मुसलमानों ने अपने खर्चे से बनवाया मंदिर मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में भी योगदान

गया/ राजेश कुमार। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि असल हिन्दुस्तान की तस्वीर है क्यों कि इस मंदिर को मुस्लिम समुदाय के लोगों अपनी जमीन पर बनाया है। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने न सिर्फ मंदिर के लिए जमीन दी बल्कि मंदिर बनाने में जो भी लागत आई है उसे इन लोगों ने चंदा करके इकट्ठा किया और हिन्दुओं के लिए मंदिर तैयार कर दिया ।
बिहार के गया से आई इस तस्वीर देखकर मजहब के नाम पर समाज को बांटने वालों के दिलों पर सांप लोट जाएगा। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सिर्फ मंदिर बनाया ही नहीं बल्कि बाकायदा पूजा पाठ में भी भाग लिया और उसके बाद भंडारे का भी आयोजन हुआ। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपने हाथों से हिंदू परिवारों को खाना खिलाया। इसके अलावा मंदिर के बाहर मेले का आयोजन हुआ। पूरे गांव के लोगों ने एक साथ जमकर खरीदारी भी की।
दरअसल बिहार के गया जिले के बुद्धपुर गांव में मुस्लिम समुदाय की तादाद ज्यादा है जबकि हिन्दुओं के कुछ ही घर हैं। इस गांव में मस्जिद तो काफी हैं लेकिन मंदिर एक भी नहीं था। मंदिर न होने की वजह से हिंदू परिवार खुले में रखे एक पत्थर की पूजा करते थे। इस गांव में रहने वाले हिंदुओं की आर्थिक हालात भी इतनी अच्छे नहीं है कि वो मंदिर बना सकें इसके आलावा उनके पास गांव में मंदिर बनाने के लिए जमीन भी नहीं थी। हिंदू परिवारों की इस परेशानी को गांव में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सिर्फ समझा बल्कि कोई रास्ता निकालने के लिए पंचायत भी बुला ली। मुस्लिम समुदाय अपनी जमीन पर चंदा कर मंदिर बनाने का फैसला किया।
गांव के मो अजहरुद्दीन बताते हैं कि इस गांव में हिंदू भाईयों की तादाद बहुत कम है और ये लोग खुले में पूजा करते थे। साथ ही जहां पूजा करते थे वो जगह खुले में होने के कारण साफ सुथरा नहीं रह पाती थी। हम लोगों ने गांव में मीटिंग कर चंदा इकट्ठा किया साथ ही मंदिर निर्माण में भागीदारी भी की।
स्थानीय निवासी मो मोख्तार ने मंदिर के लिए जमीन दान की साथ ही वे चाहते हैं कि इस मंदिर का नाम सद्भावना मंदिर रखा जाए।
इस शानदार पहल पर बुद्धपुर गांव के हिंदू समुदाय के लोगों को अपने मुस्लिम भाईयों पर गर्व हो रहा है ।
छोटे से गांव से समानें आई इंसानियत की इस मिसाल से उन लोगों को सबक लेना चाहिए जो सिर्फ सियासत के लिए समाज में मजहबी जहर घोलते हैं ।