जानिए-अकस्मात-धन-हानि-योग जाने  ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय से

वाराणसीl यदि धनेश अष्टम, द्वादश भाव में होकर पापग्रस्त हो। अष्टम भाव में कोई ग्रह वक्री होकर स्थित हो। अष्टमेश शत्रु क्षेत्री हो।
अष्टमेश वक्री होकर कहीं भी स्थित हो। गुरु द्वादश भाव में हो एवं धनेश बलहीन हो तथा लग्न पर शुभ ग्रह की दृष्टि न हो ।
अष्टम भाव में कोई ग्रह नीच का हो एवं अस्तगत हो। गोचर में राहु का अष्टम भाव में भ्रमण हो या राहु या अन्य पाप ग्रह स्थित हो तो जातक को अचानक धन की हानि होती है।
काम-धंधे, व्यापार-व्यवसाय में, नौकरी में या कृषि में कोई कार्य ऐसा हो जाता है कि अकस्मात धन की हानि उठानी पड़ती है।
मनुष्य के जीवन में अकस्मात दुर्घटनायें होती हैं और इन योगों के कारण धन का काफी नुकसान होता है।
 
धन हानि, दुर्घटना से रक्षा हेतु कुछ उपाय-
केले के वृक्ष की जड़ गुरुवार के दिन सोने के ताबीज में भरकर पीले धागे के साथ गले में धारण करें।
पीले कनेर के फूल रोजाना गुरु प्रतिमा या चित्र पर चढ़ायें।
गुरुवार के दिन पीले वस्त्र मंदिर में दान करें।
 
ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय
9450537461