हौसला और संघर्ष ऐसा की देखने वाले की आँखे भर आए

गया/ राजेश। हौसला, हिम्मत, संघर्ष, मेहनत और लक्ष्य, बस यही रोजमर्रा की जिंदगी है। हौसला और संघर्ष ऐसा की देखने वाले की आँखे भर आए। हर पल, हर मिनट हर रोज जिंदगी की जद्दोजहद ऐसे ही चलती है। हाथों के सहारे सीढ़ियों से उतरती एक महिला और उसके पीछे-पीछे आ रहे दो बच्चे और ठीक उसी तरह हाथों के सहारे नीचे उतरा रहा एक युवक। यह अजय और उसकी पत्नी अनिता है। दोनों की शादी साल 2013 में हुई थी। दोनों ही बचपन से दिव्यांग है। वावजूद बिना किसी मदद के अपना घर भी चला रहे हैं और अपने दो बच्चों का पालन-पोषण भी कर रहे हैं

शादी के बाद दोनों ने एक किराये का मकान लिया। मकान रिश्तेदार का था तो किराया भी कम लगा लेकिन मुश्किलें बढ़ने लगी। पीने के पानी के लिए हर रोज ऐसी ही जद्दोजहद होती है। हर रोज अजय ऐसे ही अपनी ट्राइ साइकिल पर पानी के खाली कैन रखता है और चल पड़ता है पानी लेने। पानी भरने के बाद अजय के लिए घर वापस लौटना सबसे ज्यादा मुश्किल और संघर्ष भरा होता है। दोनों पैर काम नहीं करते हैं। हाथों के सहारे चलना पड़ता है इसलिए पानी की कैन को हर रोज ऐसे में मुंह से पकड़े घर तक जाना होता है।
बचपन में ही पोलियोग्रस्त होकर अजय ने दोनों पैर गवां दिए थे। उसके बाद बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया। रिश्तेदारों ने ही अजय की परवरिश की और जब शादी की बात आई तो अजय को इस बात की खुशी थी कि उसकी होने वाली पत्नी भी उसी तरह दिव्यांग है दोनों एक दूसरे के दर्द और संघर्ष को समझ पाएंगे।
दोनों को किसी से कोई शिकायत नहीं है बस एक उम्मीद है कि काश सरकार इतनी मदद कर देती। रहने को अपना खुद का एक कमरे का घर बन जाता है।
दिव्यांग लोगों की मदद के लिए सरकार की कई योजनाएं चलती है। हजारों-लाखों लोगों को उसका फायदा भी हुआ है। सरकार से ऐसी ही मदद की उम्मीद इस दंपत्ति को है