विशाल संत सम्मेलन में हजारों श्रद्धालुओं ने लिया पर्यावरण संरक्षण का महासंकल्प

ऋषिकेश। हरिद्वार की पावन भूमि में आज संत सम्मेलन का आयोजन हुआ इसमें अध्यात्म जगत के अनेक दिग्गज संतों एवं हजारों की संख्या में गुजरात एवं भारत के विभिन्न प्रांतों से आये श्रद्धालुओं ने सहभाग किया। इस सम्मेलन में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, संत श्री रमेश भाई ओझा जी, आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरी जी महाराज, महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द जी महाराज, गुजरात के प्रसिद्ध संत देवीप्रसाद बापू, संत कृष्णदास बापू एवं अनेकों सतों ने सहभाग किया।
सम्मेलन में आये श्रद्धालुओं एवं संतों को सम्बोधित करते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा ’भारत को जिंदा रखना है तो संस्कृति और संस्कारों कोे जिंदा रखे। जब तक हमारे संस्कार जिंदा रहेंगे भारत जिंदा रहेगा; संस्कृति जिंदा रहेगी तो हिन्दूस्तान जिंदा रहेगा। अब समय आ गया है कि हम सब अपने बच्चों को कुछ दे सके या ना दे सके परन्तु शिक्षा और संस्कार अवश्य दे बाकी सब वे अपने आप ही कर लेंगे क्योंकि बहुत समर्थ है आज की युवा पीढ़ी। स्वामी जी ने युवाओं को सम्बोधित करते हुये कहा दहेजप्रथा और नशाखोेरी बंद हो। नशे ने हमारा नाश किया है, ’ये अपने ही दिल की मस्ती है जिसने मचायी हलचल, नशा शराब में होता तो नाचती बोतल’ उन्होने कहा बोतले नहीं नाचती, नाचते तो हम है क्योंकि मस्ती तो अपने भीतर है, कभी किसी बोतल को नाचते देखा है इसलिये नशाखोरी बंद हो; भू्रणहत्या, दहेजप्रथा बंद हो तथा जीवन में प्रकृति संरक्षण को स्थान दें, वृक्षारोपण करें, पर्यावरण एवं नदियों को प्रदूषित होने से बचाये क्योंकि पर्यावरण बचेगा तो प्राण बचेंगे और हमारी आने वाली पीढि़यां बचेंगी।’
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने पूज्य संतों को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया और हजारों की संख्या में उपस्थित जनसमुदाय से आहृवान किया कि यात्रा की याद में वृक्षारोपण अवश्य करें और जब तक इस तीर्थ क्षे़त्र में है यहां पर स्वच्छता बनाये रखे एंव गंगा के तटों को स्वच्छ रखें। उन्होने सभी को वृक्षारोपण, स्वच्छता, पर्यावरण एवं नदियों के संरक्षण का संकल्प कराया सभी ने हाथ उठाकर संकल्प लिया।