कुम्भ मेला सिर्फ आयोजन नहीं बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का केन्द्र है- स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज  

ऋषिकेश। आज दिल्ली में केन्द्रीय संस्कृति मंत्री भारत सरकार डॉ महेश शर्मा जी एवं परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट हुई। स्वामी जी ने हरियाली संवर्धन एवं हरित संस्कृति को विकसित करने पर जोर देते हुये शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा माननीय मंत्री जी को भेंट किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने आगामी प्रयाग कुम्भ मेला को हरित कुम्भ मेला बनाने, गंगा को विश्व धरोहर एवं हरित संस्कृति को विकसित करने एवं संस्कृति के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के संदेश को प्रसारित करने पर चर्चा की। स्वामी जी ने कहा कि जिस प्रकार संस्कृति मंत्रालय कला संरक्षण, दर्शन एवं संस्कृति को बढ़ावा देता है उसी प्रकार अब समय आ गया है कि हम भारत की संस्कृति को पर्यावरण के साथ जोड़े और हरित संस्कृति को विकसित करें। उन्होने कहा कि अब हमारी परियोजनायें हरित हो; पर्यावरण पोषित हो।
यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर की सूची में कुंभ मेला को शामिल किया गया इसे ऐतिहासिक एवं गौरव का विषय बताते हुये स्वामी जी ने डॉ महेश शर्मा जी को बधाई दी। स्वामी जी ने कहा कि कुम्भ मेला एक आयोजन नहीं है बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की आस्था और आध्यात्मिकता का केन्द्र है। उन्होने कहा कि आगामी प्रयाग कुम्भ को स्वच्छ और हरित कुम्भ के रूप में विकसित कर हम दुनिया में स्वच्छ एवं शान्तिपूर्ण मेले का संदेश दे सकते है।
स्वामी जी ने कहा कि भारत के पास समृृद्ध सांस्कृतिक विरासत है उस विरासत को संभालने के साथ पर्यावरण को स्वच्छ बनाना और हरित कल्चर को विकसित करना भी हमारा उत्तरदायित्व है। उन्होने सभी भारतवासियों से आहृवान किया कि ’पर्यावरण है तो प्राणवायु है’ पर्यावरण का शोषण नहीं पोषण करने का समय है और यह हम पौधों का रोपण करके ही कर सकते है अतः अब हमें रोपण एवं पोषण की संस्कृति को अपनाना होगा। स्वामी जी ने डॉ महेश शर्मा जी को रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव परमार्थ निकेतन में सहभाग हेतु आंमत्रित किया। स्वामी जी ने सद्साहित्य भेंट करते हुये कहा कि विचारों में; सोच में सकारात्मक परिवर्तन करके ही स्वच्छ भारत का निर्माण किया जा सकता है। माननीय मंत्री जी ने परमार्थ निकेतन ऋषिकेश आने का आमंत्रण स्वीकार करते हुये पूज्य स्वामी जी से कहा कि परमार्थ गंगा तट पर होने वाली आरती में भारत की संस्कृति के दर्शन होते है, वह आस्था के साथ वैश्विक बन्धुत्व का उदाहरण है।