भारत एक अद्भुत संस्कृति का देश है जहां सभी का समावेश है- स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश/ हुसैन सदाकत। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने जनजातीय मामलों के केन्द्रीय मंत्री श्री जुअल ओरम से मुलाकात की। स्वामी चिदानन्द और जुअल ओरम केे बीच कुम्भ मेला के अवसर पर आयोजित होने वाले ’कीवा फेस्टिवल’ के विषय में चर्चा हुुुई।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि अनेक देशों से आये राजदूतों ने अपने-अपने देशों के ध्वज फहराये। यह अद्भुत उत्सव भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व का नतीजा है कि अनेक देशों के राजदूतों ने पहली बार ध्वज फहराये और इस माध्यम से अपने देश के लोगोें को कुम्भ मेला में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। स्वामी जी महाराज ने कहा कि जिन दृश्यों को हम दूरसंचार माध्यम से देखते हैं उन्हें हम अपने रीति रीवाजोेेें के अनुसार जब संगम के तट पर ध्यान करेंगे, भजन करेंगे, चिंतन करेंगे, पूजन करेंगे तो सचमुच यह बहुत विलक्षण दृश्य होगा। विभिन्न देशों से आये लोग, अपनी-अपनी वेशभूषा में अपने-अपने ध्वज को लेकर एकत्रित होंगे, वास्तव में यह विलक्षण दृश्य होगा। कुम्भ मेेले में पूरे विश्व को जोड़ने के लिये वे सभी लोग जो एक किस्म से भारतीय संस्कृति का ही रूप लेकर अपनी-अपनी आस्थाओं के बल पर अपनी पुजा पद्धति को बरकरार रखे, जीवन पद्धति को संस्कारों को जी रहे है उन सब को भारत आकर कुम्भ का दर्शन क्योकि मेरा ऐसा मानना है कि कुम्भ नहीं देखा तो भारत नहीं देखा। कुम्भ को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। स्वामी जी महाराज ने सभी से आह्वान किया कि आओ कुम्भ चले। ’चलो  कुम्भ चले’ का निमंत्रण दिया। 
स्वामी जी ने बताया की संगम के तट पर चार दिनों तक एक कीवा फेस्टिवल के रूप में विश्व के विभिन्न देशों से आये लोग अनुष्ठान करेंगे; ध्यान करेंगे, अपनी रीति रिवाज से यज्ञ करेंगे अखंड ज्योति की पूजा करेंगे, अखंड ज्योति के आस-पास बैठकर ध्यान करेंगे और कुम्भ की ऊर्जा को आत्मसात करेंगे। कीवा फेस्टिवल में भारत सहित विश्व के सभी आदिवासी और जनजातियों को आमंत्रित किया गया है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि भारत एक अद्भुत संस्कृति का देश है जहां सभी का समावेश है। संगम के तट पर होने वाले कुम्भ मेला मंे कीवा फेस्टिवल के उद्घाटन के अवसर पर भारत के जनजातीय और आदिवासी केन्द्रीय मंत्री, भारत के सभी अखाड़ों के मंहत, पूज्य संत, महापुरूष, योग गुरू स्वामी रामदेव जी महाराज एवं अन्य विद्वान उपस्थित होंगे। उन्होने बताया कि इस बार कुम्भ मेले के अवसर पर एक अद्भुत तीर्थ का दर्शन होगा।