स्वच्छता पर सरकार के दावे फेल, प्रथम शाही स्नान के दौरान खुले में शौच करते दिखे लोग

प्रयागराज/ शाहिद परवेज। पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छ कुंभ का दावा करते हुए 1,20,000 शौचालय बनाने की बात कही थी, लेकिन आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक समागम के पहले दिन हजारों शौचालय बेकार पड़े मिले और कई श्रद्धालु खुले में शौच करते दिखे।
इससे पहले कुंभ मेला प्रशासन ने भी एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि “इस बार कुंभ मेले में स्वच्छता पर विशेष जोर दिया गया है। बीते सालों में शौचालय की कमी के चलते लोगों को मजबूर होकर खुले शौच करना पड़ रहा था, लेकिन इस बार 1,20,000 शौचालय बनाए गए हैं और स्वच्छता बनाए रखने के लिए सफाईकर्मियों की तादाद दोगुनी कर दी गई है। पिछले कुंभ मेले में सिर्फ 34,000 शौचालय थे।”
स्वच्छता के यह तमाम दावे मोदी सरकार के स्वच्छ भारत अभियान की अहमियत के मद्देनजर किए गए हैं और विज्ञापनों के जरिए इसका खूब प्रचार भी किया गया। लेकिन, मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में लोग खुले में शौच करते देखे गए। वहीं शहर की गलियों और घाटों के पास शौचालयों को देखकर लगता है कि तैयारी की गई है लेकिन पानी की कमी के कारण कई शौचालय काम नहीं कर रहे हैं या उनमें गंदगी अटी पड़ी है। कई शौचालयों के प्लास्टर और सीमेंट उखड़े मिले जिसके कारण वे इस्तेमाल के योग्य नहीं निकले।
कुंभ मेले के एसडीएम राजीव राय ने कहा कि आने वाली अहम तिथियों को समस्या का समाधान करने के उपाय किए जाएंगे। राय ने कहा, “मैं स्वीकार करता हूं कि कुछ इलाकों में शौचालय पूर्ण रूप से ठीक नहीं हैं, लेकिन सुधार के उपाय किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर हम ठेकेदारों को बदलेंगे।”
कुंभ मेले के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी खजाने से अब तक करीब 4,200 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी स्वच्छता के ऐसे हालात हैं तो सवाल उठना लाजमी है।