बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करें, पुण्यतिथि प्रेरणातिथि बनें-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश/ बुशरा असलम। स्व. हरज्ञान चन्द्र अग्रवाल सरस्वती शिशु/विद्या मन्दिर, डोईवाला द्वारा आयोजित, विद्यालय के संस्थापक एवं प्रसिद्ध समाजसेवी स्व. मांगेराम अग्रवाल जी की 16 वीं पुन्यतिथि पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी, विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमचन्द्र अग्रवाल जी एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने विचार गोष्ठी, मेधावी छात्र/छात्राओं का सम्मान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम विशिष्ट अतिथियों की दिव्य एवं गरिमामय उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उत्तराखण्ड पीसीएस परीक्षा पास करने वाली अंकिता जोशी को भी अवार्ड और पौधा देकर सम्मानित किया और अपनी सेवाओं को हरित सेवा के रूप में आगे बढ़ाने का आशीर्वाद दिया।
आज के इस कार्यक्रम में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी, विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमचन्द्र अग्रवाल जी ने सम्मानित किया।
डॉ कलाम साहब की पुण्यतिथि पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को “कलाम इनोवेशन अवार्ड” से सम्मानित किया गया था इस हेतु उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी एवं विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमचन्द्र अग्रवाल जी ने व्यक्तिगत रूप से स्वामी जी को बधाई दी और प्रशन्सा करते हुये कहा कि इसी तरह से सेवा के कार्य आपके द्वारा होते रहे और आप हमें भी मार्गदर्शन प्रदान करते रहे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि “जन्म तो सभी लेते है परन्तु जीवन बहुत कम लोग जी पाते हैं और इस जीवन को जीवन्त कोई-कोई ही बना पाता है। उन्होने कहा कि अक्सर लोग पूरा जीवन अपने लिये जीते हैं परन्तु अपने लिये जीयें तो क्या जियें। जब अपने लिये हम जीते है तो मरण होता है और जब हम समाज के लिये, दूसरों के लिये, अपनों के लिये जीते है तो उसका स्मरण होता है इसलिये हमारा मरण नहीं स्मरण हो, हर पल स्मरण हो कैसे हो। यदि हम समाज के लिये, समाज के काम आयें और जो लोग समाज सेवा करने वालों को भी सम्मानित करें क्योकि उनकी सेवा ही सबसे बड़ा सम्मान है लेकिन दूसरों को प्रेरणा मिले इस लिये भी हमें इस तरह के कार्यक्रमों को आयोजित करना चाहिये। यह जीवन तो समाज के लिये है; प्रकृति के लिये और पर्यावरण के लिये है। उन्होने कहा कि जन्म के समय हमारे पास नाम तो नहीं होता है परन्तु साँसें होती है और मृत्यु के समय जब मनुष्य जाने लगता है तब उसके पास नाम तो होता है परन्तु साँसें नहीं होती है। इन्ही साँसों और नाम के बीच की यात्रा का नाम ही तो जीवन है। जब हम दुनिया में आते है और दुनिया से जाते है तो हाथ खाली होते है परन्तु आने और जाने की यात्रा के बीच का जो समय है उस का ठीक तरह से उपयोग करना ही जीवन है। इस जीवन में किस तरह से समाज की सेवा हम करते है धर्मपूर्वक या अधर्मपूर्वक, पुण्य कमाकर या पाप करके यहीं पूंजी अपने साथ जाती है।
स्वामी जी ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि स्व. मांगेराम जी अग्रवाल ने अपने परिवार को जैसे संस्कार दिये, संस्कृति दी आज वे विधानसभा अध्यक्ष के रूप में समाज की सेवा कर रहे है और श्री प्रेमचन्द्र अग्रवाल जी और परिवार के सदस्यों ने पिताजी की पुण्यतिथि को भी प्रेरणा तिथि बनाया है।
आज स्व. मांगेराम जी की पुण्यतिथि के अवसर पर अग्रवाल परिवार ने 500 पौधों का वितरण किया वास्वत में यह प्रेरणा का कार्य है। श्री मांगेराम जी भी जीवन पर्यन्त दूसरों के लिये जीते रहे और पेड़ भी दूसरों के लिये जीते है, पेड़ ही है जो साँस देता है। पेड़ न हो तो श्वास लेना मुश्किल है; पेड़, वातावरण से कार्बन डाय आक्साइड को सोखते है तथा प्राणवायु ऑक्सीजन देते है। एक पेड़ एक वर्ष में तीस लाख रूपये मूल्य की ऑक्सीजन प्रदान करता है और हम है कि पेड़ काटते हैं। स्वामी जी महाराज ने कहा कि अज्ञानता और अन्धकार को दूर करते हुये पेड़ लगायें और उन्हें संरक्षण प्रदान करें।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री आदरणीय श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी ने कहा कि जब हम बच्चों को शिक्षा दें सकें तो समझ लो सब कुछ दे दिया। शिक्षा व्यक्ति के जीवन को उन्नत्तर बनाती है और शिक्षा ही जीवन की नींव है। उन्होने कहा कि शिक्षा अगर संस्कार युक्त है तो कहना ही क्या। संस्कार युक्त शिक्षा ही विद्या है और वहीं हमें विनय प्रदान करती है; विद्या ही हमें जीवन प्रदान करती है, विनम्रता प्रदान करती है और विनम्रता ही जीवन है। मुझे गर्व है कि एकलव्य विद्यालय के 13 बच्चे जो समाज के उस तबके से है जहां बेहद अभाव है उन सब को शिक्षक जिस तरह से श्रेष्ठ शिक्षा प्रदान कर रहे है वास्तव में वे सभी अभिनन्दन के पात्र है। उन्होने कहा कि श्री प्रेमचन्द्र अग्रवाल जी सदैव राज्य की हरियाली और खुशहाली के लिये प्रयत्नशील रहते है और प्रत्येक कार्य को पूर्ण सहयोग करते है और दूसरों को भी प्र्रेरणा देते है।
प्रसिद्ध समाजसेवी स्व. मांगेराम अग्रवाल जी की 16 वीं पुन्यतिथि पर अग्रवाल परिवार ने मेधावी छात्र/छात्राओं को सम्मानित किया। सम्मानित छात्र-छात्राओं को स्मृति चिन्ह् के साथ-साथ पर्यावरण का प्रतीक एक-एक पौधा उपहार स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम में आये सभी अतिथियों को एक-एक पौधा उपहार स्वरूप प्रदान किया ताकि सभी हरित संकल्प के साथ अपने जीवन को आगे बढ़ायें। इस प्रेरणादायी कार्यक्रम के आयोजन के लिये स्वामी जी महाराज ने विधान सभा अध्यक्ष श्री प्रेमचन्द्र अग्रवाल जी को साधुवाद और आशीर्वाद दिया कि इसी तरह संस्कारों की धारा पूरे परिवार में बहती रहे।