विराट भक्ति सत्संग महोत्सव सम्पन्नम, भारी तादाद में उमड़े जालन्धरवासी

जालन्धर/ नेहा मिश्रा। विश्व जागृति मिशन के जालन्धर मण्डल एवं मुख्यालय आनन्दधाम नयी दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय विराट भक्ति सत्संग महोत्सव का आज समापन हो गया। महामृत्युंजय मन्त्र के सामूहिक गायन से आरम्भ हुए समापन सत्र में श्री सिद्धपीठ विश्वमुखी माता त्रिपुरमालिनी धाम अर्थात् देवी तालाब मन्दिर की प्रबन्धन कमेटी के महासचिव श्री राजेश विज, गीता मन्दिर मॉडल टाउन के पदाधिकारी श्री विजय खुल्लर, उपायुक्त आयकर श्री टी.सी.बंसल, एम.डी.एच. के श्री राजन ग्रोवर, श्री रमेश अग्रवाल सहित हज़ारों की संख्या में नर-नारी मौजूद थे। सत्संग सुनने के लिए भारी संख्या में जालन्धरवासी साईंदास विद्यालय की ओर उमड़े।

इस अवसर पर सन्तश्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि महामृत्युंजय मन्त्र विकराल काल से भी साधक को विजयी बनाता है। मृत्युंजय मन्त्र एवं गायत्री मन्त्र का जप दैनिक जीवन में करने की सलाह उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को दी और कहा कि वे मन्त्र जप के समय अंतर्मुखी बनें। अपने भीतर उतरने पर ही मोती मिला करते हैं। विचारों की अपरिमित शक्ति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ विचारों और उत्कृष्ट चिन्तन के साथ आगे बढ़ने वाला मनुष्य अपने और अपने आसपास के पूरे वातावरण को बदलने में सक्षम होता है।

श्री सुधांशु जी महाराज ने जीवन को सहजता व सकारात्मकता के साथ जीने तथा ज़िन्दगी में जो कुछ भी मिला है, उसमें सन्तुष्ट एवं आनंदित रहने का आह्वान देशवासियों से किया और कहा कि अपनी महत्वाकांक्षा को उच्चस्तरीय बनाएँ तथा अनपेक्ष रहकर जीवन जिएँ। उन्होंने शिकायती स्वभाव को त्यागकर ईश्वर एवं शुभचिन्तकों के प्रति सदैव धन्यवादी बनने की सलाह सभी को दी।

विदायी पूर्व विश्व जागृति मिशन के जालन्धर मण्डल प्रधान श्री सुरेन्द्र कुमार चावला सहित आयोजकों एवं गण्यमान व्यक्तियों ने श्री सुधांशु जी महाराज का नागरिक अभिनंदन किया। मिशन के स्थानीय पदाधिकारी श्री सुभाष चन्द्र ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया। इसके पूर्व श्रद्धेय महाराजश्री ने अनाथ (देवदूत) बच्चों की शिक्षा के लिए सहयोगी श्रीमती सुखवर्षा सोंधी एवं श्रीमती सृष्टि शर्मा सहित विभिन्न लोगों को मंच पर बुलाकर उन्हें मंगल आशीष दिया। चार दिवसीय सत्संग महोत्सव के समस्त कार्यक्रमों का मंचीय समन्वयन एवं संचालन विजामि के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने किया।