सच्चे योगी वे नहीं जो करतब दिखाये बल्कि वे है जो अहिंसा की नींव रखे – साध्वी भगवती सरस्वती

ऋषिकेश। विश्व विख्यात अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के छटवे दिन परमार्थ निकेतन में 96 से अधिक देशों से आये योग जिज्ञासुुु, योग राजदूत और योगाचार्यं को परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के प्रेरणास्रोत, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने ’’स्वच्छ और शान्त विश्व’’ निर्माण का संकल्प कराया।
परमार्थ गंगा तट पर यह एक ऐतिहासिक दृश्य था जब विश्व के 96 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले हजारों की संख्या में एकजुट योग साधक आध्यात्मिक गुुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन में गर्व से अपने-अपने देश का ध्वज लिये स्वच्छ और शान्त विश्व हेतु प्रार्थना कर रहे थे; प्रदूषणमुक्त गृह के निर्माण हेतु मिलकर कार्य करने का संकल्प लें रहे थे।
स्वामी जी महाराज और अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती जी के नेतृत्व में योग जिज्ञासुओं और योगाचार्यों ने बड़ी उत्सुकता से विश्व ग्लोब का पवित्र गंगा जल से जलाभिषेक (वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी) किया।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी के सन्दर्भ में जानकारी देते हुुये कहा कि विश्व स्तर पर समुचित मात्रा में उच्च गुणवत्ता युक्त पेय जल की आपूर्ति होती रहे। दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में पीने योग्य स्वच्छ जल तक अधिकतर लोगोेें की पहुुंच नहीं है। वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी के माध्यम से हम जल संरक्षण के साथ विश्व के प्रत्येक व्यक्ति की पहुंच स्वच्छ जल तक हो इस हेतु जागरूकता लाना चाहते है। वर्तमान समय में भी हमारे कई भाई-बहनों और बच्चों की जल जनित बीमारियों के कारण असमय मौत हो जाती है। उन्होने कहा कि प्रदूषित और घटता जल स्तर एक वैश्विक समस्या है जिसका समाधान यहां उपस्थित दुनिया के 96 देशों के प्रतिनिधि निश्चित रूप से कर सकते है।
साध्वी जी ने कहा कि ’’महर्षि पंतजलि ने योगियों के लिये यम के अन्तर्गत पहला सूत्र ’अहिंसा’ की बात की है। सच्चे योगी व्यायाम और करतब करने वाले नहीं होते है बल्कि वे है जो अहिंसा की नींव रखते है।’’

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के प्रेरणास्रोत, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी योग साधकों को सम्बोधित करते हुये कहा कि ’योग की विधा में जीवन को बदलने की अनंत सम्भावनायें विद्यमान है। एक सच्चा योगी अनंत क्षमताओं से युक्त होता है आज दुनिया को ऐसे ही योग साधकों की जरूरत है जो प्रकृति के सान्निध्य में रहते हुये विकास करें और दूसरों का भी मार्ग प्रशस्त करें।’

विश्व प्रसिद्ध जीव वैज्ञानिक डाॅ ब्रुस लिप्टन ने -आध्यात्मिक आयामों की तंरगों व स्ंपदनों से जीवन से नकारात्मकता समाप्त होती है तथा सकारात्मक गुणों का प्रदुर्भाव होता हैं। सकारात्मक तंरगों के प्रक्षेपण से सम्पूर्ण वातावरण आनन्दित और अलौकित हो जाता है तथा पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों का जीवन निखरने लगता है।

अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी एवं प्रसिद्ध जीव विज्ञानी डाॅ ब्रुस लिप्टन ने ’’विज्ञान और आध्यात्मिकता’’-योग की शक्ति से स्वयं को और अपनी कोशिकाओं को बदलना, विषय पर उद्बोधन दिया।
परमार्थ निकेतन से साध्वी आभा सरस्वती (माताजी) ने योग निद्रा और विशेष घ्यान के सत्र का नेतृत्व किया। उन्होने योग निद्रा से शरीर पर होने वाले प्रभावों के विषय में गूढ़ जानकारी प्रदान की और कहा कि योगनिद्रा, आध्यात्मिक निद्रा है, यह सोने और जागने के बीच की विशेष स्थिति है जो आत्मिक उन्नति के लिये अत्यंत लाभदायक है।
अमेरिका से आये सिख योगगुरू एवं विश्व प्रसिद्ध योगाचार्य गुरूशब्द सिंह द्वारा कुण्डलिनी योग का अभ्यास कराया । अमेरिका से आयी प्रसिद्ध योगाचार्य किआ मिलर ने कुंडलिनी योग, अमेरिका की योगाचार्य केटी बी हैप्पी ने विन्यासा योग, परमार्थ निकेतन की सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी ने सुक्ष्म योग, यूके से आयी योगाचार्य शाऊल डेविड ने हृदय शक्ति को केन्द्रित करना, अमेरिका के योगाचार्य डेना सेराये ने ’हार्ट आॅफ हनुमान’, अमेरिका की ऐना फाॅरेस्ट और आॅट्रेलिया के जोस कैलार्को ने ’फाॅरेस्ट योग’ का प्रशिक्षण दिया। फाॅरेस्ट योग एक संगीत, दर्शन, प्रार्थना, कविता के समग्रता की एक आधुनिक शैली है।
सूर्यउदय के समय माँ गंगा के तट पर अमेरिका से आयी अन्द्रा जार्ज के मधुर संगीत ने सभी प्रतिभागियोें को मंत्र मुग्ध कर दिया।

अमेरिका से आये प्रसिद्ध योगाचार्य गुरूमुख कौर खालसा  द्वारा कुण्डलिनी योग, अमेरिका के योगाचार्य टाॅमी रोजेन भी कुण्डलिनी योग, आयरलैण्ड के योगाचार्य ब्राउन सिद्वार्थ इंगले ने सोमैमेटिक योग, योगाचार्य जुल्स फेबर ने प्राणायाम और ध्यान, स्वामी उत्तमानन्द जी ने संस्कृत मंत्र कार्यशाला का नेतृत्व किया जो ओम और ओम नमः शिवाय के आन्तरिक अर्थ पर केंद्रित थी।
दोपहर के सत्र में-डाॅ अंजना भगत ने ’प्रारंभिक चक्र ध्यान’, अमेरिका की डैफनी त्से ने ’आत्मा के लिये जप’, परमार्थ निकेतन की स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती जी ने ’आध्यात्मिक पाठ्यक्रम-एक दिव्य कल’ पर सारगर्भित उद्बोधन दिया।

लद्दाख से आये बौद्ध गुरू भिक्खु संघसेना जी ने बौद्ध ध्यान का नेतृत्व किया। अमेरिका से आयी केटी फिशर ने जप के माध्यम से होने वाली शारीरिक  कंपन आवृतियों पर ध्यान केन्द्रित करने की विधा का अभ्यास कराया।

प्रख्यात अमेरिकी प्रेरक लेखक और स्पीकर ब्रैंडन बेज़ ’’द जर्नी’’ के विषय में चर्चा की। द जर्नी के माध्यम से उन्होने प्रत्यक्ष अनुभव बताया कि साढ़े छः सप्ताह में बिना दवाओं और सर्जरी के एक बड़े ट्यूमर का उपचार और उसके मूल कारणों को पता किया। उन्होने अपने भावनात्मक स्तर और अनुभवों को भी साझा किया।

युवा दयालान ने युवा योग, सिंगापुर से आये योगी अमनदीप सिंह ने कुण्डलिनी योग का नेतृत्व किया। डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी ने ’गंगा फ्लो मेडिटेशन’ आओ चले, अपना विस्तार कर सत्य के साथ सम्बंध स्थापित करे ध्यान कराया, इसके पश्चात सभी भावविभोर हो उठे।

आॅस्ट्रेलिया और न्यूयार्क से आये संगीतज्ञों ने तबला मास्टर पंकज सुहाश के साथ ’द रिदम आफॅ लाइफ’ की प्रस्तुति दी।

सायंकाल को 96 देशों से आये योग साधकों ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्तवी जी महाराज, साध्वी भगवती सरस्वती जी, साध्वी आभा सरस्वती जी,  बौद्ध गुरू भिक्खु संघसेना और अन्य सभी योगाचार्यों, वैज्ञानिकों, पर्यावरणविद्ों एंव संगीतज्ञों के साथ समुह फोटोग्राफी, पर्यावरण एवं नदियों के संरक्षण का संकल्प तथा वाटर  ब्लेंसिग सेरेमनी सम्पन्न की।
तत्पश्चात सभी प्रतिभगियों ने परमार्थ निकेतन तट पर होने वाली दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया।
रात्रिकालीन सत्र- परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों द्वारा गीत, नृत्य एवं नाट्क की मनमोहक प्रस्तुतियां प्रस्तुत की गयी जिसे देखकर योग जिज्ञासु झूमने-गानेे लगे।

योगाचार्य आनन्द मेहरोत्रा ने सत्व योग का नेतृत्व किया और प्रतिभागियों से कहा कि आप यहां पर ईश्वर के किसी महान उद्देश्य के लिये आये है, यहां पर आना कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि इसके पीछे एक ईश्वर का वृहद् उद्देश्य है अतः इस पवित्र वातावरण में रहकर आप अपने भीतर की क्षमताओं को जागृत करे।

केटी बी हैप्पी ने कहा अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में सहभाग मेरे जीवन की सुखद यात्रा है। मुझे लगता है माँ गंगा मुझे शुद्ध कर रही है; मैं यहां पर जिन लोगों से मिलती हूँ वह मेरे लिये अत्यंत महत्वपूर्ण है इसके लिये मैं स्वामी जी महाराज को कोटि-कोटि धन्यवाद देती हूँ। वास्तव में यह दुनिया का असली योग महोत्सव है।

बता दें कि अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में पूरे सप्ताह योग की 200 से अधिक कक्षायें प्रातः 4ः00 बजे से रात 9ः30 बजे तक सम्पन्न हो रही हैं जिसमें प्रमुख रूप से अष्टांग योग, आयंगर योग, विन्यास योग, कुण्डलिनी योग, जीवमुक्ति योग, सिन्तोह योग, सोमैटिक योग, हठ योग, राज योग, भक्ति योग, भरत योग, गंगा योग, लीला योग, डीप योग आदि एक सप्ताह तक प्रस्तुत किये जाने वाले 150 योगों के मुख्य प्रारूप हैं। इसके अतिरिक्त  ध्यान, मुद्रा, संस्कृतवाचन, आयुर्वेद, रेकी एवं भारतीय दर्शन की भी कक्षायें सम्पन्न हो रही हैं।

मालदीव, बेल्जियम, कोलंबिया, लेबनान, मेक्सिको, नेपाल, पेरू, नीदरलैण्ड, स्वीडन, थाईलैण्ड, वियतनाम, नामिबिया, इक्वेडोर, आॅस्ट्रिया, आस्ट्रेलिया, केन्या, क्यूबा, चिली अर्जेंटीना, अफगानिस्तान, अफ्रीका, रूस, इजरायल, पेलस्टाईन, चीन, हांगकांग, सिंगापुर, ताईबान, इन्डोनेशिया, बैंकाक, फिलिस्तीन, ईरान, जापान, केन्या, इटली, अमेरिका, यमन, जापान, जर्मनी, ब्राजील, नार्वे, यूके, थाईलैण्ड, तुर्की, ब्रिटेन, दक्षिण अमेरिका, स्पेन, कनाड़ा, जाम्बिया, वेनेजुएला, यूक्रेन, फिलीपींस, नाइजीरिया और कई अन्य राष्ट्रों से आये योग राजदूतों ने सहभाग किया।