सनातन संस्कृति के दिव्य पुरोधा परम पूज्य श्री स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी महाराज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि -राम महेश मिश्र

नई दिल्ली/ नेहा मिश्रा। परम पूज्य शंकराचार्य जगदगुरु श्री स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी का महानिर्वाण हो गया है। बयासी (८२) की वय में उनका शरीर पूरा हुआ। हमें पूज्यश्री से दो बार मिलने का सुअवसर मिला, एक बार महाकुम्भ में और दूसरी बार हरिद्वार की हर की पैड़ी पर विशाल गंगा आरती में। मैं उन पलों को हृदय से नमन करता हूँ।

बड़े ही सरल, सज्जन और दिव्य सन्त-महापुरुष थे वो। कभी हमारे दिव्य मार्गदर्शक परम पूज्य गुरुदेव विचार क्रान्ति अभियान के कल्पनापुरुष पं.श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार में आपश्री की अगवानी के घटनाक्रम की यादें आज मानसपटल पर ताज़ा हुईं। गुरुदेव द्वारा उनको ऊँचा आसन देना और स्वयं नीचे आसन पर विराजना आज भी मन को छूता है।

गायत्री महामन्त्र एवं यज्ञ से ब्राह्मणों को पुनः गहराई से जोड़कर उन्हें सच्चे अर्थों में ब्राह्मण बनाने के अलावा ग़ैर-ब्राह्मणों को भी उसका अधिकार देने के लिए किसी समय पूज्य आचार्यश्री के आलोचक रहे पूज्यपाद शंकराचार्य जी ने उनसे कहा था- “आचार्यश्री, आपने लुप्त होती गायत्री और सर्वकल्याणकारी यज्ञ को बचा लिया है तथा उसे जन-जन तक पहुँचाकर विश्वव्यापी बना दिया है, इसके लिए मैं आपका सम्मान करता हूँ।”

केन्द्र में यूपीए के शासनकाल के दौरान ईसाईयत के अन्धाधुँध फैलाव को रोकने में समर्थ जिन बड़े सनातन धर्माचार्यों पर कठोर प्रहार किए गये, जगदगुरु शंकराचार्य उसकी पहली कड़ी थे। बेहद भद्दे आरोप लगाकर उन्हें कारागार में डाला गया था। इस घटना को ढाल बनाकर वामियों-सामियों द्वारा भारत में ‘भगवा आतंकवाद’ का नया शब्द ईजाद किया गया, जिसके लिए वे सब ख़ासे मज़ाक़ के पात्र बने।

राष्ट्र के सर्वोच्च न्यायालय ने जगदगुरु शंकराचार्य जी को न केवल बाइज़्ज़त बरी किया, बल्कि तत्कालीन भारत सरकार की कड़ी आलोचना भी की। वास्तव में वह घटनाक्रम भारतीय आध्यात्मिक इतिहास पर एक गहरा व काला धब्बा था। बाद में तो अनेक धर्मगुरु अन्दर किए गए और कारावास के दौरान उन्हें भयंकर अमानुषिक यातनाएँ दी गयीं। हालाँकि उन पवित्रात्माओं को पीड़ा पहुँचाने वाले कुछ बड़े लोग कुछ ही समय में ख़ुद कुत्ते की भाँति मरे। सोशल मीडिया को साधुवाद, जिसके ज़रिए धर्मनिरपेक्ष इस महान देश के कथित बड़ों के वे कुकृत्य जनसामान्य तक पहुँच सके। देशवासियों ने ऐसे सभी तत्वों और ऊपर बैठी बड़ी शक्तियों की कड़ी भर्त्सना की और उन्हें प्रयासपूर्वक राष्ट्र की मुख्य शासनधारा से दूर किया।

हे भारतीय संस्कृति के प्रकांड पुरोधा! आपकी जय हो, आप अमर हैं और अमर रहेंगे। आपकी दिव्य सत्ता को हम-सबका कोटिश: नमन।