क्या है नवरात्रि का वास्तविक अर्थ जानिए ज्योतिर्विद अभय पाण्डेय से

वाराणसी। नवरात्रि का त्योहार भारत के मुख्य त्योहारों में से है। नौ दिनों में भारत के लोग विशेषकर बंगाल के लोग सरस्वती, आदि शिव शक्तियों और श्री लक्ष्मी आदि देवियों की बहुत पूजा करते हैं और नवरात्रि के अंत में उनकी मूर्तियों को जल प्रवेश करा देते हैं जबकि नवरात्रि में जो शक्तियों की पूजा होती है उसका कुछ और ही अर्थ है। इसका वास्तविक रहस्य कुछ और ही है। नवरात्रि में लक्ष्मी, दुर्गा तथा सरस्वती की पूजा होती है लक्ष्मी से धन मांगते हैं। सरस्वती विद्या की देवी उससे बुद्धि का वरदान मांगते हैं। और दुर्गा से शक्ति मांगते हैं। रावण अर्थात विकारों पर विजय पाने के लिए शक्ति की आवश्यकता है। यह शक्ति भी आंतरिक होनी चाहिए क्योंकि विकार आंतरिक दुर्बलताओं से ही उत्पन्न होते हैं। यह दुर्गा आदि देवियां जिनका कीर्तन करते समय उनसे शक्ति तथा बुद्धि बल व धन मांगते हैं। वास्तव में ये देवियां शिव की संतान हैं। जो शिव शक्तियां अथवा ब्रह्मा पुत्रियां कहलाती है ।

शक्तियों के हाथ में दिखाये गये अस्त्र शस्त्रों के वास्तविक अर्थ

देवियों के आठ हाथ, आठ आध्यात्मिक शक्तियों के सूचक है, जिसके द्वारा में हर प्रकार की दुष्ट शक्तियों व बुराइयों को खत्म कर विजय प्राप्त करती हैं। ये हैं सहनशीलता , समाने की शक्ति,  परखने की शक्ति, निर्णय करने की शक्ति, सहयोग की शक्ति, सामना करने की शक्ति, समेटने की शक्ति एवं विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति। उनके हाथों में आध्यात्मिक शक्तियों को सूचित करने वाले शस्त्र दिखाते जाते हैं। चक्र,गदा,  शंख, पद्म, तलवार,धनुष एवं त्रिशूल  इनका आठवां हाथ आशीर्वाद प्रदान करने की मुद्रा में। तलवार कुशाग्र बुद्धि का सूचक है जो सत्य एवं असत्य का भेद आसानी से कर लेते हैं एवं उनके स्पष्टता के रास्ते में आने वाली रुकावटों को समाप्त कर देती। तर्जनी में एक प्रकाश चक्र तीव्र गति से गतिमान है जो उनकी प्रकाश मान बुद्धि का प्रतीक है तथा पूर्ण मानसिक स्थायित्व का। मन में उत्पन्न किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचार को यह काट देता है। यह पूर्णतया पवित्र सरल बुद्धि का संकेत है जो उनकी मानसिक शांति का सूचक है। त्रिशूल तीन पवित्र बिंदुओं का सूचक है जो शिवलिंग में भी पाया जाता है। सत्य परिवर्तित नहीं होता है। बिंदु अपरिवर्तनीयता का ही सूचक है। त्रिशूल द्वारा प्रदर्शित तीनों सत्य बिंदु रूप आत्मजागृति, बिंदुरूप परमात्मा जागृति एवं तीसरा है इस सृष्टि में होने वाली सभी घटनाओं का एक बिंदु के अंदर समा जाना, लुप्त हो जाना, हूबहू दोहराया जाना। गदा शांति की शक्ति का सूचक है जो सेकंड में बुराइयों रूपी बल को रोक देता है। शंख लिखित और उच्चरित शब्दों का सूचक है। जब एक शांत और पवित्र मस्तिष्क से सत्य प्रकट होता है तब वह सच्चाई का स्वरूप लेता है। तीर एक यंत्र है जो सच्चाई के बाण को फेकता है। सच्चाई के शब्द अपने लक्ष्य तक केवल तब ही पहुंच सकते हैं जब बिना अहंकार के उन्हें किसी यंत्र में भेजा जाए। कमल का फूल निर्लिप्तता का प्रतीक है। उनके हथेली पर लिखा हुआ ॐ शब्द मैं (आत्मा) के अस्तित्व के बारे में संकेत करता है।