आचार्य लोकेश मुनि और सुधांशु जी महाराज की हुई नई दिल्ली में आध्यात्मिक चर्चा

नई दिल्ली/ असित अवस्थी। अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य डा. लोकेश मुनि एवं ‘प्रख्यात चिन्तक, विचारक, अध्यात्मवेत्ता और विश्व जागृति मिशन के संस्थापक संरक्षक आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज” की दिल्ली में विशेष आध्यात्मिक चर्चा हुई। बैठक मे विश्व शांति और सद्भावना के प्रयासों को किस प्रकार आगे बढ़ाया जाए इस पर भी विचार विमर्श हुआ।

आचार्य लोकेश ने कहा कि धर्म के तीन आयाम हैं उपासना, नैतिकता और आध्यात्म। उपासना का अर्थ केवल क्रिया कांड ही नहीं बल्कि इसका अर्थ है आत्मा के निकट निवास करना। आत्मा के निकट वही व्यक्ति  निवास कर सकता है जिसने अपने क्रोध, मान, माया, लोभ आदि पर नियंत्रण पाया है तथा जिसने अपनी स्वार्थ की चेतना को तिरोहित कर परार्थ और परमार्थ की दिशा में अपने आप को नियोजित किया है। उपासना निरर्थक नहीं है, परन्तु हमारे जीवन में नैतिक व चारित्रिक मूल्यों का समावेश व अध्यात्म का अवतरण होना चाहिए। उन्होंने कहा के धर्म के माध्यम से शांति और सद्भावना की स्थापना करना हमारा उद्देश्य है।

सुधांशु जी महाराज ने कहा, मानव जीवन श्रेष्ठतम उपहार है, उसे निरर्थक नहीं गवाना चाहिए। मनुष्य को पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए अपने जीवन में चारित्रिक मूल्यों और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की ओर भी ध्यान देना चाहिए।मनुष्य जीवन को केवल सांसारिक कार्यों में व्यर्थ न करें। चारित्रिक मूल्यों के बिना मनुष्य जीवन पशु के समान है।उन्होंने कहा कि समाज व राष्ट्र के विकास के साथ लोगों का चारित्रिक और आध्यात्मिक विकास भी आवश्यक है। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों, चर्च आदि में संगठित रूप से उपासना करने का उद्देश्य लोगों का अध्यात्मिक विकास की और मार्ग प्रशस्त करना है। इस अवसर पर विश्व जागृति मिशन के निदेशक राम महेश मिश्र व मुंबई के सुदर्शन डांगी भी मौजूद रहे।