अहिंसा के मार्ग से ही विश्व शांति व विश्व का कल्याण संभव – आचार्य लोकेश

गोवा। अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य डा. लोकेश मुनि ने इण्डिया फाउनडेशन द्वारा गोवा में आयोजित  भारतीय विचार महोत्सव (India Thoughts Festival) में जैन धर्म का प्रतिनिधित्व किया | 15 से 18 दिसम्बर तक आयोजित  महोत्सव को भारत के उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू, वाणिज्य मंत्री श्री सुरेश प्रभु, रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण, भारत के रेल मंत्री श्री पियूष गोयल, नागरिक विमानन मंत्री श्री जयंत सिन्हा, सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी, गोआ के मुख्यमंत्री श्री मनोहर पारेकर, विदेश राज्य मंत्री श्री एम.जे. अकबर,  जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती, मुम्बई स्टोक एक्सचेंज के निदेशक आशीष चौहान, प्रधान मंत्री आर्थिक सलाहकार समिति की सदस्य शमिका रवि, सांसद श्री स्वप्न दास गुप्ता, प्रसार भारती के चेयरमैन ऐ. शौर्य प्रकाश ज़ीउस कैप्स के निदेशक शौर्य दोवल ने विभिन्न सत्रों में विशाल जनसमूह को संबोधित किया |

आचार्य डा. लोकेश मुनि ने 17 दिसम्बर को उदघाटन सत्र में सनातन विषय पर  इस्कोन के उपाध्यक्ष चंचलापति प्रभु, बौद्ध धर्म से डा. गेशे नगवांग सामेटेन, अमेरिकन हिन्दू आचार्यवामदेव डा. डेविड फ्राऊले के साथ संबोधित किया | आचार्य लोकेश मुनि ‘जैन धर्म का भारत व विश्व के लिए महत्त्व’ ‘ अहिंसा परमो धर्मं’ पर वक्तव्य दिया |

आचार्य लोकेश ने ‘जैन धर्म का भारत व विश्व के लिए महत्त्व’ पर संबोधन देते हुए कहा कि भगवान महावीर के अहिंसा, शांति और सद्भावना के दर्शन की तत्कालीन समय में जितनी आवश्यकता थी उससे अधिक आवश्यकता और प्रासंगिकता मौजूदा समय में है| भगवान महावीर के सिद्धांत आज वैज्ञानिक दृष्टि से भी मान्य हो गए है| उनके बताये मार्ग पर चलने से स्वस्थ, समृद्ध एवं सुखी समाज का निर्माण हो सकता है|   आचार्य लोकेश ने कहा कि विकास के लिए शांति आवश्यक है| सभी वर्गों के समानंतर विकास से अनेक समस्याओं का समाधान मुमकिन है| आचार्य लोकेश ने बताया कि अभाव और अत्यधिक उपलब्धता दोनों ही हानिकारक हैं| भगवान महावीर की शिक्षाओं में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का ह्रास, युद्ध, आतंकवाद और हिंसा, धार्मिक असहिष्णुता तथा गरीबों के आर्थिक शोषण जैसी समसामयिक समस्याओं के समाधान पाए जा सकते हैं| भगवान महावीर ने 2600 वर्ष पूर्व वैज्ञानिक रूप में एक ऐसी जीवन शैली जीने की शिक्षा दी जिससे स्वस्थ्य समाज की संरचना मुमकिन है |

आचार्य लोकेश ने ‘अहिंसा परमो धर्मं’ पर वक्तव्य देते हुए कहा कि अहिंसा ही वह मार्ग है जिस पर चलकर स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकता है | अहिंसा के मार्ग से ही विश्व शांति व विश्व का कल्याण संभव है | जब कभी भी ‘अहिंसा’ पर चर्चा होती है, भगवान महावीर, भगवान् बुद्ध और महात्मा गाँधी को याद किया जाता है | इन तीनों युग पुरुषों ने अहिंसा के महत्त्व को समझा, उसकी राह पर चले और अपने अनुभवों के आधार पर दूसरों को भी इस राह पर चलने को कहा | अहिंसा का अर्थ किसी प्राणी को की मन, वचन और कर्म से हिंसा न करना होता है | अहिंसा विश्व शांति उत्पन्न करेगी | यही कारण है कि जैन धर्म में अहिंसा को धर्म व सदाचार की कसौटी माना गया है | अहिंसा जैन संस्कृति की प्राण शक्ति है, जीवन का मूल मन्त्र  है | अहिंसा का अर्थ कायरता नहीं है | अपेक्षा है अहिंसा के प्रायोगिक प्रशिक्षण की | अहिंसा परम धर्म है व अहिंसा वीरता की सच्ची निशानी है |

इस विशाल महोत्सव में अध्यात्म, विज्ञान, समाज, पौराणिक गाथाओं, संश्लेषण, समन्वय पर भारत व विदेशों से 350 से ज्यादा विचारक, राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी, औद्योगपति, पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्त्ता एक साथ विचार कर  देश के विकास की और अहम कदम बढाया | भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं इण्डिया फाउनडेशन के बोर्ड मेम्बर श्री राम माधव ने आचार्य लोकेश को संबोधन के लिए गोवा में आमंत्रित किया था |