महाकुंभ में 8 तिथियों पर होंगे शाही स्नान, जानिए खासियत

प्रयागराज/ देवेश दुबे। प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ में आस्था का ऐसा जमावड़ा होने जा रहा है जिसे देखने के लिए न सिर्फ देश से बल्कि दुनियाभर के लोग आ रहे हैं। रोशनी की जगमग में सराबोर पंडालों की नगरी और घंटा-घड़ियालों के साथ गूंजते वैदिक मंत्र, धूप-दीप की सुगंध से पूरा प्रयागराज महक उठने को तैयार है। आध्यातिमकता से सराबोर महा आयोजन में कुछ खास तिथियों पर शाही स्नान के अलावा कई आयोजन होंगे। भव्य पंडाल, भंडारे, धार्मिक अनुष्ठान कुंभ मेले होंगे और ऐसा धार्मिक-आध्यामिक अनुभव शायद ही कहीं देखने को मिलेगा।

महाकुंभ की तारीख तय हो चुकी है। प्रयागराज में 14 जनवरी 2019 से शुरू होकर मार्च 2019 तक चलने वाले इस महाकुंभ में 8 प्रमुख स्नान तिथियां पड़ेंगी। कुम्भ की शुरुआत मकर संक्रान्ति से शुरू हो कर 4 मार्च महा शिवरात्रि तक चलेगा। अर्धकुम्भ करीब 50 दिन चलेगा और इस दौरान होने वाले 6 महत्वपूर्ण तिथियों पर होने वाले आयोजनों के बारे में आपको जानना जरुरी है।

महाकुंभ की शुरुआत 14 जनवरी यानि मकर संक्रांति के दिन पहले स्नान के साथ होगी। इसे शाही स्नान और राजयोगी स्नान के नाम से भी जानते हैं। इस दिन संगम, प्रयागराज पर सभी अखाड़ों के संत पहले शोभा यात्रा निकालते हैं फिर शाही स्नान का आयोजन होता है।

ज्योतिषाचार्या कृष्णा शर्मा के मुताबिक मकर संक्रांति पर सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश होता है। इस दिन स्नान के बाद सूर्य को जल देकर चावल और तिल को स्पर्श कर उसे दान में दिया जाता है। इस दिन कहीं उरद दाल की खिचड़ी या दही-चूड़ा खाना जरुरी होता है।

21 जनवरी को पौष पूर्णिमा है और इस दिन कुम्भ में दूसरा  बड़ा आयोजन होगा। पौष पूर्णिमा के दिन से ही माघ महीने की शुरुआत होती है। मान्यता है कि इस दिन स्नान ध्यान के बाद दान पुण्य करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। वहीं, इस दिन संगम पर सुबह स्नान के बाद कुंभ की अनौपचारिक शुरुआत हो जाती है। इस दिन से कल्पवास भी शुरु हो जाता है। वहीं पौष एकादशी को कुम्भ में तीसरा बड़े शाही स्नान का आयोजन होता है। 31 जनवरी को स्नान के बाद दान पुण्य किया जाता है।

महाकुंभ मेले में चौथा शाही स्नान मौनी अमावस्या यानि 4 फरवरी को होगा। धर्म मामलों के जानकार दुर्गेश पाठक के मुताबिक इसी दिन कुंभ के पहले तीर्थांकर ऋषभ देव ने अपनी लंबी तपस्या का मौन व्रत तोड़ा था और संगम के पवित्र जल में स्नान किया था। इसलिये मौनी अमावस्या के दिन कुंभ मेले में बहुत बड़ा मेला लगता है, जिसमें लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ती है।

माघ महीने की पंचमी तिथि यानि बसंत पंचमी 10 फरवरी को मनाई जायेगी। बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋ‍तु शुरू हो जाती है। कड़कड़ाती ठंड के सुस्त मौसम के बाद बसंत पंचमी से ही प्रकृति की छटा देखते ही बनती है। वहीं, हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार इस दिन देवी सरस्‍वती का जन्‍म हुआ था। इस दिन पवित्र नदियों में स्‍नान का विशेष महत्‍व है। पवित्र नदियों के तट और तीर्थ स्‍थानों पर बसंत मेला भी लगता है।

छठां शाही स्नान की तारीख 19 फरवरी को तय की गई है और इस दिन माघी पूर्णिमा है। ज्योतिषाचार्य अंजनी उपाध्याय के मुताबिक माघ पूर्णिमा पर किए गए दान-धर्म और स्नान का विशेष महत्व होता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि माघी पूर्णिमा पर खुद भगवान विष्णु गंगा जल में निवास करते हैं। माघ मास स्वयं भगवान विष्णु का स्वरूप बताया गया है। पूरे महीने स्नान-दान नहीं करने की स्थिति में केवल माघी पूर्णिमा के दिन तीर्थ में स्नान किया जाए तो संपूर्ण माघ मास के स्नान का पूर्ण फल मिलता है।

सातवां शाही स्नान माघी एकादशी को यानि 16 फरवरी को होगा। इसदिन का पुराणों में बहुत महत्व है। इस दिन दान देना कई पापों को क्षम्य बना देता है।

और आखिरी शाही स्नान 4 मार्च को महा शिवरात्रि के दिन होगा। इस दिन सभी कल्पवासियों अंतिम स्नान कर अपने घरों को लौट जाते हैं। भगवान शिव और माता पार्वती के इस पावन पर्व पर कुंभ में आए सभी भक्त संगम में डुबकी जरूर लगाते हैं। मान्यता है कि इस पर्व का देवलोक में भी इंतज़ार रहता है।