महाकाल के मस्तक पर चढ़ेगा फिल्टर पानी

उज्जैन/ देवेश दुबे। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल मंदिर के शिवलिंग पर मिलावटी दूध और पंचामृत चढ़ाए जाने से शिवलिंग को नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में शिवलिंग को बचाने की पहल शुरू हो गई है। इस बार सावन में उज्जैन महाकाल के दरबार में पहुंचने वाले कांवड़िये सीधी-सीधे शिवलिंग का जलाभिषेक नहीं कर पाएंगे।
कांवड़ियों के जल को फिल्टर किया जाएगा। सभा मंडप में चांदी का पात्र लगाया जाएगा। चांदी के पात्र में ही श्रद्धालु जल डालेंगे। जो जल द्वार के ऊपर लगे फिल्टर प्लांट में शुद्ध होगा और फिर वही शुद्ध जल पाइप लाइन से होकर महाकाल तक पहुंचेगा।
विशेषज्ञों ने शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले जल की पीएच वैल्यू 6.8 से कम रखे जाने का सुझाव दिया था जिस पर अब अमल किया जा रहा है। सावन महीने से पहले जल को फिल्टर करने की व्यवस्था की जाएगी। उज्जैन के कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि महाकाल दुनिया के लिए आस्था का केंद्र हैं और उनके शिवलिंग को सुरक्षित रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है जिसे अब अमल में लाया जा रहा है।
RO के पानी के बाद गर्भगृह के तापमान को भी 22 डिग्री से कम रखने पर विचार चल रहा है। जल्द ही नंदीगृह के कुलिंग सिस्टम को बदला जाएगा।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि शिवलिंग पर केवल RO का पानी ही चढ़ाया जाएगा। यह आदेश शिवलिंग के घिसने की वजह से दिया गया है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में किस तरह से पूजा अर्चना हो यह तय करना हमारा काम नहीं है। हम केवल शिवलिंग को सुरक्षित रखने के लिए चिंतित हैं।