विकास के लिए शांति आवश्यक, सर्वधर्म सद्भाव से ही शांति संभव – आचार्य लोकेश

मुंबई। एकता वेलफ़ेयर एसोशिएशन व साउथ रिजन पुलिस मुम्बई द्वारा ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर परम पूज्य आचार्य लोकेश मुनि को 15 लाख लोगों के ऐतिहासिक जुलूस के दौरान ‘उत्कृष्ट सामाजिक और मानवीय सेवा  पुरस्कार’  से नवाज़ा गया। एकता भाईचारा व साम्प्रदायिक सौहार्द के माहौल के बीच आचार्यश्री ने जुलूस को सम्बोधित करते हुए देश में अमन चैन,एकता अखण्डता व ख़ुशहाली की कामना की |

आचार्य लोकेश ने सर्व धर्म सद्भाव की बात करते हुए कहा कि धर्म हमें जोड़ना सिखाता है तोड़ना नहीं| धर्म के क्षेत्र में हिंसा, घृणा और नफरत का कोई स्थान नहीं हो सकता| संवाद के द्वारा, वार्ता के द्वारा हर समस्या को बैठ कर सुलझाया जा सकता है| उसके लिए सबसे पहले जरूरी है, हम अपने अस्तित्व की तरह दूसरों के अस्तित्व का, विचारों का सम्मान करना सीखें| मतभेद हो सकते है किन्तु उसे मनभेद में न बदले| भारतीय संस्कृति बहुलतावादी संस्कृति है| अनेकता में एकता उसकी मौलिक विशेषता है| सर्वधर्म संवाद इसका मूल मंत्र है| यही से अहिंसा, शांति और सद्भावना का शुभारम्भ होता है|  हम सभी विकास चाहते है, समृद्धि चाहते है| विकास व शांति का गहरा सम्बन्ध है| धर्मगुरु, राजनेता व समाज के विभिन्न  क्षेत्रों के प्रमुख जब एक मंच से शांति व सद्भावना का सन्देश देंगे तो निश्चित रूप से इसका प्रभाव होगा|

ईद उल मिलंद ए नबी के आयोजन में पूर्ण सहयोग देने वाले एकता वेलफ़ेयर एसोशिएशन के अध्यक्ष इक़बाल एच. मेनन ने कहा कि आचार्य लोकेश ने सभी धर्मो के अनुयायियों, परम्पराओं, विचारों, त्योहारों और मान्यतों को सहर्ष स्वीकारा है | वो सिर्फ जैन धर्म के ही आचार्य नहीं है वो मानवता के आचार्य है | सभी धर्मों के अनुयायी उनके विचारों को आत्मसात करना चाहते है | आज एक विशाल मुस्लिम समाज को उनके विचारो सुनने का अवसर मिला यह हमारे लिए गौरव का विषय है |