मनुष्य जीवन उद्देश्यपूर्ण होने पर ही सार्थक है – आचार्य लोकेश

कुआला लामपुर/ अर्चना सक्सेना। अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य डा. लोकेश मुनि ने कुआला लामपुर मलेशिया के लक्ष्मी नारायण मंदिर में ‘मानव जीवन की सार्थकता -उद्देश्यपूर्ण जीवन’ विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन सर्वश्रेष्ठ जीवन है, उसे सार्थक बनाना आवश्यक है | मानव जीवन तभी सार्थक है जब वह उद्देश्यपूर्ण हो |

आचार्य लोकेश ने कहा कि भौतिक विकास के साrथ साथ अध्यात्मिक विकास भी आवश्यक है | संतुलित जीवन जीना एक कला है | उपनिषदों  में अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष के बीच संतुलन की बात कही गयी है | विकास जब आध्यात्म की नींव आधारित होता है तब वो वरदान बन जाता है | अर्थ और काम के पीछे अंधी दौड़ के कारण समाज में अनेक कुरीतियाँ पैदा हो गयी है | समाज के उत्थान के लिए व्यक्तिगत उत्थान होना चाहिए | उन्होंने जीवन विज्ञान के बारे में बताते हुए कहा कि उद्देश्यपूर्ण जीवन व्यक्ति को सही दिशा में आगे बढने में सही और गलत के बीच अंतर स्थापित करने में मदद करता है |

आचार्य लोकेश ने इस अवसर पर उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि उद्देश्य हमारे जीवन के लिए एक मास्टर प्लान है। हमारे उद्देश्य को जानना हमें अपने लक्ष्यों को परिभाषित करने में मदद करता है। लक्ष्य हमें रोजमर्रा के जीवन के उतर चढ़ाव के दौरान भटकने से बचाता है । इससे जीवन और अधिक सुखद और सहज बना जाता है। हमारा उद्देश्य कोई और हमारे लिए तय नहीं करता बल्कि, हमें खुद यह तय करना चाहिए हमारा उद्देश्य क्या है । हमारे जीवन के अनुभवों, हमारी आकान्शाओं और शिक्षा हमें जीवन का उद्देश्य तय करने में सहायक होते  है | जब हम जीवन में अपने उद्देश्य को परिभाषित कर रहे हैं, तो चिंता करना महत्वपूर्ण नहीं है कि हम इसे प्राप्त कैसे करेंगे | जब हम अपने इरादे को पहचानते हैं और प्रतिबद्ध करते हैं, तो हमारे उद्देश्य को प्राप्त करने के अवसर और तरीके दिखने लगेंगे| वास्तव में, वे अवसर हमारे जीवन में पहले से ही होते हैं, लेकिन हमने उन्हें देखा नहीं होगा क्योंकि हम ध्यान नहीं दे रहे थे| हमारे उद्देश्य को परिभाषित करने से हमारा ध्यान  उनपर केन्द्रित हो जाता है |

श्री भूपतभाई शाह ने आचार्य लोकेश मुनि जी का परिचय दिया | मंदिर के अध्यक्ष, ट्रस्टीयों  व पदाधिकारियों ने आचार्य जी का स्वागत किया |