कालसर्प प्रकार, दोष, उपाय जाने ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय

वाराणसी। कुंडली के बारह भावों में विभिन्न ग्रहों की स्थितियां बनती हैं जिनके आधार पर विश्लेषण करने पर योग बनते हैं. इन्हीं योगों में एक स्थिति बनती हैं – काल सर्प दोष की।

काल सर्प योग में काल यानि राहु के नक्षत्र के स्वामी यम यानि काल और सर्प यानि केतु के नक्षत्र स्वामी आश्‍लेषा के स्वामी सर्प से मिल कर बनता है।

इस योग में राहु और केतु के बीच सभी गृह आते हैं और इसीलिए इन दोनों छाया ग्रहों का आपके सम्पूर्ण भाग्य पर प्रभाव पड़ता है। कालसर्प योग से आपके सभी कार्यों में बाधा आती है, कड़ी मेहनत का कोई परिणाम नहीं निकलता, संतान से कष्ट मिलता है और शत्रु आप पर हावी होने लगते हैं.

सभी भावों के हिसाब से पूरे बारह कालसर्प योग बनते हैं। ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय ने काल सर्प दोष की पहचान और निवारण दोनों दिए हैं, आप अपनी जन्म पत्री में इनका मिलान कर के कालसर्प दोष होने की पुष्टि कर सकते हैं.

1- अनंत कालसर्प योग

योग:

यदि जातक के जन्‍मांग के प्रथम भाव में राहु और सप्‍तम भाव में केतु हो तथा इसके बीच सारे ग्रह आ जाये तो अनंत काल सर्प योग होता हे.

प्रभाव:

जातक के घर में कलह होती रहती है. परिवार वालों या मित्रों से धोखा मिलने की आशंका हमेशा बनी रहती है. मानसिक रूप से व्‍यक्ति परेशान रहता है, हालांकि ऐसे लोग सिर्फ अपने मन की ही करते हैं.

उपाय:

अनन्त कालसर्प दोष होने पर नागपंचमी के दिन एकमुखी, आठमुखी या नौमुखी रुद्राक्ष धारण करें.

यदि इस दोष के कारण स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है तो नागपंचमी के दिन रांगे (एक धातु) से बना सिक्का पानी में प्रवाहित करें.

 

2-. कुलिक कालसर्प योग

योग:

यदि जातक के जन्‍मांग के द्वितीय भाव में राहु और अष्‍टम भाव में केतु हो तथा इसके बीच सारे ग्रह आ जाये तो यह कुलिक काल सर्प योग होता है.

प्रभाव:

इस वजह से जातक गुप्‍त रोग से जूझता रहता है. इनके शत्रु भी अधिक होते हैं परिवार में परेशानी रहती है और वाणी में कटुता रहती है.

उपाय:

कुलिक नामक कालसर्प दोष होने पर दो रंग वाला कंबल अथवा गर्म वस्त्र दान करें.

चांदी की ठोस गोली बनवाकर उसकी पूजा करें और उसे अपने पास रखें.

 

3- वासुकि कालसर्प योग

योग:

यदि जातक के जन्‍मांग में राहु तृतीय और केतु भाग्‍य भाव यानि 9वें भाव में हो तथा इसके बीच सारे ग्रह आ जाये तो वासुकि काल सर्प योग होता है.

प्रभाव:

ऐसे लोगों को भाईयों से कभी सहयोग नहीं मिलता. ऐसे लोगों का स्‍वभाव चिड़चिड़ा होता है. ये लोग कितना भी कष्‍ट क्‍यों न आ जाये, किसी से कहते नहीं.

उपाय:

वासुकि कालसर्प दोष होने पर रात्रि को सोते समय सिरहाने पर थोड़ा बाजरा रखें और सुबह उठकर उसे पक्षियों को खिला दें. – नागपंचमी के दिन लाल धागे में तीन, आठ या नौमुखी रुद्राक्ष धारण करें.

 

4- शंखपाल कालसर्प योग

योग:

यदि जातक के जन्‍मांग में राहु चौथे भाव में और केतु दसवें भाव में हो तथा इसके बीच सारे ग्रह आ जाये तो शंखपाल कालसर्प योग बनता है.

प्रभाव:

ऐसे लोगों का माता पिता से हमेशा अनबन बन रहता है और ये लोग पारिवारिक कलह में ही उलझे रहते हैं. इनका मित्रों के साथ भी नहीं बनता.

उपाय:

शंखपाल कालसर्प दोष के निवारण के लिए 400 ग्राम साबूत बादाम बहते पानी में प्रवाहित करें.

शिवलिंग का दूध से अभिषेक करें.

 

5- पद्म कालसर्प योग

योग:

यदि जातक के जन्‍मांग में राहु पांचवें भाव में हो और केतु ग्यारहवें भाव में हो तथा इसके बीच सारे ग्रह आ जाये तो पद्म कालसर्प योग बनता है.

प्रभाव:

इसके कारण जातक के विद्याध्ययन में कुछ व्यवधान उपस्थित होता है. परंतु कालान्तर में वह व्यवधान समाप्त हो जाता है. उन्हें संतान प्राय: विलंब से प्राप्त होती है, या संतान होने में आंशिक रूप से व्यवधान उपस्थित होता है. जातक को पुत्र संतान की प्राय: चिंता बनी रहती है.

उपाय:

शुभ मुहूर्त में मुख्य द्वार पर चांदी का स्वस्तिक एवं दोनों ओर धातु से मिर्मित नाग चिपका दें.

– पद्म कालसर्प दोष होने पर नागपंचमी के दिन से प्रारंभ करते हुए 40 दिनों तक रोज सरस्वती चालीसा का पाठ करें.

जरुरतमंदों को पीले वस्त्र का दान करें और तुलसी का पौधा लगाएं.

 

6- महापद्म कालसर्प योग

योग:

राहु छठे भाव में और केतु बारहवे भाव में और इसके बीच सारे ग्रह अवस्थित हों तथा इसके बीच सारे ग्रह आ जाये तो महापद्म कालसर्प योग बनता है.

प्रभाव:

इस योग में जातक शत्रु विजेता होता है, विदेशों से व्यापार में लाभ कमाता है लेकिन बाहर ज्यादा रहने के कारण उसके घर में शांति का अभाव रहता है. इस योग के जातक को एक ही चिज मिल सकती है धन या सुख. इस योग के कारण जातक यात्रा बहुत करता है उसे यात्राओं में सफलता भी मिलती है परन्तु कई बार अपनो द्वारा धोखा खाने के कारण उनके मन में निराशा की भावना जागृत हो उठती है.

उपाय:

महापद्म कालसर्प दोष के निदान के लिए हनुमान मंदिर में जाकर सुंदरकांड का पाठ करें.

नागपंचमी के दिन गरीब, असहायों को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा दें.

 

7- शेषनाग काल सर्प योग

योग:

यदि किसी की कुंडली के बारहवें भाव में राहु और छठे भाव में केतु के अंतर्गत सभी ग्रह विद्यमान हों तथा इसके बीच सारे ग्रह आ जाये तो शेषनाग काल सर्प योग होता है.

प्रभाव:

ऐसे लोगों के खिलाफ लोग तंत्र-मंत्र का इस्‍तेमाल ज्‍यादा करते हैं. इन्‍हें मानसिक रोग लगने की आशंका ज्‍यादा रहती है. यदि राहु के साथ मंगल है तो इनके सारे शत्रु परस्‍त हो जाते हैं. यानी इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाता है. विदेश यात्रा से लाभ मिलते हैं, लेकिन साझेदारी के व्‍यापार में हानि उठानी पड़ती है.

उपाय:

हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें और मंगलवार के दिन हनुमान जी की प्रतिमा पर लाल वस्त्रा सहित सिंदूर, चमेली का तेल व बताशा चढ़ाएं.

किसी शुभ मुहूर्त में मसूर की दाल तीन बार गरीबों को दान करें.

 

8- विषाक्‍त कालसर्प योग

योग:

यदि व्‍यक्ति की कुंडली के ग्‍यारहवें भाव में राहु और पांचवें भाव में केतु सभी ग्रहों को समेटे हुए हो विषाक्‍त काल सर्प योग होता है.

प्रभाव:

ऐसे लोग अच्‍छी विद्या हासिल करते हैं. इन्‍हें पुत्र की प्राप्ति होती है. ये उदारवादी होते हैं, लेकिन कभी-कभी पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ता है. ये कभी भी किसी पर मेहरबान हो सकते हैं.

उपाय:

श्रावण मास में 30 दिनों तक महादेव का अभिषेक करें.

सोमवार को शिव मंदिर में चांदी के नाग की पूजा करें, पितरों का स्मरण करें तथा श्रध्दापूर्वक बहते पानी या समुद्र में नागदेवता का विसर्जन करें.

 

9- घातक काल सर्प योग

योग:

घातक काल सर्प योग तब बनता है, जब कुंडली के 10वें भाव में राहु और चतुर्थ भाव में केतु तथा इसके बीच सारे ग्रह आ जाये.

प्रभाव:

ऐसे लोगों के वैवाहिक जीवन में तनाव बना रहता है. पै‍तृक संपत्ति जल्‍दी नहीं मिल पाती है. ऐसे लोग नौकरी या व्‍यापार के लिये हमेशा परेशान रहते हैं. कर्ज भी बहुत जल्‍दी चढ़ जाता है. हृदय और सांस के रोग की परेशानी बनी रहती है.

उपाय:

नित्य प्रति हनुमान चालीसा का पाठ करें व प्रत्येक मंगलवार का व्रत रखें और हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर घुलाकर चढ़ाएं तथा बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं.

एक वर्ष तक गणपति अथर्वशीर्ष का नित्य पाठ करें.

 

10- तक्षक कालसर्प योग

योग:

केतु लग्न में और राहु सप्तम स्थान में हो तथा इसके बीच सारे ग्रह आ जाये तो तक्षक नामक कालसर्प योग बनता है. कालसर्प योग की शास्त्रीय परिभाषा में इस प्रकार का अनुदित योग परिगणित नहीं है. लेकिन व्यवहार में इस प्रकार के योग का भी संबंधित जातकों पर अशुभ प्रभाव पड़ता देखा जाता है. प्रभाव:

क्षक नामक कालसर्प योग से पीड़ित जातकों को पैतृक संपत्ति का सुख नहीं मिल पाता. या तो उसे पैतृक संपत्ति मिलती ही नहीं और मिलती है तो वह उसे किसी अन्य को दान दे देता है अथवा बर्बाद कर देता है. ऐसे जातक प्रेम प्रसंग में भी असफल होते देखे जाते हैं. गुप्त प्रसंगों में भी उन्हें धोखा खाना पड़ता है. वैवाहिक जीवन सामान्य रहते हुए भी कभी-कभी संबंध इतना तनावपूर्ण हो जाता है कि अलगाव की नौबत आ जाती है.

उपाय:

कालसर्प दोष निवारण यंत्रा घर में स्थापित करके, इसका नियमित पूजन करें.

सवा महीने जौ के दाने पक्षियों को खिलाएं

 

11- कर्कोटक कालसर्प योग

योग:

केतु दूसरे स्थान में और राहु अष्टम स्थान में तथा इसके बीच सारे ग्रह आ जाये तो कर्कोटक नाम कालसर्प योग बनता है.

प्रभाव:

ऐसे जातकों के भाग्योदय में इस योग की वजह से कुछ रुकावटें अवश्य आती हैं. नौकरी मिलने व पदोन्नति होने में भी कठिनाइयां आती हैं. कभी-कभी तो उन्हें बड़े ओहदे से छोटे ओहदे पर काम करनेका भी दंड भुगतना पड़ता है.

उपाय:

हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें और पांच मंगलवार का व्रत करते हुए हनुमान जी को चमेली के तेल में घुला सिंदूर व बूंदी के लड्डू चढ़ाएं.

 

12- शंखचूड़ कालसर्प योग

योग:

केतु तीसरे स्थान में व राहु नवम स्थान में तथा इसके बीच सारे ग्रह आ जाये तो शंखचूड़ नामक कालसप्र योग बनता है।

प्रभाव:

इस योग से पीड़ित जातकों का भाग्योदय होने में अनेक प्रकार की अड़चने आती रहती हैं. व्यावसायिक प्रगति, नौकरी में प्रोन्नति तथा पढ़ाई-लिखाई में वांछित सफलता मिलने में जातकों को कई प्रकार के विघ्नों का सामना करना पड़ता है. इसके पीछे कारण वह स्वयं होता है क्योंकि वह अपनो का भी हिस्सा छिनना चाहता है. अपने जीवन में धर्म से खिलवाड़ करता है।

उपाय:

महामृत्युंजय कवच का नित्य पाठ करें और श्रावण महीने के हर सोमवार का व्रत रखते हुए शिव का रुद्राभिषेक करें। चांदी या अष्टधातु का नाग बनवाकर उसकी अंगूठी हाथ की मध्यमा उंगली में धारण करें. किसी शुभ मुहुर्त मेंअपने मकान के मुख्य दरवाजे पर चांदी का स्वस्तिक एवं दोनों ओर धातु से निर्मित नाग चिपका दें।