कलयुग के इस अवतार को सिर्फ पीएम मोदी ने नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान ने खो दिया है

नई दिल्ली। पंचतत्व में विलीन अटल जी को याद करके आज पूरा हिंदुस्तान रो रहा है। आंखें उनकी भी नम हैं, जिन्हें अटल जी ने उंगली पकड़कर राजनीति का ककहरा सिखाया, इन्हीं में सबसे बड़ा नाम है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का, जिनका मन ये मानने तक को बिल्कुल भी तैयार नहीं है कि पिता तुल्य अटल अब उनके साथ नहीं हैं।

ये प्रणाम.. ये नमन.. ये श्रद्धांजलि है.. हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री का अपने जन नायक को अपने पिता तुल्य को अपने राजानीतिक अभिभाक को अपने मार्गदर्शक को और अपने संरक्षक को। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ना ये पांव थक रहे थे। ना दुनिया की चिंता हो रही थी, ना किसी का मोह था, ना किसी की आवाज़ सुनाई दे रही थी, सिर्फ और सिर्फ अटल की यादें थी।
प्रधानमंत्री आज उस अटल की यादों में खोए हैं, जिन्होंने एक कार्यकर्ता को गुजरात का राजपाट सौंप दिया था। अटल को याद करते हुए आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास शब्द नहीं है। बस दर्द ही दर्द है।

वे पंचतत्व हैं। वे आकाश, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, सबमें व्याप्त हैं, वेअटल हैं, वे अब भी हैं। जब उनसे पहली बार मिला था, उसकी स्मृति ऐसी है जैसे कल की ही बात हो। इतने बड़े नेता, इतने बड़े विद्वान।
लगता था जैसे शीशे के उस पार की दुनिया से निकलकर कोई सामने आ गया है। जिसका इतना नाम सुना था, जिसको इतना पढ़ा था, जिससे बिना मिले, इतना कुछ सीखा था, वो मेरे सामने था। जब पहली
बार उनके मुंह से मेरा नाम निकला तो लगा, पाने के लिए बस इतना ही बहुत है। बहुत दिनों तक मेरा नाम लेती हुई उनकी वह आवाज मेरे कानों से टकराती रही। मैं कैसे मान लूं कि वह आवाज अब चली
गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वो दिन कभी नहीं भूलते हैं कि एक दिन अचानक अटल बिहारी वाजपेयी के फोन कॉल से कैसे उनकी जिंदगी बदल गई थी। ना वो दिन नरेंद्र मोदी भूल पाए ना आज का दिन वो भूल पाएंगे कि अचानक अटल जी सबको उनको छोड़ कर चले गए।
आप भी हाथ जोड़ लीजिए, आंखें बंद कर लीजिए, सम्मान में सिर झुका लीजिए क्योंकि कलयुग के इस अवतार को सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नहीं खोया है पूरे भारतवर्ष ने खो दिया है।