शयन के समय प्रकृति करती है मनुष्य की अद्भुत हीलिंग- सुधांशु जी महाराज 

जालन्धर/ नेहा मिश्रा। ध्यान शान्ति से प्रशान्ति की यात्रा है। यह व्यक्ति को बाहरी यात्रा से रोककर आन्तरिक यात्रा पर चला देता है। इससे मनुष्य में गम्भीरता बढ़ती है। उसके शरीर, मन, वचन, कर्म सभी में प्रभावशाली सन्तुलन स्थापित हो जाता है। वह निज की सभी शक्तियों को केन्द्रित कर लक्ष्यभेदी बन जाता है, फलतः उसके जीवन में सफलताओं के द्वार खुलते जाते हैं।

यह बात आज यहाँ साईंदास स्कूल प्रांगण में विश्व जागृति मिशन के जालन्धर मण्डल द्वारा आयोजित चारदिवसीय विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के आख़िरी दिवस के पूर्वांहक़ालीन सत्र में मिशन प्रमुख आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने कही। उन्होंने दिनचर्या को व्यवस्थित करने के अनेक गुर देते हुए उपस्थितजनों के कहा कि आप शान्ति में सोइये और आनन्द में जागिए। उन्होंने कहा कि गहरी नींद में शयन के समय मनुष्य की आत्मचेतना का स्पर्श परम शक्तिशाली विश्वशक्ति से हो जाता है और प्रकृति व्यक्ति की सम्पूर्ण चार्जिंग कर देती है। नस-नाड़ियों, भावनाओं तथा हार्मोंस में अदृश्य बदलाव आता है, जिसकी
अनुभूति व्यक्ति को अनूठी ऊर्जा के रूप में होती है।

श्री सुधांशु जी महाराज ने बड़ी-बड़ी योजनाएँ बनाने वाले योजनाकारों, कलाकारों, संगीतज्ञों, वैज्ञानिकों आदि के उल्लेखनीय सृजनों में ध्यान, आत्मचिन्तन, लशान्तिपूर्ण गहरी नींद, लक्ष्यपरक व सकारात्मक चिन्तन तथा सर्वकल्याणकारी कर्मप्रवाह की महती भूमिका बतायी। उन्होंने कहा कि शयन के दौरान अदृश्यसत्ता द्वारा नयी-नयी योजनाओं के लिए मस्तिष्क को तैयार किया जाता है। इस संसार के समस्त अविष्कार इन्हीं व्यवस्थित आध्यात्मिक विधियों से जन्म लेते हैं। उन्होंने देश-विदेश के नामी-गिरामी व्यक्तियों के जीवन की चर्चा की और कहा कि वे इसी आध्यात्मिक मार्ग से चरम पर पहुँचे हैं।

प्रख्यात चिन्तक एवं विचारक श्री सुधांशु जी महाराज ने वृद्धजनों को बढ़ती आयु के साथ अनासक्ति को अपनाने की सलाह दी और कहा कि समझदार बच्चों के काम में वे अनावश्यक दख़ल न दें। उन्होंने उपस्थितजनों को जीवन साधना के ढेरों सूत्र दिए और सुख-शान्ति से भरा जीवन प्राप्त करने के लिए इन्हें आचरित करने की अपील सभी से की। नित्य हरपल देवशक्तियों, हिमालय, गंगा, दिव्य नदियों, जड़ी-बूटियों वाले पेड़-पौधों इत्यादि को संस्पर्श कर हवा के माध्यम से मनुष्य के समीप आने वाली प्राणशक्ति को अपने भीतर आकर्षित करने के लिए उन्होंने प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, कपालभाति, भ्रामरी आदि का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया।

विश्व जागृति मिशन के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने अनाथ (देवदूत) बच्चों की शिक्षा सहित संस्था की विविध लोक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपस्थित जनसमुदाय को दी। उन्होंने बताया कि मिशन मुख्यालय आनन्दधाम नयी दिल्ली के अलावा देश भर में २० आश्रम तथा ८५ सक्रिय शाखाएँ सेवारत हैं।