हमें कहना होगा कि यह इस्लाम नहीं है ताकि लोगों को सही संदेश जाये। उन्होने कहा कि इस्लाम वतन को जोड़ कर रखने का संदेश देता है; सब की सलामती का संदेश देता है; वतन की सलामती का संदेश देता है। आज इस मंच से हम कह दें पूरे विश्व को कि इस्लाम सब की सलामती चाहता है, क्योंकि एकता की आवाज में बहुत बड़ी ताकत है, उस ताकत को समझें। स्वामी जी महाराज ने कहा कि शक से नही, शिकायतों से नही बल्कि हक से कहे कि यह वतन हमारा है।
हज़रत मौलाना क़ारी सय्यद मुहम्मद उस्मान, साहब मंसूरपूरी जी, ने कहा कि वर्तमान समय में देश की बदलती हुई सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में, जिसमें देश के मिले जुले सामाजिक ताने-बाने, धार्मिक सहिष्णुता, साम्प्रदायिक सद्भाव, अमन और शान्ति पर आधारित चिरकालीन व्यवस्था को ध्वस्त करने की कोशिशें की जा रही है। यह हम सभी की साझा जिम्मेदारी है कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारें, सद्भाव, सौहार्द, अमन, शान्ति और एकता को बनायें रखने के लिये हर सम्भव प्रयास करें ताकि विध्वंसक तत्वों की साजिशें नाकाम हों और इस हेतु विभिन्न धर्मों की विचारधाराओं को एक साथ लाकर अनेकता में एकता और आपसी मेलजोल को बनाया रखा जा सके।

वहीं जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव और इस सम्मेलन के ऑर्गेनाइजर मौलाना महमूद मदनी ने घोषणा पत्र का पाठ करते हुए कहा कि यह देश हमारा है, इसको घृणा की आंधियों से बचाने की जिम्मेदारी हम सब पर बनती है। अपनी इसी कर्तव्य परायणता के तहत जमीअत उलमा ए हिंद भविष्य में अपना पूर्ण उत्तरदायित्व निभाने का फैसला किया है। इसलिए इस घोषणापत्र में यह शामिल किया गया है कि देश के वातावरण को पीसफुल बनाए रखने के लिए हर जिला और शहर में जमीयत सद्भावना मंच स्थापित किए जाएं, जिसमें हर वर्ग और हर धर्म के शांतिप्रिय नागरिकों को शामिल किया जाए और इस मंच की तरफ से समय-समय पर संयुक्त बैठकें और प्रोग्राम आयोजित किए जाएं, ताकि आपस में विश्वास की बहाली में मदद मिल सके। मौलाना मदनी ने शेर ओ शायरी के माध्यम से अपने विचारों को प्रकट करते हुए कहा कि आज के सम्मेलन में पूरा भारत इकट्ठा है, इसलिए यह मांग भारत के सभी वर्गों की तरफ से है।

अध्यक्षीय भाषण में जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना कारी सय्यद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी ने संयुक्त राष्ट्रीयता के शीर्षक से बात करते हुए कहा कि जमीअत उलमा ए हिंद हमेशा से यह कहती रही है कि भारत के नागरिक भारतीय होने के आधार पर एक कौम हैं। जमीयत उलेमा ए हिंद के पूर्व अध्यक्ष हजरत शेख उल इस्लाम मौलाना हुसैन अहमद मदनी संयुक्त राष्ट्रवाद के घोतक थे और उन्होंने इस दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए सभी को जोड़ने और एक धागे में बांधने का मार्ग प्रशस्त किया था। वर्तमान हालात के लिए सरकार जिम्मेदार है। मगर यह कहकर हम अपनी कर्तव्य परायणता से पल्ला नहीं झाड़ सकते बल्कि हम पर यह जिम्मेदारी नियुक्त होती है कि हम हर प्रकार की निराशा और भावुकता से अपने आप को बचाकर इस्लामी शिक्षाओं पर पूरी तरह से डट जाएं। और इस्लामी परंपराओं के अनुसार सारे धर्मों के मानने वालों के साथ अच्छा व्यवहार अपनाना चाहिए।

मौलाना अरशद मदनी अध्यक्ष जमीयत उलेमा ए हिंद ने कहा कि जमीयत उलेमा ए हिंद की स्थापना का उद्देश्य देश के विभिन्न धर्मों के बीच अमन व शांति की स्थापना है। 70 साल गुजर जाने के बाद भी जमीयत अपने महापुरुषों और विद्वानों के मार्ग पर स्थापित है और हालात चाहे जैसे भी हों हम इससे नहीं हटेंगे। मैं मुसलमानों से कहता हूं कि वह धैर्य का साथ हरगिज़ न छोड़ें क्योंकि अत्याचारी बनकर जिंदा रहने से पीड़ित बन कर मर जाना बेहतर है। मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ कछौछवी अध्यक्ष ऑल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड सज्जादा नशीन आस्ताना सैयद मखदूम अशरफ जहांगीर सिम्नाई कछौछा शरीफ ने प्रोग्राम में निमंत्रण के लिए जमीअत उलमा ए हिंद का धन्यवाद अदा किया, उन्होंने कहा इस्लाम सबकी भलाई और सुरक्षा का पाठ देता है। हमारे रसूल सल्लल्लाहो वसल्लम का उदाहरण और व्यवहार मौजूद है कि आपने किस तरह अपने दुश्मनों के साथ भलाई का मामला किया। ज्ञानी रंजीत सिंह चीफ ग्रंथि गुरुद्वारा बंगला साहब ने धर्म को अत्याधिक संवेदनशील विषय बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को धर्म के आधार पर मारना पीटना अत्याधिक घ्रणा स्पद और निंदनीय कार्य है। हर एक को अपने अपने धर्म पर चलने का हक है। आचार्य लोकेश मुनी ने कहा कि धर्म हमें जोड़ना सिखाता है तोड़ना नहीं। हम जहां अपने धर्म का पालन करें वहीं दूसरे के धर्म का सम्मान भी करें।
अनिल जोसेफ थॉमस कोटो, आर्कबिशप आफ दिल्ली ने कहा कि विभिन्नता में एकता भारत की सुंदरता है। इसे तोड़ने वाले को सज़ा मिलनी चाहिए। इस सम्मेलन को सम्बोधित करने वालों में विशेष रूप से जमात-ए-इस्लामी के अमीर सैयद सआदत उल्लाह हुसैनी, मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, नवेद हामिद अध्यक्ष ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस मशावरत, सय्यद मोईन हुसैन अध्यक्ष अंजुमन खुदाम ख्वाजा साहब दरगाह अजमेर शरीफ, मौलाना सैयद मोहम्मद तनवीर हाशमी बीजापुर, प्रोफेसर अख्तरुल वासे अध्यक्ष मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर, डॉ. सैयद जफर महमूद जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया, मौलाना मतीनउल हक़ ओसामा कानपुरी अध्यक्ष जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश, मौलाना सद्दीकुल्लाह चौधरी अध्यक्ष जमीयत उलेमा बंगाल, मौलाना रहमतुल्लाह मीर बांदीपुरा कश्मीर, मौलाना हाफिज नदीम अहमद सिद्दीकी अध्यक्ष जमीयत उलेमा महाराष्ट्र, अशोक भारती अध्यक्ष नेकडोर, सैयद कासिम रसूल इलियास सदस्य ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड, मौलाना महमूद अहमद खान दरियाबादी महासचिव ऑल इंडिया उलमा काउंसिल मुंबई, सैयद सलमान चिश्ती अध्यक्ष ख्वाजा गरीब नवाज फाउंडेशन अजमेर आदि ने भी संबोधित किया। मुज्तबा फारूक महासचिव ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस मशावरत, डॉटर फादर मैथ्यू, फादर आनंद, मौलाना नियाज अहमद फारुकी जैसी कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों ने प्रोग्राम में भाग लिया। विभिन्न चरणों में मुख्य अतिथि के तौर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ कछौछवी, सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी अमीर जमात ए इस्लामी हिंद, हाजी सैयद मोईन हुसैन अध्यक्ष अंजुमन खुद्दाम ख्वाजा साहब दरगाह अजमेर शरीफ, मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी महासचिव इस्लामिक फिकह अकैडमी शरीक हुए। समारोह के संचालन का उत्तरदायित्व सफलतापूर्वक संयुक्त रूप से मौलाना महमूद मदनी, मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी व मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने निभाया।

परमार्थ निकेतन ने रचनात्मक तरीके से किया कावंडियों को जागरुक, स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा, ‘कावंड मेला कचरा मेला न बनें’

ऋषिकेश/ बुशरा असलम। कांवड़ मेला लगभग समाप्त होने को है, सरकार, प्रशासन, धार्मिक संस्थाएं और स्थानीय लोगों के सहयोग से सफलतापूर्वक श्रावण के दो सोमवार सम्पन्न हुए। वही दूसरी ओर राजाजी नेशनल पार्क और स्वर्गाश्रम क्षेत्र में अत्यधिक मात्रा में कचरा, प्लास्टिक और खाद्य सामग्री जगह-जगह पड़ा हुआ है। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने शहरवासियों से निवेदन किया कि सब मिलकर सहकारिता से अपने शहर को स्वच्छ बनाने हेतु आगे आये। कांवड यात्रा के दौरान अनेक स्थानों पर कचरे-कूडे़ के ढ़ेर लगे हुये है। वर्षा के दौरन इस कचरे के सड़ने से बदबू फैलेगी, बीमारियां बढ़ेगी तथा यह कचरा नालियों और सीवर को भी बंद कर सकता है इसे जितनी जल्दी हटा दिया जायें उतना ही बेहतर होगा।
कांवड यात्रा के दौरान परमार्थ निकेतन आश्रम द्वारा राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र में कांवड़ यात्रा में आये कावड़ियों की सुविधा के लिय कई जल मन्दिर लगायें गयें हैं। साथ ही बाघखाला क्षेत्र में निःशुल्क प्राथमिक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया जिसमें प्रतिदिन 500 से 600 कावड़ियों की जाँच कर निःशुल्क दवाईयां वितरित की जा रही थी। साथ ही परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों द्वारा पपेट शो के माध्यम से प्रतिदिन कावड़ियों को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, नदियों की स्वच्छता एवं वृक्षारोपण हेतु रोचक संदेश प्रसारित किये जा रहे है।
परमार्थ निकेतन द्वारा राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र में स्वच्छता स्लोगन, स्वच्छता सेल्फी पांइट, स्वच्छता संकल्प पत्र, हस्ताक्षर अभियान, पपेट शो आदि के माध्यम से कावंडियों को जागरूक किया जा रहा है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि कांवड मेला, कचरा मेला न बनें। उन्होने आज बाघखाल, राजाजी नेशनल पार्क का दौरा किया, वहां की समीक्षा की और बताया कि इस क्षेत्र में जगह-जगह पर कूड़े के ढ़ेर लगे हुये है। बाघखाला क्षेत्र प्लास्टिक और गंदगी से पटा हुआ है। स्वामी जी ने बताया कि इस बार परमार्थ निकेतन द्वारा कांवड़ यात्रा के दौरान जो सेवा कार्य किये जा रहे थे आगामी वर्ष उसे और बेहतर तरीके से प्रसारित किया जाएगा। स्वामी जी के नेतृत्व में एक बैठक हुई जिसमंे कांवड यात्रा के दौरान सरकार के कार्यो, संस्थाओं के कार्यो और कावंडियों के द्वारा किये गये कार्यो की समीक्षा की गयी। सम्पूर्ण कांवड यात्रा कि दौरान परमार्थ निकेतन के वरिष्ट चिकित्सक डाॅ रवि कौशल जी, श्री प्रेमराज जी, श्री रामप्रकाश जी, श्रीमती वंदना जी, श्रीमती अनुराधा गोयल जी, श्री सतीश गोयल जी, श्री सेमुअल जी, श्री रामचरण जी, श्री रमेश, मुकेश, उदय, श्री अशोक जी, परमार्थ गुरूकुल के ¬ऋषिकुमार एवं आचार्यो ने अपनी उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान की। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कांवड मेला में सेवायें प्रदान कर रही सेवा टीम को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर अभिनन्दन किया।
इस दौरान अनेकों कांवड़ियों ने स्वच्छ भारत अभियान में सहयोग करने हेतु संकल्प लिये, शौचालय का उपयोग करने, देश को खुले में शौच मुक्त करने, अपने गांवों और गलियों को स्वच्छ करने का संकल्प लिया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने ऋषिकेश शहर के निवासियों, स्वर्गाश्रम निवासियों, धार्मिक, स्वयसेवाी एवं सामाजिक संस्थाओं से आह्वान किया कि कल (31 जुलाई 8 बजे से 10 बजे तक) बाघखाला क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाया जायेंगा जिसमें आप सभी मिलकर सहयोग करें और सभी अवश्य भाग लें।