भारत ने वैदिक शिक्षा के माध्यम से विश्व के कल्याण का मार्ग बताया है- मोहन भागवत

मोहन भागवत, सर संघ चालक, आरएसएस

नई दिल्ली। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि बदलते समय के साथ वेदों की भाषा को मौजूदा भाष्य के अनुरूप ढाला जाना चाहिए। वेदों पर फिर से शोध होने की आवश्यकता है। वेदों के प्रचार-प्रसार और अध्ययन व अध्यापन के जरिए हम विश्व के सिरमौर बन सकेंगे। क्योंकि विश्व भी आज हमारी तरफ देख रहा है। दो हजार साल पहले से चली विचारधाराएं अब एक चौराहे पर आकर खड़ी हो गई हैं। आगे के रास्ते के लिए वह भारत की ओर देख रही हैं। वेदों के अध्ययन और प्रचार प्रसार के माध्यम से ही भारत यह मार्ग दिखा सकता है। मोहन भागवत ने यह बात वैदिक ज्ञान के क्षेत्र में दिए गए अब तक के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान करते हुए कही।

यह पुरस्कार अयोध्या आंदोलन के नायक अशोक सिंहल की स्मृति में प्रदान किए गए। भारतात्मा अशोक सिंहल पुरस्कार के अन्तर्गत एक सर्वश्रेष्ठ वैदिक स्कूल को 7 लाख रूपये, सर्वश्रेष्ठ वैदिक शिक्षक को 5 लाख रुपए और सर्वश्रेष्ठ वेदपाठी को 3 लाख रुपए का पुरस्कार प्रदान किया गया।

नई दिल्ली के सिविक सेंटर में आयोजित एक भव्य समारोह में यह सम्मान प्रदान करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि इससे वेदाध्ययन के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों को बहुत प्रोत्साहन मिलेगा। अशोक सिंहल की स्मृति में प्रतिवर्ष दिए जाने वाले इन पुरस्कारों की श्रृंखला उदयपुर के सिंघल फाउंडेशन ने की है

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने वैदिक विद्वानों का आह्वान किया कि वे वेदों की शिक्षा को युगानुकूल बनाकर सबके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें। उनका कहना था कि वेदों के भाष्य सरल और वैश्विक जगत की भाषा में भी होने चाहिए। इससे उनको समझ आएगा कि वे जिस मार्ग को खोज रहे हैं, वह बहुत पहले ही भारत में खोजा जा चुका है। विज्ञान के विस्तार के बाद पश्चिमी जगत अब एक ठहराव के बिन्दु पर आकर रुक गया है। उसे भी अब यह महसूस होने लगा है कि आगे का रास्ता विज्ञान और आध्यात्म के समन्वय से तय होगा। विज्ञान और आध्यात्म इस लिहाज से पूरक हैं, विरोधाभासी नहीं।

मैकाले की शिक्षा पद्धति और विचार को अपूर्ण बताते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत ने वैदिक शिक्षा के माध्यम से विश्व के कल्याण का मार्ग बताया है। वेद सर्व कल्याण का ग्रंथ है। आवश्यकता इस बात की है कि वेदों का अध्ययन कर इसमें से जीवनोपयोगी बातों को लोगों तक पहुंचाया जाए। इसी में भारत का भविष्य है और विश्व के कल्याण का रास्ता भी इसी से मिलेगा