IYF 2018: 17 प्रतिभागियों से शुरू हुआ आज 2000 योग साधकों की उपस्थिति है, यह भारत के लिये गर्व का क्षण है

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन और आयुष मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का समापन देश विदेश के संतों योगाचार्यों और योग साधकों के बीच सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर योगगुरू बाबा रामदेव, दुनियाभर में सूफ़ी गायन के लिए मशहूर कैलाश खेर भी मौजूद रहे।

दुनियाभर से आए योग साधकों की मौजूदगी में बौद्ध गुरू भिक्खु संगसेना जी ने कहा कि पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज शान्ति; पर्यावरण संरक्षण एवं प्रेम का संदेश प्रसारित करने वाले विश्व स्तरीय राजदूत है।

योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि ’’आज मैं परमार्थ गंगा तट, योगरूपी ब्रह्माण्ड में आकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ, यह सब पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की तपस्या और साध्वी भगवती सरस्वती जी के अनुष्ठान का फल है कि आज हम वैश्विक योग रूपी एकत्व को गंगा तट पर देख रहे है। इस महोत्सव को उन्होने विश्व की ’अमूल्य विरासत’ कहा। उन्होने पूरा विश्व एक परिवार का संदेश दिया। स्वामी रामदेव ने कहा कि मेरा पूरा जीवन ही परमार्थ है। प्रकृति, सूर्य, जल, वायु और पूरा ब्रह्माण्ड हमारे लिये है तो हमें भी ब्रह्माण्ड के लिये जीना चाहिये। योग में शान्ति, स्वास्थ्य, समृद्धि, हीलिंग, एकता और सब कुछ समाहित है। उन्होने कहा कि योगी का जीवन शुद्ध, पवित्र और डिवाइन होना चाहिये। सभी से आह्वान किया की प्रातः काल योग और फिर कर्मयोग करे यही तो जीवन है। योग हमें आत्मिक शान्ति देता है अतः योग ही मेरा जीवन है।  ब्रह्म और ब्रह्माण्ड के एकत्व का नाम ही योग है।
योग इन्स्ट्टियूट मुम्बई से आयी हंसा जयदेव जी ने कहा कि यह महोत्सव मुझे मोहित करने वाला है मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ  मुझे अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में सहभाग का अवसर मिला, यहां आते ही मस्तिष्क शांत, मन आन्नदित और शरीर ऊर्जावान हो जाता है वास्तव में यह स्थान योग के लिये उपयुक्त और धरती पर स्वर्ग हैं।

साध्वी भगवती सरस्वती ने अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के आरम्भिक दिनों को याद करते हुये कहा कि आज से 20 वर्ष पहले अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में 17 प्रतिभागियों ने सहभाग किया था और आज 2000 योग साधक यहां पर उपस्थित है इसका निरन्तर विस्तार हो रहा है यह भारत के लिये गर्व का क्षण हैं।

पुरस्कार-कुण्डलिनी योग, पावर योग, विन्यास योग, अय्यंगर योग और क्रिया योग सहित योग की विश्वस्तरीय विधाओं का अभ्यास कराने वाले योग शिक्षकों द्वारा 70 से अधिक योग कक्षाओं की मेजबानी करने के लिये पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और साध्वी भगवती सरस्वती जी को पुरस्कृत किया गया। साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2018 को विश्व को सबसे बड़ा महोत्सव घोषित किया गया।
वहीं जापान के योगाचार्य हिकारू हाशिमोटो ने ’जापान का प्रतिक शुन्य’ से पूज्य स्वामी जी को पुरस्कृत किया।