छात्रों के सर्वागीण विकास पर ध्यान देेना नितांत आवश्यक- स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कोटद्वार स्थित कण्व आश्रम में गुरूकुल स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की तथा वहां सैकड़ों की संख्या में उपस्थित छात्रों एवं अतिथियों को गुरूकुल परम्परा एवं गुरूकुल शिक्षा पद्धति का महत्व समझाया।
गुरूकुल महाविद्यालय स्वर्ण जयंती समारोह के दो दिवसीय कार्यक्रम में गायत्री महामृत्युंजय महायज्ञ, स्वास्थ्य रक्षा सम्मेलन, योग प्रतियोगिता, गढ़वाल केशरी कुशती प्रतियोगिता, संगीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
गुरूकुल महाविद्यालय स्वर्ण जयंती समारोह के समापन अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, डाॅ सत्यपाल सिंह जी मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री, वन एवं वन्य जीव, पर्यावरण मंत्री डाॅ हरक सिंह रावत जी,एवं कण्वाश्रम के प्रमुख श्री योगीराज विश्वपाल जयंत जी एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
स्वर्ण जयंती समारोह के समापन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा, ’गुरूकुल पद्धति भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति है जहां पर छात्र शिक्षा के साथ दीक्षा को भी आत्मसात करते थे। गुरूकुल शिक्षा पद्धति के युग में ही भारत को विश्वगुरू का स्थान प्राप्त था। गुरूकुल अर्थात प्रकृति के सानिध्य में जीवन का सर्वागीण विकास; यहां पर जीवन का सभी दिशाओं में सन्तुलित विकास होता था। उन्होने कहा कि आज हमें छात्रों के सर्वागीण विकास पर विशेष ध्यान देेने की आवश्यकता है। शिक्षा का लक्ष्य केवल शिक्षित होना ही नहीं बल्कि प्रकृति और संस्कृति के मध्य समायोजन पूर्ण जीवन जीना है।’
मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डाॅ सत्यपाल सिंह जी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात कही। उन्होने शिक्षा के साथ-साथ ज्ञान और विद्या के विकास एवं व्यवहार परक शिक्षा पद्धति पर जोर दिया। गुरूकुल शिक्षा पद्धति के विषय में जानकारी देते हुये कहा कि गुरूकुल के इतिहास में भारत की शिक्षा व्यवस्था समाहित थी। भारत में संस्कारों एवं संस्कृति के विकास में गुरूकुल का महत्वपूर्ण योगदान है; इस पद्धति ने भगवान राम और श्री कृष्ण जैसे आदर्श चरित्रांे को जन्म दिया है। वर्तमान समय में हम आधुनिक शिक्षा पद्धति और गुरूकुल शिक्षा पद्धति का समन्वय स्वरूप तैयार करे तो भारत एक बार फिर विश्व गुरू का स्थान प्राप्त कर सकता हैं।
डाॅ हरक सिंह रावत जी ने परमार्थ निकेतन के अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव को याद करते हुये कहा कि पूज्य स्वामी जी के मार्गदर्शन में परमार्थ निकेतन में विश्व के 101 देशों के योग जिज्ञासुओं का समागम अभुतपूर्व उपलब्धि है। उन्होने कोटद्वार क्षेत्र को हराभरा बनाने के लिये मिलकर कार्य करने की बात कही।
श्री योगीराज विश्वपाल जयंत जी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इस पावन अवसर पर पूज्य स्वामी जी महाराज ने विशिष्ट अतिथियों को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया तथा प्रतियोगिता में विजय हुये प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरण किया गया।
स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर परमार्थ प्रतिनिधि श्री मोहन सिंह, आचार्य दीपक शर्मा, श्री भगत सिंह, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार और अन्य विशिष्टगण उपस्थित थे।