संकटमोचन की अदालत में भूत बन जाता है दूत और बुरी शक्तियां करती हैं समर्पण

मेहंदीपुर/ अमित यादव। मेहंदीपुर के बालाजी महाराज कलयुग में देवता के रुप माने जाते है। बुरी शक्तियों के काल बालाजी महाराज, अपने स्वामी भगवान श्रीराम के आदेश पर धरती पर अवतरित हुए थे। श्रीराम ने संकटमोचन हनुमान को वरदान दिया था कि वो कलयुग में बुरी शक्तियों के संहार के लिए अवतार लेंगे, जिसके बाद श्री बालाजी राजस्थान की अरावली पहाडिय़ों में बुरी आत्माओं के नाश हेतु प्रकट हुए थे। कहा जाता है कि यहां बुरी आत्माओं, काला जादू, कोई भी बीमारी हो, संकट हो या कष्ट बालाजी महाराज की कृपा से सभी रोग दूर हो जाते है सभी बाधाएं सहज ही कट जाती है…
बालाजी महाराज का यह चमत्कारी मंदिर राजस्थान के सवाई माधोपुर और जयपुर की सीमा रेखा पर बसे मेंहदीपुर कस्बे में बना है कहते है कि भूत प्रेत और ऊपरी बाधाओं के निवारण के लिए यहां आए श्रद्धाल बिना दवा के ही ठीक होकर लौटते हैं तभी यहां सालों साल हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
बालाजी का मन्दिर दो पहाड़ियों के बीच बना है, इसलिए इन्हें घाटे वाले बाबा जी भी कहा जाता है। इस मन्दिर में स्थित बजरंग बली की सबसे बालरूप मूर्ति के दर्शन होते हैं, जिस मूर्ति के लिए कहा जाता है कि इसे किसी कलाकार ने नहीं बनाया था। बल्कि यह मूर्ति अपने आप प्रकट हुई थी। बालाजी महाराज ने समाधि वाले बाबा को एक बार सपना में अनोखी लीला दिखाई थी। जिसके बाद बालाजी महाराज के चमत्कार होने लगे। तभी बालाजी महाराज ने दर्शन दिए।
इस मूर्ति को प्रधान मानते हुए बाकी मन्दिर का निर्माण कराया गया है यह मूर्ति लगभग 1000 वर्ष प्राचीन है। बालाजी महाराज के अलावा यहां श्री प्रेतराज सरकार और श्री कोतवाल कप्तान भैरव की मूर्तियां भी हैं।
मेंहदीपुर बालाजी का मंदिर श्री हनुमान की अदालत माना जाता है। और श्री बालाजी दण्डाधिकारी के रुप में बुरी आत्माओं, भूत, प्रेत को दण्ड देकर कष्ट भोग रहे अपने श्रद्धालुओं का दुख दूर करते है..भूत प्रेत भगवान की मार से तंग आकर खुद ही बालाजी के चरणों में आत्मसमर्पण कर देते हैं और बालाजी उन्हें अपना दूत बना लेते हैं। मेहंदीपुर मे आने वाले भक्त बालाजी को महाराज की तरह सम्मान देते है। बालाजी के इस दैव्य मंदिर में उन्हे सात हर दूसरे दिन स्नान कराया जाता है। दिन में कई घंटों तक उनकी पूजा अर्चना की जाती है। पूजा में भजन आरतियों और चालीसों का गायन होता है और इस दौरान भूत प्रेत से ग्रस्त रोगी चीखते चिल्लाते उलट पलट होते अपना दण्ड भुगतते हैं। और भगवान के चरणों में खुद को सुमर्पित कर देते हैं बालाजी महाराज को चढ़ाए जाने वाला लड्डू का प्रसाद भी रोगियों के लिए दवा का काम करता है। प्रसाद खाने से सभी बुरी शक्तियां समाप्त हो जाती है। भगवान को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु बाबा पर सोने का चोला चढ़ाते हैं।
मेहंदीपुर में बाल रूप में विराजित श्री बालाजी भगवान शंकर के ग्यारहवें अवतार माने जाते हैं और बुरी शक्तियों के संहार के लिए श्री बालाजी धरती पर अवतरित हुए। कहा जाता है कि जो भी भक्त बालाजी के दरबार पर सच्चे मन और आस्था से मुराद मांगता है भगवान उसकी हर इच्छा पूरी करते हैं।

भक्तों की सेवा से प्रसन्न होने वाले बजरंग बली उनकी विपदा को दूर करने में पल भर की देरी नहीं करते इसीलिए मेहंदीपुर बालाजी के मंदिर में दुखों से छुटकारा पाने के लिए हमेशा जनसैलाब उमड़ा रहता है।मेहंदीपुर बालाजी धाम से करोड़ो लोगों की आस्था जुड़ी हुई है मान्यता है कि भूत-प्रेत, पागलपन सभी तरह के रोग मन्नत मांगने से ठीक हो जाते है। यह तीर्थस्थल भूतों को फांसी देने के लिए भी विख्यात है। भूत भी यहां दूत बन जाते हैं। भगवान की इस अदालत सभी गुनहगारों का न्याय मिलता है और सभी दुखीयारे बाबा के धाम से खुशी खुशी घर लौटते हैं बाला जी महाराज अपने दर पर आए किसी भी भक्त को खाली हाथ नहीं छोड़ते और हमेशा उसके रह कर उसके दुखों को हर लेते हैं कलियुग में बालाजी ही एकमात्र ऐसे देवता हैं, जो अपने भक्त को सहज ही अष्टसिद्धि, नवनिधि तदुपरान्त मोक्ष प्रदान कर सकते हैं।