गंगा को संवैधानिक रूप से राष्ट्रीय नदी घोषित करना जरूरी– डॉ. लोकेश मुनि

नई दिल्ली। अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डा. लोकेश मुनि ने गाँधी जयंती पर गाँधी दर्शन राज घाट से इण्डिया गेट तक आयोजित गंगा बचाओ-हिमालय बचाओ रैली को संबोधित करते हुए कहा कि गंगा सभी नदियों का प्रतीक है और हिमालय सभी पर्वतों, जंगलों व जंगली जानवरों का प्रतीक है, गाँधी सचाई व अहिंसा की संस्कृति अर्थात जीवन का एकमात्र उद्देश्य नैतिक पूर्णता की खोज व सर्व भौमिक प्रेम के साथ निस्वार्थ भाव से नैतिक जीवन की खोज है| हमें वर्तमान की अत्यंत पर्यावरण विरोधी गतिविधियों, असीमित इच्छाओं की पूर्ति करने वाली उपभोक्तावादी संस्कृति पर आधारित वैश्विक बाज़ार को ध्यान में रखते हुए गंगा व गिरिराज हिमालय को बचाने के लिए अल्पकालिक व दीर्घकालिक समयबद्ध योजना बनानी होगी|  हमें गंगा व यमुना मैं प्रारंभ से अंत तक प्राकृतिक शुद्ध पानी प्रयाप्त मात्र में बहे इसके लिए उचित कदम उठाने होंगे| इससे न सिर्फ उनकी संरक्षा होगी बल्कि उनके तटों पर रहने वाले जीव प्राणियों व वनस्पति को भी पर्याप्त मात्र में पानी मिल सकेगा |

भाई सतपाल सिंह खालसा एवं श्री विवेक मुनि ने कहा कि हमें विकास की उन गतिविधियों को रोकना होगा जो आम आदमी के विकास के नाम पर धन और विलासिता की वासना की पूर्ति के लिए पर्यावरण को हानि पहुंचती है, इससे मानव जाति को गंगा व उसकी, उसकी सहायक नदियों व उनके स्तोत्र हिमालय से मिलने वाली अनेक कीमती सेवाओं से वांछित होना पड़ रहा है|

गंगा बचाओ आन्दोलन की संस्थापक व संयोजक श्रीमती रमा राउत ने सभी वक्ताओं व प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि दीर्घ काल में हमें पर्यावरण पर प्रतिकूल असर डालने वाले औद्योगीकरण, शहरीकरण और जनसंख्या-वृद्धि जो पर्यावरण पतन व नदियों की धीमी मौत का कारण है उनको नियंत्रित  करने के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे| इस अवसर पर मैराथान रनर सुनीता गोदरा के साथ भारी संख्या में भाग लिया|