कुंभ ने नास्तिक को बनाया आस्तिक, लगातार 10वीं बार कुंभ में शामिल हुए आस्ट्रेलिया के सर्वांगगिरी बाबा

प्रयागराज/ देवेश दुबे। आस्था का पर्व कुंभ में शामिल होने के लिए सात समंदर पार से लोग हर बार आते हैं। प्रयागराज में चल रहे कुंभ में ऑस्ट्रेलिया से आए सर्वांगगिरी बाबा सबका ध्यान खींच रहे हैं। दरअसल 1998 में भारत आने से पहले सर्वांगगिरी बाबा नास्तिक थे। मेलबर्न में पले-बढ़े ये बाबा पहले बस योग करते थे फिर भारत आकर सनातन धर्म से वाफ़िक़ हुए और अब धर्म-कर्म में रम गए हैं। भारत आने के बाद उन्होंने गुरु मंगलगिरी से दीक्षा ली। बाबा के मुताबिक शुरू में उन्हें हिंदी समझने में दिक्कत होती थी लेकिन अध्यात्म में रमने के बाद वे उसी के हो गए। अब वह दसवीं बार कुंभ स्नान के लिए आए हैं। आपको बतादें कि प्रयागराज में पहले शाही स्नान के साथ ही अर्ध कुंभ मेले की शुरुआत 15 जनवरी को हुई थी। मेले में सबसे पहले साधु-संतों का शाही जुलूस निकाला गया जिसके बाद शाही स्नान की परंपरा शुरू हो गई थी।
इस धार्मिक, आध्यामिक और सांस्कृतिक मेले में अगले 45 दिनों तक देश-विदेश के 15 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। मान्यता के मुताबक पहला ‘शाही स्नान’ स्वर्ग का दरवाजा खोलता है, जिसकी शुरुआत मंगलवार को सुबह 5.30 बजे हुई। श्रद्धालुओं के लिए गंगा नदी के किनारे 3,200 एकड़ क्षेत्र में छोटा शहर बसाया गया है। यहां टेंट का किराया 2,100 रुपये से लेकर 20,000 रुपये प्रति रात है। इसके अलावा बड़ी तादाद में यहां पहुंचने वाले अखाड़ों और संतों के लिए डोर्मेटरी और टेंट स्टॉल लगाए गए हैं। आधिकारियों ने बताया कि कुंभ प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
कुंभ मेला के डीआईजी के. पी. सिंह ने कहा, पहली बार कुंभ मेले में तीन महिला यूनिट्स की तैनाती की गई है, जो महिला श्रद्धालुओं को देखते हुए की गई है। साथ ही विदेशी हेल्प डेस्क भी 24 घंटे काम करेगा, क्योंकि विदेशियों की भी मेले में काफी रुचि होती है। उन्होंने बताया कि अर्धसैनिक और पुलिस बलों की तैनाती की गई है, साथ ही संगम की तरफ का यातायात 3,000 पुलिसकर्मी संभालेंगे।