नियोक्ता अभी भी ट्रांसजेंडर्स को नौकरी देने से कतराते हैं – लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी

प्रयागराज/ देवेश दुबे। महाकुंभ में किन्नर और समाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की अगुवाई में किन्नर अखाड़े के सदस्य जूना अखाड़े के पुरुष साधुओं के साथ लंबे जुलूस में शामिल होकर पवित्र संगम पहुंचे। इससे पहले यहां पारंपरिक नियमों का पालन किया गया। किन्नर समुदाय के लोगों ने मकर संक्रांति के मौके पर आस्था की डुबकी लगाई और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालु इकट्ठा हुए थे।
इस मौके पर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा, “हमारे धार्मिक ग्रंथ के मुताबिक प्राचीन भारत में किन्नर को कितना महत्व दिया गया था। अब मैं निश्चिंत हूं कि यह ज्यादा स्वतंत्रता और लोगों के बीच स्वीकार्यता के आह्वान के लिए हमारे समुदाय के लोगों का उत्साह बढ़ाएगा।” मशहू भरतनाट्यम नृत्यांगना होने के अलावा 1979 में जन्मे त्रिपाठी ने हिंदी फिल्मों में भी काम किया है। उन्होंने कहा कि आस्था की पावन डुबकी भारत में हमारे समुदाय के लोगों के लिए नए युग की शुरुआत है। त्रिपाठी ने ये भी कहा कि हमारे समुदाय के लिए नौकरी एक बड़ी समस्या है। उन्होंने पूछा, “आप क्या सोचते हैं कि अधिकतर हिजड़े भिखारी होते हैं।” त्रिपाठी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को भी स्कूलों और कॉलेजों में स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए उदारता दिखाने की जरूरत है।