बच्चों के बचपन को भयमुक्त एवं गुलामी से मुक्त करना ही उद्देश्य -कैलाश सत्यार्थी

ऋषिकेश। देश के 23 राज्यों से होती हुई तीर्थनगरी परमार्थ निकेतन में विश्राम के पश्चात आज भारत यात्रा यहां से विदा हुई। नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी एवं श्रीमती सत्यार्थी के साथ सैकड़ों बच्चे ’सुरक्षित बचपन, सुरक्षित’ भारत का संदेश देते हुये लोगांे का बच्चों के प्रति जागरूक  कर रहे हैं।

प्रस्थान से पूर्व आज परमार्थ निकेतन में जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री कैलाश सत्यार्थी एवं साध्वी भगवती सरस्वती ने जिज्ञासुओं की जिज्ञासा का समाधान किया।
विदेशी यात्री ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से पूछा कि आध्यात्मिक गुरू होते हुये आपके मन में कैसे ’वाटर, सेनिटेशन और हाइजीन’ पर कार्य करने का विचार आया। इस का समाधान करते हुये स्वामी जी ने कहा कि ’बच्चे हमारी आने वाली पीढ़ी नहीं हमारा वर्तमान और भविष्य दोनों है। भारत मंे ही स्वच्छ जल के अभाव के कारण प्रतिदिन पांच वर्ष तक की आयु के 1600 बच्चे मौत के मुंह में समा जाते है फिर भी लोग चुप रहते ह;ै लोगो को कोई बेचैनी नहीं होती, वहीं दूसरी ओर कहीं किसी अप्रिय घटना के कारण कुछ लोग घायल और कुछ की मौत हो जाती है तो हजारों लोग सड़कों पर आ जाते है, ये खबरे कई सप्ताह तक समाचार के प्रथम पृष्ठ पर होती है और जहां 1600 बच्चे रोज मर रहे है उसके प्रति लोग असंवेदनशील बने रहते है बस वहीं से हमने ’जीवा संगठन’ के माध्यम से भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विश्व के अनेक देशों मंे स्वच्छ जल, स्वच्छता एवं शौचालय के प्रति जागरूकता अभियान चलाया ताकि बच्चांे के रूप में धरती पर आयी यह परमात्मा की सुन्दर कृति ’सुरक्षित एवं स्वस्थ’ जीवनयापन कर सके। जीवा के माध्यम से इसके लिये सभी धर्मों के धर्मगुरूओं को जोड़ने का प्रयास किया गया है ताकि वे अपने-अपने धर्मस्थानों एवं धर्मोंपदेशों से जनता में जागरण, चेतना एवं संवेदनशीलता ला सकें।’
श्री कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि माँ गंगा का पावन तट परम शान्ति प्रदान करने वाला है उन्होने उपस्थित श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुये कहा कि ’बच्चे ईश्वर का प्रतिरूप हैं, बेटियां तो धरती पर ममता का सागर और माँ रूपी अमुल्य भेंट हैं। परन्तु भारत सहित विश्व के अनेक देशों में आज भी कई बच्चे अपने बचपन को जी नहीं पाते उनका बचपन असुरक्षित, अभावग्रस्त एवं भययुक्त गुलामी के वातावरण में व्यतित होता है। अतः बच्चों के बचपन को भयमुक्त एवं गुलामी से मुक्त करना ही हमारा प्रयास हैं।’
भारत यात्रा की परमार्थ से विदाई के पूर्व विश्व में जल की उपलब्धता होती रहे इस भावना से सभी ने स्वामी जी, श्री कैलाश सत्यार्थी, श्रीमती सत्यार्थी, साध्वी भगवती सरस्वती, जया शर्मा, नन्दिनी त्रिपाठी, लौरी, एलिस, सूजी, प्रीति, इन्दू, भारत यात्रा के बच्चे, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार एवं आचार्य तथा योग साधकों के साथ वाटर ब्लेसिंग सेरेेमनी की।
भारत यात्रा की याद में  परमार्थ योग विलेज में शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष के पौधे का रोपण स्वामी जी एवं श्री कैलाश सत्यार्थी ने किया।