योग एक क्रिया पद्धति नहीं बल्कि जीवन पद्धति है- स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन आश्रम में दो सप्ताह से संचालित क्रिया योग प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ। पश्चिम की धरती से परमार्थ निकेतन पहुँचे योग जिज्ञासुओं ने दो सप्ताह तक यहां पर रहकर योग क्रियाओं के साथ ध्यान, आयुर्वेद, प्राणायाम एवं भारतीय संस्कृति, दर्शन, गीता व आध्यात्म पर होने वाले सत्संग का लाभ लिया।
क्रिया योग प्रशिक्षण शिविर में भारत सहित विश्व के लगभग 17 से भी अधिक देश यथा आस्टेªलिया, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, चीली, जापान, यूके, रोमानिया, ब्राजील, वर्मा, नीदरलैण्ड, सिंगापुर एवं नार्वे से आये योग जिज्ञासुओं ने सहभाग किया। योग जिज्ञासु साध्वी आभा सरस्वती जी एवं योगाचार्य डॉ इन्दू शर्मा जी के निर्देशन में योग की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे।
योग शिविर के समापन अवसर पर योग जिज्ञासुओं को परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती जी के द्वारा योग प्रशिक्षण प्रमाणपत्र प्राप्त किये।
योग जिज्ञासुओं ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त कर योग, भारतीय संस्कृति, दर्शन एवं आध्यात्म से सम्बधित अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने उपस्थित सभी योग साधकों को सम्बोधित करते हुये कहा ’योग का किसी धर्म अथवा संस्कृति से सरोकार नहीं है, योग तो सर्व व्यापी है; सर्वज्ञ और सर्व सुलभ है। योग एक क्रिया नहीं बल्कि जीवन का विज्ञान है; जीवन जीने की पद्धति है जो सच्चे अर्थो में जीवन जीना सिखाती है। जो योग से जुड़ गया मानो वह स्वयं से जुड़ गया और योग के द्वारा ही मनुष्य परम सत्य तक पहुंच सकता है। उन्होने कहा कि योगी होने का अर्थ जागरूक होना भी है आप सभी जागरूक आत्मायें है, सभी अपने-अपने देश जाकर योग के माध्यम से आन्तिरीक स्वच्छता एवं जागरूक होकर बाह्य स्वच्छता यथा पर्यावरण, प्रकृति एवं पृथ्वी को स्वच्छ एवं सुन्दर बनाने में अपनी ऊर्जा को लगाये।’
विश्व के सभी लोगों को स्वच्छ जल की उपलब्धता होती रहे इसी भाव से स्वामी जी एवं साध्वी भगवती सरस्वती जी के साथ सभी योग जिज्ञासुओं ने वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी में सहभाग किया। पूज्य स्वामी जी ने सभी को पर्यावरण एवं जल स्रोतों को संरक्षित एवं स्वच्छ रखने का संकल्प कराया।