जाॅब ओरिएंटेड के साथ जिन्दगी ओरिएंटेड भी हो हमारी शिक्षा – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने बीएचयू के संस्थापक भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के पौत्र और उच्च न्यायाधीश, न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय जी को बीएचयू के कुलाधिपति बनने पर बधाई दी। साथ ही दोनों के मध्य भारत की शिक्षा व्यवस्था और बीएचयू में शान्ति, सद्भावपूर्ण वातावरण, विश्व बंधुत्व का पाठ तथा स्वच्छता के संस्कार देने के विषयों पर चर्चा हुयी।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1916 में महामना मदन मोहन मालवीय जी ने वसंत पंचमी के पावन अवसर पर की थी। इसका आदर्श वाक्य ’’विद्ययाऽमृतमश्रुते’’ अर्थात विद्या से अमृत की प्राप्ति होती है। इस अमृत तुल्य वाक्य पर अमल करना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होने कहा कि महामना चाहते थे कि इस विश्वविद्यालय में सभी धर्मो के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करे।
महामना ने कहा था कि भारत सबका देश है; सब की साझी विरासत है और सब मिलकर इसका विकास करे तभी भारत विकास और शक्ति प्राप्त कर सकता है जब विभिन्न समुदाय के लोग परस्पर प्रेम और भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत करेंगे। यह मेरी इच्छा और प्रार्थना है कि प्रकाश और जीवन का यह केन्द्र जो अस्तित्व में आ रहा है वह ऐसे छात्र प्रदान करेगा जो अपने बौद्धिक रूप से संसार के दूसरे श्रेष्ठ छात्रों के बराबर होंगे, बल्कि एक श्रेष्ठ जीवन व्यतीत करेंगे, अपने देश से प्यार करेंगे और परम पिता के प्रति ईमानदार रहेंगे।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि आज हमें ऐसे छात्रो की जरूरत है अपने राष्ट्र को समृद्ध और समुन्नत बनायंे; जो दंगों के साथ नहीं बल्कि दूसरों को उनके दर्द में साथ दे। उन्होने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य मात्र अपना भरण-पोषण नहीं बल्कि राष्ट्र और समाज की जिम्मेदारी को अच्छी तरह से पूरा करना भी है। हमारी शिक्षा जाॅब ओरिएंटेड के साथ जिन्दगी ओरिएंटेड होनी चाहिये।
स्वामी जी महाराज ने कहा की भारत के यशस्वी और ऊर्जावान प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान का संकल्प लिया और सबको कराया यह देश के लिये बहुत बड़ी उपलब्धि थी उसके पश्चात गंगा एक्ट बनाये जाने के लिये एक कमेटी बनायी जिसमें न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय जी को चेयरमैन बना कर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। उन्होने सभी संस्थाओं, विभागों और सम्बंधित लोगांें से सलाह लेकर  गंगा एक्ट बनाने के लिये जिसमें सभी के सुझावों और मार्गदर्शन को सम्मिलित किया गया। इस कमेटी में पर्यावरणविद्ों, निवर्तमान न्यायधीशों को सम्मलित किया गया। गंगा एक्शन परिवार, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश ने भी अपने पर्यावरणविद्ों एवं विशेषज्ञों द्वारा गंगा एक्ट का डाªफ्ट बनाया उसे भी इस कमेटी को सौपा गया जो वर्षो के अथक परिश्रम का परिणाम था। गंगा माँ सदैव अविरल और निर्मल बहती रहे इसके लिये गंगा महासभा ने भी एक मसौदा तैयार किया था उसे भी इसमें सम्मिलित किया गया तथा अन्य सुझाव भी आये। स्वामी जी ने कहा कि गंगा हमारी आन, बान और शान है उसकी निर्मलता और अविरलता के लिये निश्चित ही बहुत शीघ्र गंगा एक्ट के मसौदे का अन्तिम रूप बनकर तैयार होगा ऐसा मेरा विश्वास है। शीघ्र ही माँ गंगा एवं अन्य सभी नदियों के लिये एक ऐतिहासिक कार्य होगा। नदियां बचेेगी तो जीवन बचेगा; नदियां बचेगी तो भारत बचेगा और नदियां बचेगी तो पेड़, प्राणी, पृथ्वी और आने वाली पीढ़िया बचेगी।
स्वामी जी महाराज ने न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय जी की द्वारा प्रदान की जा रही उत्कृष्ठ सेवाओं के लिये उनका अभिनन्दन किया और कहा कि प्रयागराज कुम्भ के पावन पर्व पर संत समाज द्वारा उनका अभिनन्दन व उन्हे सम्मानित किया जायेगा।
स्वामी जी महाराज ने न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय जी को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया और परमार्थ गंगा तट पर होने वाली दिव्य आरती में सहभाग हेतु आमंत्रित किया। न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय जी ने आमंत्रण स्वीकार करते हुये स्वामी जी महाराज का अभिनन्दन किया।